नई दिल्ली, 01 अगस्त (कृषि भूमि ब्यूरो):
भारतीय चीनी मिल संघ (ISMA) ने बुधवार को अपने शुरुआती अनुमान में बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का नेट चीनी उत्पादन 30 लाख टन तक बढ़ सकता है, जो बीते साल की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाता है। यह अनुमान गन्ने की बेहतर फसल, मानसून की अनुकूल स्थिति और एथनॉल मिश्रण नीति में बदलाव को ध्यान में रखकर लगाया गया है।
ISMA के अनुसार, कुल सकल चीनी उत्पादन 345 लाख टन रहने की संभावना है। एथनॉल उत्पादन हेतु डायवर्जन को ध्यान में रखते हुए, शुद्ध (नेट) चीनी उत्पादन लगभग 300 लाख टन आंका गया है। 2024-25 में नेट उत्पादन 291 लाख टन रहा था, यानी इस बार लगभग 3% की वृद्धि देखी जा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार महाराष्ट्र, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश जैसे प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में फसल की स्थिति बेहतर रही है। मानसून का संतुलित वितरण और जल संसाधनों की उपलब्धता ने फसल की उत्पादकता को बढ़ावा दिया है। महाराष्ट्र और कर्नाटक में विशेष रूप से गन्ने की बुआई क्षेत्र में विस्तार देखा गया है।
भारत सरकार द्वारा एथनॉल मिश्रण लक्ष्य को 20% तक ले जाने की नीति के चलते गन्ने से सीधे एथनॉल उत्पादन को प्राथमिकता दी जा रही है। इस डायवर्जन के बावजूद, ISMA का मानना है कि इस साल चीनी मिलें चीनी उत्पादन में बढ़ोतरी दर्ज करेंगी।
चीनी की घरेलू खपत लगभग 275 से 280 लाख टन रहने का अनुमान है। शुद्ध उत्पादन को देखते हुए, निर्यात के लिए सीमित अधिशेष बचने की संभावना है। वैश्विक बाजार में कीमतों में अस्थिरता और इंडोनेशिया-बांग्लादेश जैसे बाजारों में प्रतिस्पर्धा को देखते हुए निर्यात नीति में संतुलन आवश्यक होगा।
जानकारों का मानना है कि यह वृद्धि भारत की गन्ना मूल्य श्रृंखला में सुधार का संकेत है। हालांकि, उत्पादन में वृद्धि के साथ सरकार को निर्यात, भंडारण और मूल्य स्थिरता जैसे मसलों पर भी त्वरित नीतिगत निर्णय लेने होंगे।
2025-26 में भारत का चीनी उत्पादन बढ़ने की उम्मीद से चीनी उद्योग को राहत मिल सकती है। लेकिन बढ़े हुए उत्पादन का संतुलन एथनॉल नीति, वैश्विक व्यापार और घरेलू मांग के अनुरूप बनाए रखना होगा, ताकि किसानों, मिलों और उपभोक्ताओं सभी के हित सुरक्षित रह सकें।
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