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हरियाणा में प्राकृतिक खेती को मिलेगा बड़ा बढ़ावा, पंचायत भूमि पर बनेगी नई नीति: मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी

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प्राकृतिक खेती

नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): प्राकृतिक खेती: कृषि क्षेत्र में टिकाऊ विकास और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से हरियाणा सरकार ने प्राकृतिक एवं जैविक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा है कि राज्य सरकार अगले वर्ष पंचायतों के स्वामित्व वाली भूमि पर प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए विशेष नीति तैयार करेगी। इसके साथ ही कृषि विभाग की लगभग 800 एकड़ भूमि ऐसे किसानों को पट्टे पर दी जाएगी, जो कम से कम 10 वर्षों तक वहां प्राकृतिक एवं जैविक खेती करने के लिए प्रतिबद्ध होंगे।

कुरुक्षेत्र में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा आयोजित ‘कृषि कार्यशाला’ को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्राकृतिक खेती को एक जन आंदोलन का रूप देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इस अवसर पर गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत और हरियाणा के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा भी उपस्थित रहे।

किसानों को वित्तीय सहायता और आसान प्रमाणन व्यवस्था

मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि एपीडा (APEDA) से प्रमाणित प्राकृतिक एवं जैविक किसानों को पांच वर्षों तक प्रति एकड़ प्रति वर्ष 10 हजार रुपये की वित्तीय सहायता दी जाएगी। साथ ही जैविक खेती के प्रमाणीकरण की प्रक्रिया को सरल और सुलभ बनाने के लिए हरियाणा राज्य बीज प्रमाणीकरण एजेंसी को प्रमाणन संस्था के रूप में विकसित किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि किसानों को उनके उत्पादों के बेहतर विपणन की सुविधा देने के लिए पंचकूला, यमुनानगर, करनाल, सोनीपत, रोहतक, गुरुग्राम, फरीदाबाद, हिसार, चरखी दादरी और नारनौल की मंडियों में प्राकृतिक एवं जैविक उत्पादों की बिक्री के लिए विशेष स्थान उपलब्ध कराया जाएगा। इसके अलावा परीक्षण प्रयोगशालाएं और एपीडा से मान्यता प्राप्त प्रमाणन केंद्र भी स्थापित किए जाएंगे।

स्मार्ट एग्रीकल्चर के साथ प्राकृतिक खेती

राज्य सरकार हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के सहयोग से कुरुक्षेत्र जिले में 2,000 एकड़ क्षेत्र में ‘स्मार्ट एग्रीकल्चर’ योजना के तहत आधुनिक तकनीकों के साथ प्राकृतिक खेती का मॉडल विकसित करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना के तहत किसानों को किसी प्रकार का नुकसान होने पर उसकी भरपाई राज्य सरकार करेगी।

इसके अतिरिक्त पंचकूला जिले के मोरनी ब्लॉक को प्राकृतिक एवं जैविक खेती आधारित मॉडल ब्लॉक के रूप में विकसित करने की भी योजना है। सरकार का उद्देश्य प्राकृतिक खेती को वैज्ञानिक तकनीकों के साथ जोड़कर किसानों को अधिक लाभ पहुंचाना है।

प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने वर्ष 2022 में प्राकृतिक खेती योजना शुरू की थी और इसके लिए एक समर्पित पोर्टल भी विकसित किया गया है। अब तक लगभग दो लाख किसानों ने तीन लाख एकड़ क्षेत्र का पंजीकरण कराया है। इनमें से 23,930 किसानों के 44,077 एकड़ क्षेत्र का सत्यापन किया जा चुका है।

वर्ष 2025-26 के दौरान प्रदेश में 20,727 एकड़ भूमि पर प्राकृतिक खेती की गई। किसानों को प्रशिक्षण देने के लिए कुरुक्षेत्र, जींद, सिरसा और करनाल में विशेष प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए गए हैं। अब तक 12,188 किसानों, महिलाओं और सरकारी कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जबकि 6,234 सरपंचों को ऑनलाइन प्रशिक्षण प्रदान किया गया है।

किसानों को सब्सिडी और अनुदान का लाभ

प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने देसी गाय खरीद पर मिलने वाली सब्सिडी को बढ़ाकर 30 हजार रुपये कर दिया है। इसके अलावा प्राकृतिक खेती में उपयोग होने वाले कच्चे माल के भंडारण और प्रसंस्करण के लिए चार ड्रम खरीदने पर प्रत्येक किसान को 3,000 रुपये की सहायता दी जा रही है।

सरकार के अनुसार अब तक 2,500 किसानों को ड्रम खरीदने के लिए 75 लाख रुपये और 1,171 किसानों को देसी गाय खरीदने के लिए कुल 2.97 करोड़ रुपये की अनुदान राशि सीधे उनके बैंक खातों में हस्तांतरित की जा चुकी है।

प्राकृतिक खेती समय की मांग: आचार्य देवव्रत

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि प्राकृतिक खेती केवल एक कृषि पद्धति नहीं बल्कि भविष्य की आवश्यकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता लगातार घट रही है, जिससे आने वाले वर्षों में कृषि भूमि के बंजर होने का खतरा बढ़ सकता है।

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उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती देशी गाय आधारित, कम लागत वाली और पर्यावरण अनुकूल कृषि प्रणाली है, जो मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने के साथ किसानों की उत्पादन लागत भी कम करती है। राज्यपाल ने किसानों से अपील की कि वे अपनी भूमि के छोटे हिस्से से ही सही, प्राकृतिक खेती की शुरुआत करें और इसे व्यापक स्तर पर अपनाने की दिशा में आगे बढ़ें।

कुलमिलाकर, हरियाणा सरकार की नई पहलें यह संकेत देती हैं कि राज्य प्राकृतिक और जैविक खेती को कृषि विकास की मुख्यधारा में लाने की दिशा में गंभीरता से कार्य कर रहा है। नई नीति, वित्तीय सहायता, बाजार सुविधाएं, प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग जैसी योजनाएं किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर सकती हैं। यदि इन योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन होता है तो हरियाणा देश में प्राकृतिक खेती का अग्रणी मॉडल राज्य बन सकता है।

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