नई दिल्ली, 09 जनवरी (कृषि भूमि ब्यूरो): लगातार तेज़ उछाल के बाद सोने और चांदी की कीमतों में अब ठहराव और गिरावट देखने को मिल रही है। गोल्ड में लगातार तीसरे दिन और चांदी में दूसरे दिन कमजोरी दर्ज की गई है। बीते सत्रों में तेज़ बढ़त के बाद बाजार में मुनाफावसूली हावी होने से दोनों कीमती धातुओं पर दबाव बना है।
गोल्ड प्राइस ट्रेंड: तीसरे दिन भी गिरावट
24 कैरट गोल्ड एक दिन की स्थिरता के बाद दो दिनों में प्रति 10 ग्राम करीब ₹3000 महंगा हुआ था, लेकिन अब लगातार तीन दिनों में इसमें ₹830 की गिरावट आ चुकी है। 22 कैरट गोल्ड भी दो दिनों में ₹2750 चढ़ने के बाद तीन दिनों में ₹760 सस्ता हो गया है। आज के कारोबार में 22 कैरट और 24 कैरट—दोनों गोल्ड ₹10 प्रति 10 ग्राम टूटे हैं।
10 बड़े शहरों में गोल्ड के ताज़ा भाव (10 ग्राम)
| शहर | 24 कैरट (₹) | 22 कैरट (₹) | 18 कैरट (₹) |
|---|---|---|---|
| दिल्ली | 1,38,140 | 1,26,640 | 1,03,640 |
| मुंबई | 1,37,990 | 1,26,490 | 1,03,490 |
| कोलकाता | 1,37,990 | 1,26,490 | 1,03,490 |
| चेन्नई | 1,39,080 | 1,27,490 | 1,06,390 |
| बेंगलुरु | 1,37,990 | 1,26,490 | 1,03,490 |
| हैदराबाद | 1,37,990 | 1,26,490 | 1,03,490 |
| लखनऊ | 1,38,140 | 1,26,640 | 1,03,640 |
| पटना | 1,38,040 | 1,26,540 | 1,03,540 |
| जयपुर | 1,38,140 | 1,26,640 | 1,03,640 |
| अहमदाबाद | 1,38,040 | 1,26,540 | 1,03,540 |
Silver Rate Today: दूसरे दिन भी दबाव
चांदी में तीन दिनों की तेज़ी के बाद लगातार दूसरे दिन नरमी रही है। दिल्ली में दो दिनों में ₹5,100 प्रति किलो की गिरावट दर्ज की गई है। आज 9 जनवरी को चांदी ₹2,51,900 प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही है, जिसमें ₹100 की मामूली गिरावट आई है। मुंबई और कोलकाता में भी यही भाव हैं, जबकि चेन्नई में चांदी ₹2,71,900 प्रति किलो के साथ सबसे महंगी बनी हुई है।
गिरावट की वजह क्या है?
बाजार पर दबाव की प्रमुख वजह जनवरी में होने वाला ब्लूमबर्ग कमोडिटी इंडेक्स (BCOM) का सालाना री-बैलेंसिंग प्रोसेस माना जा रहा है। डॉएचे बैंक के एनालिस्ट माइकल हसुए के अनुसार, यह प्रक्रिया 9 से 15 जनवरी के बीच होगी, जिसके दौरान इंडेक्स से जुड़े फंड्स की बिकवाली सोने और चांदी पर नकारात्मक असर डाल सकती है।
आगे कैसी रह सकती है चाल
विशेषज्ञों का मानना है कि री-बैलेंसिंग पूरी होने तक कीमती धातुओं में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। शॉर्ट टर्म में दबाव संभव है, जबकि मीडियम से लॉन्ग टर्म में ग्लोबल संकेत, डॉलर की चाल और ब्याज दरें आगे की दिशा तय करेंगी।
===
हमारे लेटेस्ट अपडेट्स और खास जानकारियों के लिए अभी जुड़ें — बस इस लिंक पर क्लिक करें:
https://whatsapp.com/channel/0029Vb0T9JQ29759LPXk1C45