नई दिल्ली, 23 मार्च (कृषि भूमि ब्यूरो): देश में सोने की कीमतों में गिरावट का सिलसिला जारी है। 23 मार्च की सुबह 24 कैरेट सोना और सस्ता होकर दिल्ली में ₹1,46,110 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। यह पिछले एक सप्ताह में करीब ₹13,690 की बड़ी गिरावट दर्शाता है।
मुंबई, पुणे और बेंगलुरु जैसे प्रमुख शहरों में भी 24 कैरेट गोल्ड ₹1,45,960 प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा है। वहीं 22 कैरेट सोने की कीमत में भी ₹12,550 तक की गिरावट दर्ज की गई है।
शुक्रवार (20 मार्च) को ही दिल्ली सर्राफा बाजार में सोना ₹650 (0.42%) टूटकर ₹1,52,650 प्रति 10 ग्राम पर आ गया था, जिससे गिरावट का ट्रेंड साफ दिखने लगा था।
वैश्विक कारणों से दबाव में सोना
विशेषज्ञों के मुताबिक, सोने की कीमतों में गिरावट के पीछे कई बड़े आर्थिक कारण हैं। बढ़ती महंगाई की चिंता, केंद्रीय बैंकों की सख्त ब्याज दर नीतियां और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने निवेशकों का रुझान बदल दिया है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना $4,663.54 प्रति औंस पर बना हुआ है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव—खासतौर पर इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच—के बावजूद सोने में अपेक्षित तेजी नहीं दिख रही।
देश के प्रमुख शहरों में आज का गोल्ड रेट
| शहर | 22 कैरेट (₹/10 ग्राम) | 24 कैरेट (₹/10 ग्राम) |
|---|---|---|
| दिल्ली | 133940 | 146110 |
| मुंबई | 133790 | 145960 |
| अहमदाबाद | 133840 | 146010 |
| चेन्नई | 133790 | 145960 |
| कोलकाता | 133790 | 145960 |
| हैदराबाद | 133790 | 145960 |
| जयपुर | 133940 | 146110 |
| भोपाल | 133840 | 146010 |
| लखनऊ | 133940 | 146110 |
| चंडीगढ़ | 133940 | 146110 |
चांदी भी कमजोर, एक हफ्ते में ₹30,000 की गिरावट
सोने के साथ-साथ चांदी की कीमतों में भी तेज गिरावट देखने को मिली है। 23 मार्च को चांदी ₹2,44,900 प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई है।
हालांकि शुक्रवार को इसमें मामूली तेजी आई थी, जब दिल्ली बाजार में यह ₹1,800 बढ़कर ₹2,40,500 प्रति किलोग्राम हो गई थी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चांदी का भाव $72.18 प्रति औंस है।
दिलचस्प बात यह है कि जनवरी 2026 में चांदी ₹4 लाख प्रति किलोग्राम के पार पहुंच गई थी, लेकिन अब इसमें भारी गिरावट दर्ज हो चुकी है।
आगे क्या रहेगा रुख?
विश्लेषकों का मानना है कि डॉलर की मजबूती और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के चलते सोने और चांदी की कीमतों पर फिलहाल दबाव बना रह सकता है। हालांकि, भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने पर इनमें अचानक उछाल की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
निवेशकों के लिए यह समय सावधानी और रणनीतिक निवेश का है, क्योंकि बाजार में अस्थिरता अभी जारी रहने के संकेत दे रही है।
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