रिपोर्ट: बिचित्र शर्मा, भरमौर (चम्बा)
कृषि भूमि ब्यूरो: पाइन ग्रीन एग्रो FPC: हिमाचल प्रदेश के जनजातीय और दुर्गम क्षेत्र भरमौर में खेती और बागवानी को एक मुनाफे वाले व्यवसाय में बदलने के लिए जमीनी स्तर पर बड़े प्रयास शुरू हो गए हैं। स्थानीय किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से गठित ‘पाइन ग्रीन एग्रो फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी’ (पाइन ग्रीन एग्रो FPC) इलाके में कृषि क्रांति की नई उम्मीद बनकर उभरी है। कंपनी के इस सहकारी (cooperative) मॉडल को स्थानीय ग्रामीण समुदायों का जबरदस्त समर्थन मिल रहा है, जिसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि महज 15 दिनों के भीतर ही 50 से अधिक प्रगतिशील किसानों ने इस FPC के साथ अपना पंजीकरण करवा लिया है।
पाइन ग्रीन एग्रो FPC का प्राथमिक उद्देश्य केवल कागजों पर किसानों की संख्या बढ़ाना नहीं है, बल्कि उन्हें एक ऐसा एकीकृत मंच प्रदान करना है जहां आधुनिक तकनीक और पारंपरिक कृषि पद्धतियों का बेहतर समन्वय हो सके। कंपनी किसानों को बेहतर विपणन (marketing) व्यवस्था, उच्च गुणवत्ता वाले आधुनिक कृषि उपकरण, डिजिटल वित्तीय साक्षरता और केंद्र व राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं से सीधे जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है।
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खेतों से सीधे खरीद: बिचौलियों के जाल से मिलेगी मुक्ति
भरमौर और चंबा के दूरदराज के क्षेत्रों में काम करने वाले किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी फसलों को सही बाजार और उचित मूल्य दिलाना रही है। भौगोलिक दुर्गमता के कारण अक्सर किसानों को बिचौलियों (middlemen) पर निर्भर रहना पड़ता था, जिससे उनका मुनाफा कम हो जाता था।
इस समस्या का स्थाई समाधान निकालते हुए पाइन ग्रीन एग्रो FPC ने एक विशेष योजना तैयार की है। कंपनी की टीमें सीधे किसानों के खेतों और सेब के बागों में जाकर उनकी उपज की सीधे खरीद करेंगी। इससे न केवल परिवहन का खर्च बचेगा बल्कि किसानों को उनकी मेहनत का शत-प्रतिशत और सही मूल्य बिना किसी कटौती के सीधे उनके बैंक खातों में मिल सकेगा।
पाइन ग्रीन एग्रो FPC: चालू वित्तीय वर्ष में 3,000 किसानों को जोड़ने का लक्ष्य
पाइन ग्रीन एग्रो FPC के संचालक मेद सिंह ने भविष्य की योजनाओं को साझा करते हुए बताया कि चालू वित्तीय वर्ष 2026 में FPC का लक्ष्य क्षेत्र के कम से कम 3,000 किसानों और बागवानों को इस मुहिम से जोड़ना है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए कंपनी द्वारा विभिन्न पंचायतों और गांवों में लगातार जागरूकता शिविरों का आयोजन किया जा रहा है।

इन विशेष शिविरों में किसानों को मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर प्रशिक्षित किया जा रहा है:
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कम लागत में वैज्ञानिक विधियों द्वारा अधिक और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन कैसे लें।
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रसायन मुक्त प्राकृतिक खेती और जैविक खाद का सही उपयोग।
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डिजिटल भुगतान प्रणालियों का ज्ञान और बेहतर वित्तीय प्रबंधन।
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स्थानीय जलवायु के अनुकूल फसल विविधीकरण (crop diversification)।
महिला किसानों की बढ़ती भागीदारी और ग्रामीण विकास
इस अभियान की सबसे खूबसूरत तस्वीर यह है कि जनजातीय क्षेत्र की महिला किसान भी बहुत बड़ी संख्या में आगे आकर इस FPC की सदस्यता ले रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की यह सक्रिय भागीदारी इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि इस कोऑपरेटिव मॉडल पर जनता का भरोसा मजबूत हुआ है। संचालकों का मानना है कि महिलाओं के आर्थिक रूप से सशक्त होने से पहाड़ी क्षेत्रों की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नई गति और मजबूती मिलेगी।
इसके अलावा, क्षेत्र से होने वाले युवाओं के पलायन को रोकने के लिए पाइन ग्रीन एग्रो पारंपरिक फसलों, स्थानीय कृषि संस्कृति और स्थानीय पहचान को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने पर काम कर रही है।
पाइन ग्रीन एग्रो FPC: मुख्य लक्ष्य और रणनीतियां
| योजना / बिंदु | वर्तमान स्थिति और भविष्य का रोडमैप | अपेक्षित लाभ और प्रभाव |
| प्रारंभिक पंजीकरण | शुरुआती 15 दिनों में 50+ किसान पंजीकृत | मॉडल के प्रति शुरुआती सकारात्मक भरोसा |
| वार्षिक सदस्यता लक्ष्य | वित्तीय वर्ष के अंत तक 3,000 किसानों को जोड़ना | बड़े पैमाने पर सामूहिक विपणन क्षमता का विकास |
| उपज की खरीद प्रणाली | सीधे खेतों और बागों से डायरेक्ट परचेजिंग | बिचौलियों का खात्मा, किसानों को सीधा मुनाफा |
| महिला सशक्तिकरण | महिला स्वयं सहायता समूहों और व्यक्तिगत महिला किसानों की भागीदारी | ग्रामीण घरेलू आय में सुधार और आत्मनिर्भरता |
| ज्ञान केंद्र की स्थापना | शीघ्र ही ‘किसान लाइब्रेरी’ और विशेषज्ञों द्वारा नियमित ट्रेनिंग | आधुनिक और प्राकृतिक खेती से संबंधित सूचनाओं की आसान पहुंच |
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