नई दिल्ली, 06 मार्च (कृषि भूमि ब्यूरो): वैश्विक ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल के बीच कच्चे तेल की कीमतें 2022 के बाद अपने सबसे बड़े साप्ताहिक उछाल की ओर बढ़ रही हैं। मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य संघर्ष और सप्लाई चेन में भारी रुकावटों के कारण तेल उत्पादकों, शिपिंग कंपनियों और आयातक देशों के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है।
शुक्रवार सुबह ब्रेंट क्रूड का मई फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट इंटरकॉन्टिनेंटल एक्सचेंज पर 0.46% बढ़कर 84.34 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखाई दिया। इससे पहले गुरुवार को ब्रेंट क्रूड 85 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया था, जो 2024 के मध्य के बाद का उच्चतम स्तर है।
WTI में साप्ताहिक उछाल
अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) इस सप्ताह लगभग 19% तक उछल चुका है। हालांकि शुक्रवार को कीमतों में थोड़ी गिरावट देखी गई और फ्यूचर्स करीब 79 डॉलर प्रति बैरल तक आ गए।
यह गिरावट उस बयान के बाद आई जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि प्रशासन बढ़ती तेल कीमतों को नियंत्रित करने के लिए “जल्द कार्रवाई” कर सकता है।
होर्मुज स्ट्रेट में शिपिंग संकट
मिडिल ईस्ट में 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू होने के बाद से तेल बाजार में भारी अस्थिरता बनी हुई है। संघर्ष में कई देशों के शामिल होने और प्रमुख समुद्री मार्गों पर खतरे के कारण वैश्विक ऊर्जा सप्लाई प्रभावित हो रही है।
दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक होर्मुज स्ट्रेट में टैंकर ट्रैफिक तेजी से कम हो गया है, जिससे तेल शिपमेंट बाधित हो रहे हैं और कुछ उत्पादकों को उत्पादन रोकना पड़ा है। रिफाइनरियों और तेल टैंकरों पर हमलों की खबरों से ऊर्जा बाजार में बड़ी आपूर्ति बाधा का डर और बढ़ गया है।
एनर्जी मार्केट इंटेलिजेंस फर्म केप्लर के अनुसार, हमलों के बाद से स्ट्रेट से गुजरने वाले तेल टैंकरों की आवाजाही में करीब 90% की गिरावट आई है।
खाड़ी क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही पर असर
28 फरवरी से 4 मार्च के बीच जहाजों की ट्रैकिंग करने वाले डेटा से पता चलता है कि खाड़ी क्षेत्र में कई जहाज रास्ता बदलने को मजबूर हुए। वे अभी भी सुरक्षा निर्देशों का इंतजार कर रहे हैं। कुछ जहाज समुद्र में ही फंसे हुए हैं। इससे वैश्विक तेल सप्लाई नेटवर्क में गंभीर व्यवधान का खतरा पैदा हो गया है।
तेल कीमतें “ट्रिपल डिजिट” तक जा सकती हैं
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर होर्मुज स्ट्रेट लंबे समय तक बाधित रहता है तो कीमतों में भारी उछाल आ सकता है।
अमेरिका के पूर्व ऊर्जा सचिव अर्नेस्ट मोनिज़ ने कहा कि यदि यह मार्ग कई हफ्तों तक बंद रहा तो कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर यानी ट्रिपल डिजिट तक पहुंच सकती हैं।
एशिया में भी बढ़ी चिंता
मिडिल ईस्ट संकट का असर एशियाई ऊर्जा बाजारों पर भी दिखने लगा है।
| देश | उठाए गए कदम |
|---|---|
| चीन | बड़ी रिफाइनरियों को पेट्रोल और डीजल एक्सपोर्ट रोककर घरेलू सप्लाई को प्राथमिकता देने का निर्देश |
| जापान | सरकार से स्ट्रेटेजिक ऑयल रिजर्व जारी करने की मांग |
| अमेरिका | स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व से तेल जारी करने के विकल्प पर विचार |
अमेरिकी इंटीरियर सेक्रेटरी डग बर्गम ने संकेत दिया है कि प्रशासन जरूरत पड़ने पर स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) से तेल जारी करने पर विचार कर सकता है, हालांकि अभी तक कोई औपचारिक फैसला नहीं लिया गया है।
भारत में फिलहाल सप्लाई पर खतरा नहीं
मिडिल ईस्ट संकट के बावजूद भारत में फिलहाल आम उपभोक्ताओं के लिए किसी तरह की राशनिंग या सप्लाई कटौती की संभावना नहीं बताई जा रही है।
सूत्रों के अनुसार LPG, PNG, CNG, पेट्रोल और डीजल की सप्लाई सामान्य रहने की उम्मीद है। हालांकि स्थिति बिगड़ने की स्थिति में नैचुरल गैस सप्लाई मैनेजमेंट के लिए इमरजेंसी प्लान तैयार रखे गए हैं।
इन योजनाओं के तहत जरूरत पड़ने पर गैस की आपूर्ति को कुछ औद्योगिक क्षेत्रों से हटाकर घरेलू उपभोक्ताओं और प्राथमिक क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जा सकती है।
आगे क्या रहेगा तेल बाजार का रुख
मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष और समुद्री मार्गों में बाधा के कारण वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। यदि संघर्ष लंबा खिंचता है या होर्मुज स्ट्रेट में ट्रैफिक और घटता है, तो आने वाले हफ्तों में तेल की कीमतों में और तेज उछाल देखने को मिल सकता है।
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