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निवेशकों की चांदी: 2025–26 की रिकॉर्ड तेजी के पीछे असली वजह

नई दिल्ली, 08 जनवरी (कृषि भूमि ब्यूरो): चांदी की कीमतों में साल 2025 में जो रिकॉर्ड तोड़ तेजी देखने को मिली थी, वह 2026 में भी लगातार जारी है। आमतौर पर माना जाता है कि चांदी की कीमतों को ज्वेलरी या औद्योगिक मांग आगे बढ़ाती है, लेकिन मौजूदा तेजी की सबसे बड़ी वजह निवेशकों की आक्रामक खरीदारी बनकर उभरी है।

भारत में चांदी अब पारंपरिक धातु से आगे निकलकर एक मजबूत निवेश एसेट का रूप ले चुकी है।

7,000 टन आयात: निवेशकों ने बदली बाजार की दिशा

साल 2025 में भारत ने करीब 7,000 टन चांदी का आयात किया। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, यह आयात ज्वेलरी की मांग के कारण नहीं, बल्कि निवेश की जबरदस्त भूख की वजह से हुआ। निवेशक फिजिकल सिल्वर के साथ-साथ पेपर इंस्ट्रूमेंट्स जैसे ETF और फ्यूचर्स के जरिए भी बड़े पैमाने पर चांदी में पैसा लगा रहे हैं।

हाई नेटवर्थ और अल्ट्रा हाई नेटवर्थ निवेशकों की हिस्सेदारी इसमें खास तौर पर बढ़ी है, जो चांदी को लंबी अवधि के लिए सुरक्षित संपत्ति मान रहे हैं।

रिटर्न ने बढ़ाया भरोसा

हालिया कारोबारी सत्र में चांदी की कीमतों में गिरावट जरूर देखने को मिली। बुधवार शाम MCX पर चांदी करीब ₹6,000 प्रति किलो गिरकर ₹2.52 लाख प्रति किलो पर कारोबार करती दिखी। इसके बावजूद चांदी का रिटर्न प्रदर्शन निवेशकों को आकर्षित कर रहा है।

चांदी का रिटर्न प्रदर्शन

अवधि रिटर्न
पिछले 1 हफ्ते लगभग 15%
पिछले 1 महीना लगभग 40%
2026 (अब तक) लगभग 13%
पूरा साल 2025 लगभग 148%

विशेषज्ञों का कहना है कि हालिया गिरावट मुनाफावसूली का नतीजा है, न कि तेजी के ट्रेंड में कोई बदलाव।

ज्वेलरी की मांग सुस्त, निवेश बना सहारा

मार्किट एक्सपर्ट्स के अनुसार, कीमतें ऑल-टाइम हाई पर पहुंचने के बावजूद चांदी की खरीदारी का उत्साह कम नहीं हुआ है। इसकी वजह यह है कि मौजूदा तेजी पूरी तरह निवेश आधारित है।

भारत में ज्वेलरी और सिल्वरवेयर जैसे पारंपरिक सेगमेंट्स में मांग फिलहाल कमजोर बनी हुई है। इसके उलट, निवेशकों के बीच चांदी को लेकर नई कहानियां और भविष्य की संभावनाएं इसे मजबूत बनाए हुए हैं।

ETF और भारी सिल्वर बार की बढ़ती मांग

निवेशकों की दिलचस्पी सिर्फ छोटे निवेश तक सीमित नहीं है। सिल्वर ETF में लगातार इनफ्लो देखा जा रहा है, वहीं बड़े फिजिकल सिल्वर बार की खरीद भी तेजी से बढ़ी है।

बाजार सूत्रों के मुताबिक, 15 किलो और 30 किलो के सिल्वर बार खास तौर पर हाई नेटवर्थ निवेशकों के बीच लोकप्रिय हो रहे हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि चांदी को अब लॉन्ग-टर्म वैल्यू स्टोर के रूप में देखा जा रहा है।

तेजी की रफ्तार ने बाजार को चौंकाया

चांदी की कीमतें जिस रफ्तार से बढ़ीं, उसने बाजार के कई अनुभवी जानकारों को भी हैरान कर दिया। जिन स्तरों को पहले 2026 के लिए लक्ष्य माना जा रहा था, वे काफी पहले ही हासिल हो चुके हैं।

हालांकि एक्सपर्ट्स आगाह करते हैं कि जैसे-जैसे कीमतें ऊंचे स्तर पर टिकेंगी, डिमांड का स्वरूप बदल सकता है।

महंगी चांदी और सब्स्टीट्यूशन का जोखिम

ऊंची कीमतों का एक दूसरा पहलू भी है। अगर चांदी और महंगी होती है, तो इंडस्ट्रीज इसके सस्ते विकल्प तलाश सकती हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य सेक्टर्स में कॉपर और निकल जैसे विकल्पों पर विचार शुरू हो चुका है।

सोलर सेक्टर में भी सिल्वर पेस्ट और पाउडर के लिए वैकल्पिक सामग्रियों की खोज तेज हो गई है। ऐसे में यह सवाल अहम है कि किस स्तर पर चांदी का इस्तेमाल आर्थिक रूप से टिकाऊ नहीं रह जाएगा।

ग्लोबल पॉलिसी से तय होगी आगे की दिशा

विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले महीनों में चांदी की कीमतों की चाल काफी हद तक वैश्विक नीतिगत फैसलों पर निर्भर करेगी। अमेरिका में संभावित Section 232 टैरिफ और उससे जुड़े व्यापारिक फैसले मार्च 2026 तक सामने आ सकते हैं, जिनका असर बाजार पर पड़ना तय माना जा रहा है।

इसके साथ ही, पिछले एक साल में आई तेज तेजी को देखते हुए निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह भी दी जा रही है।

फिजिकल सिल्वर मार्केट में रेगुलेशन की जरूरत

घरेलू बाजार को लेकर चिराग शेट्टी ने फिजिकल सिल्वर मार्केट में मजबूत रेगुलेशन की जरूरत पर जोर दिया है। उनका कहना है कि भले ही पिछले एक दशक में शुद्धता के मानकों में सुधार हुआ हो, लेकिन यह बाजार अब भी काफी हद तक अनऑर्गनाइज्ड है।

चांदी की कीमतें जिस स्तर पर पहुंच चुकी हैं, उसे देखते हुए गोल्ड की तरह कंपलसरी हॉलमार्किंग अब जरूरी हो गई है, ताकि उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा हो सके और बाजार में पारदर्शिता बढ़े।

कुलमिलाकर, 2025–26 में चांदी की कीमतों में आई ऐतिहासिक तेजी की असली ताकत निवेशकों का भरोसा और आक्रामक खरीदारी रही है। हालांकि ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली, सब्स्टीट्यूशन का खतरा और वैश्विक नीतिगत फैसले आगे की चाल को प्रभावित कर सकते हैं।

फिलहाल इतना तय है कि चांदी अब सिर्फ गहनों की धातु नहीं, बल्कि रणनीतिक निवेश विकल्प बन चुकी है।

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