नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): Sugar Price: देश में चीनी की कीमतों में तेजी का दौर जारी है। पंजाब की मंडियों में सोमवार को चीनी का थोक भाव बढ़कर ₹60 प्रति किलो के नए स्तर पर पहुंच गया। इसके साथ ही खुदरा बाजार में उपभोक्ताओं को करीब ₹65 प्रति किलो चुकाना पड़ रहा है। यह तेजी ऐसे समय आई है जब केंद्र सरकार ने चीनी की जमाखोरी और सट्टेबाजी पर अंकुश लगाने के लिए देशभर में डीलरों के लिए स्टॉक-होल्डिंग सीमा लागू की है।
पंजाब में किराना कारोबारियों के मुताबिक, करीब एक महीने पहले चीनी का खुदरा भाव ₹46-48 प्रति किलो था। लगभग एक सप्ताह पहले यह ₹54-56 के आसपास था, लेकिन अब यह करीब ₹65 तक पहुंच गया है। यानी एक महीने में उपभोक्ताओं के लिए चीनी की कीमत (Sugar Price) में करीब ₹17-19 प्रति किलो का अंतर आया है।
Sugar Price: चीनी की कीमत क्यों बढ़ रही है?
मौजूदा तेजी के पीछे कई कारणों की चर्चा है। पंजाब के खुदरा कारोबारियों का कहना है कि बाजार में मांग में ऐसी कोई असाधारण वृद्धि नहीं हुई है, जिससे इतनी तेज कीमत बढ़ोतरी को उचित ठहराया जा सके। उनका दावा है कि नियमित सप्लाई बाधित होने और बाजार में उपलब्धता को लेकर अनिश्चितता से कृत्रिम कमी की स्थिति बन रही है।
हालांकि, इन आरोपों को अभी स्वतंत्र रूप से जमाखोरी का प्रमाण नहीं माना जा सकता। कीमतों में तेजी के पीछे उत्पादन, उपलब्ध स्टॉक, मिलों से उठान, व्यापारिक व्यवहार और आगामी गन्ना सीजन जैसे कई कारक भी महत्वपूर्ण हैं।
सरकार ने 30 नवंबर तक लागू की स्टॉक लिमिट
Sugar Price: कीमतों पर नियंत्रण और बाजार में पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने 1 अगस्त से 30 नवंबर 2026 तक चीनी डीलरों पर स्टॉक-होल्डिंग सीमा लागू की है। सरकार ने कहा है कि हाल में चीनी के एक्स-मिल भाव में हुई वृद्धि मौजूदा मांग-आपूर्ति के मूलभूत संकेतकों से पूरी तरह समर्थित नहीं दिखती। इसलिए जमाखोरी और सट्टेबाजी पर रोक लगाने के लिए यह कदम उठाया गया।
पंजाब में राज्य प्रशासन ने भी कीमतों में बढ़ोतरी को देखते हुए जमाखोरी रोकने के निर्देश दिए हैं। राज्य के अधिकारियों के अनुसार, डीलरों को अपने स्टॉक की घोषणा और नियमित रूप से इन्वेंटरी अपडेट करने की व्यवस्था का पालन करना होगा।
इथेनॉल और गन्ने की नई फसल भी अहम फैक्टर
चीनी बाजार में इथेनॉल का मुद्दा भी लंबे समय से महत्वपूर्ण है। सरकार ने चीनी उद्योग में अतिरिक्त गन्ने/चीनी को इथेनॉल उत्पादन की ओर मोड़ने की नीति अपनाई है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, चीनी सीजन 2024-25 में 34 लाख टन चीनी इथेनॉल के लिए डायवर्ट की गई थी। सरकार का उद्देश्य चीनी के अतिरिक्त स्टॉक को कम करने के साथ इथेनॉल ब्लेंडिंग को बढ़ावा देना है।
हालांकि, मौजूदा कीमत वृद्धि को केवल इथेनॉल से जोड़ना उचित नहीं होगा। घरेलू उपलब्धता, आगामी गन्ना उत्पादन और बाजार में वास्तविक स्टॉक की स्थिति भी कीमतों की दिशा तय करेगी।
शक्कर और गुड़ भी हुए महंगे
चीनी के साथ दूसरे मीठे उत्पादों की कीमतों में भी तेजी देखी जा रही है। पंजाब के बाजार से मिली जानकारी के अनुसार, पिछले एक महीने में शक्कर का भाव करीब ₹80 से बढ़कर ₹90 प्रति किलो और गुड़ का भाव भी करीब ₹80 से ₹90 प्रति किलो हो गया है। ब्राउन शुगर के दाम में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

आगे क्या होगा?
आने वाले दिनों में चीनी की कीमत (sugar price) का रुख मुख्य रूप से सप्लाई की स्थिति, मिलों से बाजार में उठान, स्टॉक लिमिट के अनुपालन और आगामी गन्ना सीजन की संभावनाओं पर निर्भर करेगा। केंद्र की स्टॉक सीमा 30 नवंबर तक लागू है, इसलिए सरकार और राज्य एजेंसियों की निगरानी बढ़ने की उम्मीद है।
एक और अहम पहलू यह है कि सरकार ने 2026-27 चीनी सीजन के लिए गन्ने का Fair and Remunerative Price (FRP) ₹365 प्रति क्विंटल तय किया है, जो 1 अक्टूबर 2026 से शुरू होने वाले सीजन पर लागू होगा। इससे चीनी उद्योग की लागत और आगे की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि बाजार में बढ़ी कीमतें वास्तविक सप्लाई दबाव का परिणाम हैं या व्यापारिक स्तर पर बनी कमी का। आने वाले हफ्तों में सरकारी निगरानी और बाजार में स्टॉक की उपलब्धता इस तस्वीर को और स्पष्ट कर सकती है।
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