नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): Gold Prices: भारत में सोने की कीमतें एक बार फिर चर्चा का विषय बनी हुई हैं। वैश्विक बाजार में सोने के दाम अपेक्षाकृत स्थिर रहने के बावजूद घरेलू बाजार में सोने की कीमतों में उल्लेखनीय तेजी दर्ज की गई है। वर्ष 2026 में अब तक भारतीय बाजार में सोना करीब 18 प्रतिशत महंगा हुआ है, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर के संदर्भ में इसकी कीमतों में मामूली बढ़ोतरी हुई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत और वैश्विक बाजार के बीच बढ़ते मूल्य अंतर के पीछे दो प्रमुख कारण हैं—सोने पर आयात शुल्क में बढ़ोतरी और रुपये का डॉलर के मुकाबले कमजोर होना। इन दोनों कारकों ने मिलकर भारतीय उपभोक्ताओं के लिए सोना और महंगा बना दिया है।
घरेलू बाजार में सोने की कीमतों में तेज उछाल
Gold Prices: मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 की शुरुआत में 24 कैरेट सोने का भाव 1,32,614 रुपये प्रति 10 ग्राम था। 27 मई तक यह बढ़कर 1,56,229 रुपये प्रति 10 ग्राम पहुंच गया। यानी लगभग 23,615 रुपये प्रति 10 ग्राम की वृद्धि दर्ज की गई।
इसके विपरीत, अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर आधारित सोने की कीमतों में केवल 1.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। यह अंतर बताता है कि घरेलू कीमतों में तेजी केवल वैश्विक कारकों की वजह से नहीं, बल्कि स्थानीय आर्थिक और नीतिगत कारणों से भी आई है।
Augmont की रिसर्च हेड डॉ. रेनिशा चैनानी के अनुसार, भारत में सोने की कीमतों में आई अतिरिक्त तेजी का सबसे बड़ा कारण आयात लागत का बढ़ना है।
आयात शुल्क में बढ़ोतरी का सीधा असर
सरकार ने हाल ही में सोने पर प्रभावी आयात शुल्क को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया है। इसमें 10 प्रतिशत बेसिक कस्टम ड्यूटी और 5 प्रतिशत कृषि अवसंरचना एवं विकास उपकर (AIDC) शामिल है।
आयात शुल्क बढ़ने के बाद विदेशों से आने वाला सोना अधिक महंगा हो गया। इसका सीधा प्रभाव ज्वेलर्स, बुलियन डीलर्स और अंततः उपभोक्ताओं पर पड़ा।
विशेषज्ञों के अनुसार 13 मई के बाद कीमतों में जो तेज उछाल देखने को मिला, उसमें आयात शुल्क वृद्धि की बड़ी भूमिका रही। शुल्क बढ़ने से पहले सोना लगभग 1.5 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार कर रहा था, लेकिन बाद में यह 1.6 लाख रुपये के करीब पहुंच गया।
सरकार ने एडवांस ऑथराइजेशन स्कीम के तहत सोने के आयात नियमों को भी कड़ा किया है। इससे भविष्य में सप्लाई पर दबाव बढ़ सकता है और कीमतों को अतिरिक्त समर्थन मिल सकता है।
रुपये की कमजोरी ने बढ़ाया बोझ
Gold Prices: सोने की कीमतों में दूसरी बड़ी भूमिका भारतीय मुद्रा की कमजोरी ने निभाई है। वर्ष 2026 में अब तक रुपया डॉलर के मुकाबले लगभग 7 प्रतिशत कमजोर हुआ है।
चूंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का कारोबार डॉलर में होता है, इसलिए जब रुपया कमजोर होता है तो समान मात्रा का सोना आयात करने के लिए भारतीय आयातकों को अधिक रुपये खर्च करने पड़ते हैं। इसका असर सीधे घरेलू कीमतों पर दिखाई देता है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले महीनों में डॉलर मजबूत बना रहता है और रुपया दबाव में रहता है, तो भारत में सोने की कीमतों पर अतिरिक्त दबाव बना रह सकता है।
Gold Prices: सोने की कीमत कैसे तय होती है?
भारत में सोने का अंतिम मूल्य (Gold Prices) केवल अंतरराष्ट्रीय भाव पर निर्भर नहीं करता। इसकी कीमत तय करने में कई कारक शामिल होते हैं।
| कारक | प्रभाव |
|---|---|
| अंतरराष्ट्रीय सोना मूल्य (LBMA) | मूल आधार मूल्य |
| रुपये-डॉलर विनिमय दर | आयात लागत तय करती है |
| आयात शुल्क और AIDC | कीमत में सीधी वृद्धि |
| स्थानीय मांग और आपूर्ति | बाजार भाव को प्रभावित करती है |
| लॉजिस्टिक्स और प्रीमियम | अंतिम खुदरा मूल्य बढ़ाते हैं |
इसी वजह से कई बार वैश्विक बाजार में कीमतें स्थिर रहने पर भी भारतीय बाजार में सोना महंगा हो सकता है।

बाजार में डिस्काउंट क्यों दिखाई दे रहा है?
दिलचस्प रूप से, ऊंचे आयात शुल्क के बावजूद भारतीय बाजार में कुछ समय से सोना ‘लैंडेड प्राइस’ के मुकाबले डिस्काउंट पर कारोबार कर रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार शुल्क वृद्धि के बाद कई निवेशकों और ट्रेडर्स ने मुनाफावसूली शुरू कर दी। इसके अलावा बुलियन डीलर्स ने पुराने कम-टैक्स वाले स्टॉक बाजार में उतार दिए, जिससे सप्लाई बढ़ी और अस्थायी रूप से कीमतों पर दबाव बना।
हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि यह स्थिति स्थायी नहीं है और समय के साथ बाजार फिर से अपने सामान्य प्रीमियम स्तर पर लौट सकता है।
Gold Prices: आगे क्या है संभावना?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निकट भविष्य में भारत और अंतरराष्ट्रीय बाजार के सोने के दामों के बीच अंतर बना रह सकता है। जब तक 15 प्रतिशत आयात शुल्क प्रभावी रहेगा और रुपया कमजोर रहेगा, तब तक घरेलू बाजार में सोना वैश्विक कीमतों के मुकाबले महंगा दिखाई देगा।
यदि सरकार भविष्य में आयात शुल्क में कटौती करती है या रुपया मजबूत होता है, तभी इस अंतर में उल्लेखनीय कमी आ सकती है। फिलहाल निवेशकों और खरीदारों को ऊंची कीमतों के दौर के लिए तैयार रहना होगा, क्योंकि सोने का भारतीय बाजार अभी भी संरचनात्मक रूप से प्रीमियम पर कारोबार कर रहा है।
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