नई दिल्ली, 06 फरवरी (कृषि भूमि ब्यूरो): रबी सीजन में फसलों पर कीटों का हमला किसानों के लिए बड़ी चिंता बनता जा रहा है। खासतौर पर हेलिकोवर्पा आर्मीगेरा, जिसे आम भाषा में फल छेदक इल्ली कहा जाता है, इस मौसम में गंभीर समस्या पैदा करती है। यह खतरनाक कीट 120 से अधिक फसलों को नुकसान पहुंचाने की क्षमता रखता है और चना, टमाटर, कपास, मटर, अरहर जैसी फसलों में भारी क्षति कर सकता है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यह इल्ली फसल के फूल, फल और फलियों में छेद कर अंदर से खाने लगती है, जिससे उत्पादन पर सीधा असर पड़ता है। कई बार किसान जब तक नुकसान को पहचान पाते हैं, तब तक काफी देर हो चुकी होती है। ऐसे में इसकी समय पर पहचान और नियंत्रण बेहद जरूरी हो जाता है।
फल छेदक इल्ली का प्रकोप आमतौर पर तब बढ़ता है जब मौसम में नमी बनी रहती है और तापमान मध्यम होता है। शुरुआती अवस्था में पत्तियों पर छोटे छेद और बाद में फलियों का खराब होना इसके प्रमुख लक्षण माने जाते हैं। अगर समय रहते उपाय न किए जाएं तो पैदावार में 30 से 50 प्रतिशत तक गिरावट आ सकती है।
फल छेदक इल्ली से बचाव के प्रभावी उपाय
रासायनिक दवाओं के अत्यधिक इस्तेमाल से बचने की सलाह देते हुए विशेषज्ञ सस्ते और पर्यावरण-अनुकूल उपाय अपनाने पर जोर देते हैं। HANPV वायरस का छिड़काव इस कीट के नियंत्रण में काफी असरदार माना जाता है। इसके अलावा खेत में फेरोमोन ट्रैप लगाने से नर कीट आकर्षित होते हैं और प्रजनन चक्र टूटता है, जिससे कीटों की संख्या नियंत्रित रहती है।
नीम आधारित उपाय भी काफी कारगर साबित होते हैं। नीम तेल या नीम अर्क का समय-समय पर छिड़काव करने से इल्ली की वृद्धि रुक जाती है और फसल सुरक्षित रहती है।
| उपाय | उपयोग का तरीका | लाभ |
|---|---|---|
| HANPV वायरस | अनुशंसित मात्रा में छिड़काव | इल्ली पर सीधा असर |
| फेरोमोन ट्रैप | प्रति एकड़ 5–6 ट्रैप | कीटों की संख्या घटे |
| नीम तेल | 3–5 मिली प्रति लीटर पानी | जैविक और सुरक्षित |
मिट्टी की सेहत भी है बचाव की कुंजी
विशेषज्ञ बताते हैं कि मजबूत और स्वस्थ मिट्टी फसलों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है। मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के लिए अजोला को बेहद उपयोगी माना जाता है, जिसे ‘मिट्टी का दोस्त’ भी कहा जाता है। महीने में एक बार सीमित मात्रा में अजोला डालने से पौधे मजबूत होते हैं और कीटों का असर कम देखा जाता है। हालांकि, जरूरत से ज्यादा अजोला डालना नुकसानदायक भी हो सकता है।
किसानों के लिए जरूरी सलाह
रबी सीजन में नियमित रूप से खेत की निगरानी करना बेहद जरूरी है। कीटों के शुरुआती लक्षण दिखते ही तुरंत नियंत्रण उपाय अपनाने चाहिए। देसी और जैविक तरीकों को प्राथमिकता देने से न केवल फसल सुरक्षित रहती है, बल्कि मिट्टी और पर्यावरण भी स्वस्थ बना रहता है। समय पर सही कदम उठाकर किसान भारी नुकसान से बच सकते हैं और बेहतर उत्पादन हासिल कर सकते हैं।
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