Aluminium Price: चीन में उत्पादन घटने की आशंका से तेज हुआ एल्युमिनियम
नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): Aluminium Price: वैश्विक कमोडिटी बाजार में एल्युमिनियम की कीमतों में जोरदार तेजी देखने को मिल रही है। दुनिया के सबसे बड़े उत्पादक चीन में संभावित उत्पादन कटौती और मिडिल ईस्ट में जारी भू-राजनीतिक तनाव के चलते एल्युमिनियम लगभग चार साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) पर एल्युमिनियम का भाव 0.6% बढ़कर 7 मार्च 2022 के बाद सबसे ऊंचे स्तर $3,672.50 प्रति मीट्रिक टन तक पहुंच गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि चीन में एनर्जी कंजम्प्शन और कार्बन उत्सर्जन को लेकर सरकार की सख्ती ने बाजार में चिंता बढ़ा दी है। ट्रेडर्स को डर है कि चीनी स्मेल्टर्स को उत्पादन घटाने के निर्देश दिए जा सकते हैं, जिससे वैश्विक सप्लाई और प्रभावित हो सकती है।
चीन की नीतियों ने बढ़ाई बाजार की चिंता
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, चीन के इंडस्ट्री और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी मंत्रालय ने हाल ही में संकेत दिए हैं कि स्टील और ऑयल रिफाइनिंग सेक्टर की तरह एल्युमिनियम इंडस्ट्री पर भी निगरानी बढ़ाई जाएगी। सरकार ओवर-प्रोडक्शन पर लगाम लगाने और बढ़ती इन्वेंट्री को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है।
चीन दुनिया के कुल एल्युमिनियम उत्पादन का करीब 60% हिस्सा अकेले करता है। ऐसे में वहां किसी भी तरह की प्रोडक्शन कटौती का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर पड़ता है। वर्तमान में चीनी स्मेल्टर्स पहले से ही अधिकतम क्षमता पर काम कर रहे हैं, क्योंकि मिडिल ईस्ट संकट के चलते वैश्विक सप्लाई पर दबाव बना हुआ है।

Aluminium Price: मिडिल ईस्ट संकट से सप्लाई चेन पर असर
फरवरी के आखिर में शुरू हुए संघर्ष के बाद होर्मुज स्ट्रेट के आसपास सप्लाई बाधित होने की आशंकाओं ने मेटल मार्केट में अस्थिरता बढ़ा दी है। यह इलाका वैश्विक ऊर्जा और मेटल सप्लाई के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि मिडिल ईस्ट में तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो एल्युमिनियम समेत अन्य इंडस्ट्रियल मेटल्स की कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है। सप्लाई में कमी और बढ़ती लॉजिस्टिक लागत ने पहले ही मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर दबाव बढ़ा दिया है।
AI इंफ्रास्ट्रक्चर बूम से बढ़ी मांग
इस महीने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े डेटा सेंटर, पावर इंफ्रास्ट्रक्चर और हाई-टेक निर्माण परियोजनाओं में तेजी के कारण इंडस्ट्रियल मेटल्स की मांग में उछाल आया है। एल्युमिनियम हल्का और टिकाऊ होने के कारण इलेक्ट्रिक व्हीकल, डेटा सेंटर और आधुनिक निर्माण कार्यों में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है।
कमोडिटी बाजार में निवेशकों की सट्टेबाजी भी कीमतों को ऊपर ले जाने में अहम भूमिका निभा रही है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि AI आधारित इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार आने वाले वर्षों में मेटल डिमांड को मजबूत बनाए रख सकता है।
कॉपर में उतार-चढ़ाव जारी
एल्युमिनियम के साथ-साथ कॉपर बाजार में भी अस्थिरता बनी रही। LME कॉपर शुरुआती कारोबार में बढ़त के बाद गिरावट के साथ बंद हुआ और इसकी कीमत 0.3% फिसलकर $13,623.50 प्रति टन पर आ गई।
निवेशक मिडिल ईस्ट विवाद को लेकर संभावित समझौते और चीन की औद्योगिक नीतियों पर नजर बनाए हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक तनाव कम होता है और सप्लाई सामान्य होती है, तो मेटल्स की कीमतों में कुछ नरमी आ सकती है। हालांकि फिलहाल बाजार में तेजी का रुख कायम दिखाई दे रहा है।
निवेशकों और उद्योगों के लिए क्या संकेत?
Aluminium Price: एल्युमिनियम की बढ़ती कीमतें ऑटोमोबाइल, कंस्ट्रक्शन और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर के लिए लागत बढ़ाने वाली साबित हो सकती हैं। दूसरी ओर, मेटल कंपनियों और कमोडिटी निवेशकों को इससे फायदा मिलने की संभावना है।
विश्लेषकों के अनुसार, आने वाले हफ्तों में चीन की उत्पादन नीति, मिडिल ईस्ट की स्थिति और वैश्विक मांग के आंकड़े एल्युमिनियम बाजार की दिशा तय करेंगे। फिलहाल बाजार में सप्लाई को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, जिससे कीमतों को समर्थन मिल रहा है।
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