मुंबई, 10 फरवरी (कृषि भूमि ब्यूरो): देश में सबसे अधिक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) प्राप्त करने वाला राज्य महाराष्ट्र अब रिकॉर्ड तोड़ निवेश के नए चरण में प्रवेश कर चुका है। यह जानकारी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने आर्थिक गतिविधियों को उत्सव का स्वरूप देकर उद्योगों के लिए भरोसेमंद और अनुकूल वातावरण तैयार किया है, जिसका सीधा परिणाम अभूतपूर्व निवेश के रूप में सामने आया है।
मुख्यमंत्री फडणवीस लोकसत्ता समाचार-पत्र की 78वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे। इस मौके पर राज्य मंत्रिमंडल के वरिष्ठ मंत्री, प्रशासनिक अधिकारी और सांस्कृतिक जगत की प्रमुख हस्तियाँ उपस्थित रहीं।
दावोस से महाराष्ट्र तक: निवेश का ठोस रूपांतरण
मुख्यमंत्री ने बताया कि स्विट्ज़रलैंड के दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच के दौरान महाराष्ट्र सरकार ने लगभग 30 लाख करोड़ रुपये के समझौता ज्ञापन (MoU) किए थे। इनमें से 12 लाख करोड़ रुपये के समझौते अंतिम चरण में पहुँच चुके हैं। सरकार की नीति स्पष्ट है—केवल उन्हीं समझौतों पर हस्ताक्षर किए जाते हैं जिनमें वास्तविक निवेश की गारंटी हो।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि दावोस में मौजूद दस भारतीय राज्यों में महाराष्ट्र का पवेलियन निवेशकों के लिए सबसे अधिक आकर्षण का केंद्र रहा। दावोस में हुए कुल समझौतों में से 75 प्रतिशत का वास्तविक उद्योगों में रूपांतरण महाराष्ट्र ने सुनिश्चित किया है, जो देश में एक मिसाल है।
सुधार, सिंगल विंडो और विकेंद्रीकरण की नीति
राज्य में निवेश को और गति देने के लिए सरकार ने ‘हंड्रेड रिफॉर्म्स इन टू मंथ्स’ अभियान शुरू किया है। इन सुधारों के माध्यम से उद्योगों के लिए प्रक्रियाएँ सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाई जा रही हैं।
‘मैत्री’ पोर्टल के जरिए सिंगल विंडो प्रणाली लागू की गई है, जिससे निवेशकों को विभिन्न विभागों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते। औद्योगिक विकास का विकेंद्रीकरण कर दूरदराज़ और पिछड़े क्षेत्रों तक निवेश पहुँचाया जा रहा है।
उभरते औद्योगिक केंद्र: गडचिरोली से छत्रपति संभाजीनगर
मुख्यमंत्री के अनुसार, गडचिरोली अब तेजी से ‘स्टील सिटी ऑफ इंडिया’ के रूप में उभर रहा है, जबकि नागपुर ऑटोमोबाइल उद्योग का बड़ा केंद्र बन चुका है। महिंद्रा समूह द्वारा नागपुर में 15,000 करोड़ रुपये के निवेश से भारत का सबसे बड़ा ऑटोमोबाइल प्रोजेक्ट आकार ले रहा है।
इसी तरह, छत्रपति संभाजीनगर में देश की सबसे बड़ी विद्युत वाहन (EV) निर्माण क्षमता विकसित की जा रही है, जहाँ अगली पीढ़ी के इलेक्ट्रिक वाहन तैयार होंगे। उत्तर महाराष्ट्र के सभी पाँच जिलों में दावोस के माध्यम से निवेश प्राप्त हुआ है। धुले की नरडाणा औद्योगिक वसाहत और नंदुरबार जैसे जिलों में नए उद्योग भविष्य की आर्थिक दिशा तय कर रहे हैं।
प्रमुख निवेश और औद्योगिक विकास
| क्षेत्र / जिला | प्रमुख पहचान | निवेश की स्थिति |
|---|---|---|
| गडचिरोली | स्टील सिटी ऑफ इंडिया | तेज़ी से विस्तार |
| नागपुर | ऑटोमोबाइल हब | ₹15,000 करोड़ (महिंद्रा) |
| छत्रपति संभाजीनगर | EV मैन्युफैक्चरिंग | देश की सबसे बड़ी क्षमता |
| धुले (नरडाणा) | नई औद्योगिक वसाहत | उभरता केंद्र |
| नंदुरबार | पिछड़ा जिला → औद्योगिक प्रवेश | नए उद्योग स्थापित |
शिक्षा और ई-गवर्नेंस पर भी फोकस
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य केवल औद्योगिकीकरण नहीं, बल्कि सशक्त औद्योगिक इकोसिस्टम तैयार करना है। इसी सोच के तहत विद्यार्थियों में पढ़ने की आदत विकसित करने के लिए समाचार-पत्र पठन अभियान शुरू किया जाएगा, जिसमें प्रत्येक छात्र को कम से कम एक अख़बार पढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
उन्होंने यह भी बताया कि 1 मई 2026 तक ‘आपले सरकार’ पोर्टल का दूसरा चरण लागू होगा। वर्तमान में लगभग 1,000 सरकारी सेवाएँ ऑनलाइन उपलब्ध हैं, जिनमें 29 सेवाएँ 99 प्रतिशत नागरिक आवश्यकताओं को पूरा करती हैं। आगे चलकर ई-गवर्नेंस को और प्रभावी बनाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का भी उपयोग किया जाएगा।
कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के हाथों ‘लोकसत्ता वर्षवेध 2025’ विशेषांक का विमोचन किया गया। यह अवसर महाराष्ट्र की आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक प्रगति का प्रतीक बनकर सामने आया।
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