नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): यूरिया और डीएपी: अंतरराष्ट्रीय उर्वरक बाजार से भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। वैश्विक स्तर पर यूरिया और डाईअमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई है, जिससे देश के उर्वरक आयात बिल पर दबाव कम होने की उम्मीद है। साथ ही आगामी खरीफ और रबी सीजन में किसानों को उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के प्रयासों को भी मजबूती मिलेगी।
उर्वरक उद्योग के सूत्रों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया की कीमतों में लगभग 250 डॉलर प्रति टन तक की कमी आई है, जिसके बाद इसकी कीमत घटकर करीब 650 डॉलर प्रति टन रह गई है। यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब भारत ने हाल ही में 25 लाख टन यूरिया आयात के लिए टेंडर जारी किया था, जिसमें पश्चिमी तट के लिए 935 डॉलर प्रति टन और पूर्वी तट के लिए 959 डॉलर प्रति टन की दर से सौदे हुए थे।
नए आयात टेंडर में कम कीमत मिलने की उम्मीद
सूत्रों का कहना है कि सरकार ने अब 17 लाख टन यूरिया आयात के लिए नया टेंडर जारी किया है। मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए इस बार कीमत 700 डॉलर प्रति टन से नीचे रहने की संभावना जताई जा रही है। यदि ऐसा होता है तो सरकार के सब्सिडी बोझ में भी कुछ कमी आ सकती है।
डीएपी बाजार में भी नरमी का रुख देखने को मिला है। हाल के महीनों में 900 डॉलर प्रति टन से ऊपर पहुंच चुकी डीएपी की कीमत अब घटकर लगभग 890 डॉलर प्रति टन पर आ गई है।
ऊंची कीमतों पर वैश्विक मांग घटी
विशेषज्ञों के अनुसार, कीमतों में गिरावट की सबसे बड़ी वजह प्रमुख आयातक देशों द्वारा ऊंची दरों पर खरीदारी से परहेज करना है। भारत को छोड़कर अधिकांश देशों में किसानों को उर्वरक बाजार मूल्य पर ही खरीदना पड़ता है, जबकि भारत में यूरिया पर भारी सरकारी सब्सिडी उपलब्ध है।
ब्राजील, यूरोप, अफ्रीका और एशिया के कई देशों में महंगे उर्वरकों के कारण मांग कमजोर पड़ गई। नतीजतन, वैश्विक आपूर्ति और मांग के बीच संतुलन बिगड़ा और कीमतों में गिरावट आने लगी।
यूरिया और डीएपी: होर्मुज संकट से बढ़ी थीं कीमतें
उर्वरक बाजार में यह गिरावट उस तेज उछाल के बाद आई है, जो होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास उत्पन्न भू-राजनीतिक तनाव के कारण देखने को मिली थी। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमले के बाद इस क्षेत्र से गैस और उर्वरकों की शिपिंग प्रभावित हुई थी। इससे आपूर्ति बाधित हुई और कई उर्वरकों की कीमतें लगभग दोगुनी तक पहुंच गई थीं।
भारत में गैस आपूर्ति प्रभावित होने से घरेलू यूरिया उत्पादन भी प्रभावित हुआ। जहां सामान्य परिस्थितियों में देश में लगभग 25 लाख टन मासिक यूरिया उत्पादन होता है, वहीं संकट के दौरान यह घटकर 17-18 लाख टन प्रति माह तक रह गया। इसी कारण सरकार को ऊंची कीमतों पर आयात सौदे करने पड़े।
डीएपी और यूरिया की ताजा वैश्विक कीमतें
| उर्वरक | हालिया कीमत (डॉलर/टन) | पूर्व उच्च स्तर (डॉलर/टन) |
|---|---|---|
| यूरिया | 650 | 935-959 |
| डीएपी | 890 | 920-930 |

एनपीके उर्वरकों के दाम बढ़े
जहां यूरिया और डीएपी की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में गिरावट आई है, वहीं घरेलू बाजार में कई कॉम्प्लेक्स उर्वरकों (एनपीके) की कीमतें बढ़ गई हैं। उर्वरक कंपनियां लागत बढ़ने का हवाला देते हुए विभिन्न एनपीके ग्रेड के दाम बढ़ा रही हैं।
बाजार में कुछ एनपीके वेरिएंट की कीमतें 2,250 रुपये से बढ़कर 2,450 रुपये प्रति 50 किलोग्राम बैग तक पहुंच गई हैं। उद्योग सूत्रों के अनुसार, कुछ बड़ी कंपनियों ने मार्केटिंग फेडरेशनों को इन्हीं ऊंची दरों पर आपूर्ति का प्रस्ताव दिया है।
खरीफ सीजन के लिए स्टॉक पर्याप्त
उर्वरकों की उपलब्धता को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय ने भरोसा दिलाया है कि देश में फिलहाल सभी प्रमुख उर्वरकों का स्टॉक संतोषजनक स्तर पर है। मंत्रालय के अनुसार, आगामी खरीफ 2026 सीजन के लिए कुल उर्वरक आवश्यकता 390.54 लाख मीट्रिक टन आंकी गई है।
इसके मुकाबले वर्तमान में लगभग 200.12 लाख मीट्रिक टन उर्वरक स्टॉक उपलब्ध है, जो अनुमानित आवश्यकता का करीब 51 प्रतिशत है। इसके अलावा हालिया संकट के बाद आयात और घरेलू उत्पादन के माध्यम से लगभग 117.6 लाख टन अतिरिक्त उपलब्धता भी सुनिश्चित की गई है।
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते शिपिंग अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। ऐसे में खरीफ बुवाई के चरम दौर और उसके बाद उर्वरकों की निर्बाध आपूर्ति बनाए रखना सरकार और उद्योग दोनों के लिए महत्वपूर्ण चुनौती बनी रहेगी। फिलहाल वैश्विक कीमतों में आई नरमी ने भारत को राहत जरूर दी है, लेकिन आपूर्ति श्रृंखला की स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखने की आवश्यकता बनी हुई है।
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