[polylang_langswitcher]

हरियाणा: कपास उत्पादन घटा, कीमतें टूटीं, किसानों को प्रति एकड़ ₹15,000 से अधिक नुकसान

नई दिल्ली, 25 फरवरी (कृषि भूमि ब्यूरो): कपास उत्पादन में कमी अब हरियाणा के किसानों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन चुका है। राज्य में कपास की खेती लगातार घाटे का सौदा साबित हो रही है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति पर सीधा असर पड़ रहा है। हाल ही में चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि किसानों को प्रति एकड़ औसतन ₹15,000 से अधिक का नुकसान उठाना पड़ रहा है।

यह रिपोर्ट खरीफ सीजन 2025 पर आधारित है, जिसे फरवरी 2026 में आयोजित एग्रीकल्चर ऑफिसर्स वर्कशॉप में प्रस्तुत किया गया।

पैदावार में 30% गिरावट, कीमतों में भी कमी

कपास उत्पादन में कमी

रिपोर्ट के अनुसार, कपास की उत्पादकता में भारी गिरावट दर्ज की गई है। वर्ष 2025 में प्रति एकड़ औसत पैदावार घटकर 4 क्विंटल रह गई, जबकि 2024 में यह 5.70 क्विंटल थी। यानी उत्पादन में लगभग 30 प्रतिशत की कमी आई है।

इसके साथ ही किसानों को मिलने वाली कीमत भी घट गई। औसत कीमत 7,071 रुपये प्रति क्विंटल से गिरकर 6,020 रुपये प्रति क्विंटल रह गई, जो लगभग 15 प्रतिशत की कमी दर्शाती है।

हालांकि केंद्र सरकार ने 2025 के लिए मध्यम रेशे वाली कपास का MSP ₹7,710 और लंबी रेशे वाली कपास का MSP ₹8,110 तय किया था, लेकिन किसानों को बाजार में इससे कम कीमत मिल रही है।

लागत और आमदनी का गणित बिगड़ा

कपास की खेती में बढ़ती लागत और घटती आमदनी ने किसानों को संकट में डाल दिया है। नीचे दिए गए आंकड़े स्थिति को स्पष्ट करते हैं:

मद प्रति एकड़ राशि (₹)
कुल लागत 40,024
फसल बिक्री से आय 24,081
बाई-प्रोडक्ट आय 801
कुल आय 24,882
औसत नुकसान 15,142

इस लागत में खेत की तैयारी, सिंचाई, बीज, उर्वरक और तुड़ाई जैसे सभी खर्च शामिल हैं।

2017 के बाद से लगातार नुकसान

विश्वविद्यालय के कृषि अर्थशास्त्र विभाग के वैज्ञानिकों के अनुसार, कपास की खेती में यह नुकसान कोई नई समस्या नहीं है। वर्ष 2017 के बाद से ही किसानों को लगातार घाटा झेलना पड़ रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि कीटों और रोगों, खासकर गुलाबी सूंडी (Pink Bollworm), ने फसल को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। यदि जल्द नई और उन्नत किस्में विकसित नहीं की गईं, तो आने वाले 3 से 5 वर्षों में राज्य में कपास किसानों की संख्या तेजी से घट सकती है।

जिलों में नुकसान की स्थिति

हरियाणा के विभिन्न जिलों में कपास की खेती मुख्य रूप से की जाती है, लेकिन नुकसान की मात्रा अलग-अलग है:

जिला प्रति एकड़ औसत नुकसान (₹)
हिसार 17,515
फतेहाबाद 17,315
चरखी दादरी 15,276
भिवानी 14,852
महेंद्रगढ़ 14,144
सिरसा 11,250
रेवाड़ी 9,548

फतेहाबाद में किसानों का खर्च सबसे अधिक ₹48,721 प्रति एकड़ दर्ज किया गया, जबकि हिसार में औसत नुकसान सबसे ज्यादा रहा।

किसानों की जमीनी हकीकत

कई किसानों ने बताया कि 2025 में उन्हें दोहरी मार झेलनी पड़ी। एक तरफ गुलाबी सूंडी के हमले से फसल खराब हुई, वहीं दूसरी ओर बारिश ने नुकसान बढ़ा दिया।

जब किसान अपनी उपज लेकर मंडियों में पहुंचे, तो उन्हें लागत के बराबर भी कीमत नहीं मिल पाई। इससे खेती का पूरा गणित बिगड़ गया।

प्रभावी उपाय की दरकार

हरियाणा में कपास की खेती अब गंभीर संकट के दौर से गुजर रही है। उत्पादन में गिरावट, लागत में वृद्धि और बाजार में कम कीमतों के कारण किसानों का भरोसा इस फसल से उठता जा रहा है।

यदि समय रहते नई तकनीक, बेहतर बीज और प्रभावी कीट नियंत्रण उपाय नहीं अपनाए गए, तो राज्य में कपास उत्पादन और किसानों की संख्या दोनों में बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है।

===
हमारे लेटेस्ट अपडेट्स और खास जानकारियों के लिए अभी जुड़ें — बस इस लिंक पर क्लिक करें:
https://whatsapp.com/channel/0029Vb0T9JQ29759LPXk1C45

शेयर :

Facebook
Twitter
LinkedIn
WhatsApp

संबंधित श्रेणी न्यूज़

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हमारे न्यूज़लेटर की सदस्यता लें

ताज़ा न्यूज़

विज्ञापन

विशेष न्यूज़

Stay with us!

Subscribe to our newsletter and get notification to stay update.

राज्यों की सूची