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लखनऊ (कृषि भूमि ब्यूरो) – मुख्यमंत्री पशुधन बीमा योजना उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश सरकार ने किसानों और पशुपालकों को बड़ी राहत देते हुए मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में लखनऊ में हुई कैबिनेट बैठक में इस योजना की कार्ययोजना और वित्तीय प्रावधान को स्वीकृति दी गई। पशुधन बीमा योजना का उद्देश्य पशु की मृत्यु, दुर्घटना, महामारी या प्राकृतिक आपदा जैसी परिस्थितियों में पशुपालकों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है।

यह योजना उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में लागू की जाएगी। इसके दायरे में विशेष रूप से लघु एवं सीमांत किसान, भूमिहीन पशुपालक, डेयरी फार्म संचालक और अन्य पात्र पशुपालक आएंगे। वित्त वर्ष 2026-27 में योजना के संचालन के लिए 60 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है।

सरकार का लक्ष्य इस बजट से प्रदेश में कुल 2,28,350 पशुओं का बीमा कराने का है। इनमें सामान्य श्रेणी के साथ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति घटक के तहत आने वाले पशुपालकों के पशुओं को भी शामिल किया जाएगा।

पशुधन बीमा योजना: पशुपालक को देना होगा केवल 15 फीसदी प्रीमियम

मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना में पशुपालकों पर प्रीमियम का बोझ कम रखने की व्यवस्था की गई है। बीमा प्रीमियम का 85 प्रतिशत हिस्सा सरकारी सहायता से वहन किया जाएगा, जबकि लाभार्थी पशुपालक को केवल 15 प्रतिशत अंशदान देना होगा।

योजना के तहत महामारी, दैवीय आपदा और आकस्मिक दुर्घटना के कारण पशु की मृत्यु होने पर बीमा सहायता दी जाएगी। इसके अलावा, पशु के स्थायी रूप से कार्य करने में अक्षम होने की स्थिति में भी योजना के नियमों के अनुसार बीमा लाभ मिल सकेगा। प्रकाशित योजना विवरण के अनुसार स्थायी पूर्ण विकलांगता की स्थिति में बीमित राशि का 75 प्रतिशत तक भुगतान किए जाने का प्रावधान है।

पशुधन बीमा योजना के तहत बीमा दावा स्वीकृत होने के बाद क्लेम की राशि सीधे लाभार्थी पशुपालक के बैंक खाते में भेजी जाएगी। इससे दावा निस्तारण में पारदर्शिता बढ़ाने और पशुपालकों तक सहायता राशि सीधे पहुंचाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

गाय, भैंस से लेकर भेड़-बकरी तक को बीमा सुरक्षा

पशुधन बीमा योजना के तहत कई श्रेणियों के पशुओं को बीमा सुरक्षा के दायरे में शामिल किया जाएगा। इनमें गाय, भैंस, बैल, घोड़ा, खच्चर, गधा, भेड़ और बकरी जैसे पशु शामिल हैं।

सरकार ने अलग-अलग पशुओं के लिए मानक बीमा मूल्य भी निर्धारित किए हैं। मुर्रा नस्ल की भैंस का बीमा मूल्य 75,000 रुपये रखा गया है। विदेशी और उन्नत नस्ल की गायों के लिए नस्ल के अनुसार 50,000 रुपये से 65,000 रुपये तक का मूल्य निर्धारित किया गया है। इसी तरह बैल के लिए 40,000 रुपये, घोड़े के लिए 60,000 रुपये, खच्चर और गधे के लिए 20,000 रुपये तथा भेड़ और बकरी के लिए 6,500 रुपये का मानक मूल्य तय किए जाने की जानकारी सामने आई है।

सरकार का मानना है कि पशुधन पर निर्भर ग्रामीण परिवारों के लिए किसी पशु की अचानक मृत्यु बड़ा आर्थिक संकट पैदा कर सकती है। बीमा सुरक्षा मिलने से ऐसे परिवारों को नुकसान की भरपाई में मदद मिलेगी और डेयरी तथा पशुपालन गतिविधियों में निवेश का जोखिम भी कम होगा।

पशुधन बीमा योजना
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कानपुर और रायबरेली में बनेंगे उद्यान महाविद्यालय

कैबिनेट ने कृषि शिक्षा के विस्तार से जुड़े प्रस्तावों को भी मंजूरी दी है। कानपुर और रायबरेली में नए उद्यान महाविद्यालय स्थापित किए जाएंगे। ये महाविद्यालय चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के अंतर्गत स्थापित किए जाने हैं।

प्रत्येक महाविद्यालय की स्थापना पर लगभग 50 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसके लिए 20-20 हेक्टेयर भूमि उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी। सरकार का उद्देश्य बागवानी शिक्षा, अनुसंधान और प्रशिक्षित मानव संसाधन को बढ़ावा देना है।

स्टार्टअप नीति-2026 से नवाचार और रोजगार पर जोर

कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति-2026 और स्टार्टअप मिशन से जुड़े प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है। नई व्यवस्था का उद्देश्य प्रदेश में नवाचार, उद्यमिता और इनक्यूबेशन व्यवस्था को मजबूत करना है।

नीति में हाईटेक और डीप-टेक क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने के साथ स्टार्टअप को शुरुआती विचार से लेकर प्रोटोटाइप, सीड फंडिंग और विस्तार तक सहायता देने की व्यवस्था की गई है। सरकार का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में उत्तर प्रदेश के स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करना, युवाओं को उद्यमिता से जोड़ना और निवेश तथा रोजगार के नए अवसर तैयार करना है।

पशुधन बीमा, कृषि शिक्षा और स्टार्टअप से जुड़े इन फैसलों के जरिए राज्य सरकार ने एक ही कैबिनेट बैठक में ग्रामीण अर्थव्यवस्था और नवाचार आधारित उद्योगों, दोनों को बढ़ावा देने की दिशा में कदम बढ़ाया है।

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