नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): Crude Oil Price: मिडिल ईस्ट में एक बार फिर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर वैश्विक तेल बाजार पर दिखाई देने लगा है। US और ईरान के बीच नए सैन्य हमलों के बाद कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित होने की आशंकाओं ने सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतों को मजबूती दी। निवेशकों की नजर अब होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति और दोनों देशों के बीच संभावित बातचीत पर टिकी हुई है।
सोमवार के शुरुआती कारोबार में US बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 0.71% की तेजी के साथ 69.72 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा। वहीं ब्रेंट क्रूड 0.36% बढ़कर 72.25 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। गौरतलब है कि पिछले सप्ताह WTI पहली बार फरवरी के बाद 70 डॉलर प्रति बैरल के नीचे फिसला था, लेकिन नए तनाव ने बाजार की धारणा बदल दी है।
क्यों बढ़े कच्चे तेल के दाम?
बाजार में तेजी की मुख्य वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ा सैन्य तनाव है। रिपोर्टों के अनुसार, होर्मुज स्ट्रेट में कमर्शियल शिपिंग पर कथित हमलों के बाद अमेरिका ने ईरानी सैन्य ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की है। इसके चलते दोनों देशों के बीच जारी कूटनीतिक वार्ता फिलहाल रोक दी गई है।
हालांकि, अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों देशों के प्रतिनिधियों के मंगलवार को दोहा में फिर से बातचीत करने की संभावना बनी हुई है। यदि वार्ता सकारात्मक रहती है तो बाजार में उतार-चढ़ाव कुछ कम हो सकता है।
होर्मुज स्ट्रेट बना चिंता का केंद्र
दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में शामिल होर्मुज स्ट्रेट एक बार फिर वैश्विक ऊर्जा बाजार की चिंता का कारण बन गया है। इसी मार्ग से दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस निर्यात होती है।
हाल ही में करीब 20 लाख बैरल तेल ले जा रहे एक बड़े क्रूड टैंकर ‘किकू’ की टक्कर की घटना के बाद इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही धीमी पड़ गई है। ओमान की खाड़ी के पास हुई इस घटना ने तेल सप्लाई की सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।
हालांकि अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा है कि वाणिज्यिक जहाज अभी भी इस मार्ग से गुजर रहे हैं, लेकिन कई जहाज मालिकों ने सुरक्षा कारणों से अपनी यात्रा स्थगित कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है।
Crude Oil Price: भारत के लिए फिलहाल राहत
एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर के अनुसार, मौजूदा समय में क्रूड ऑयल की कीमतें (Crude Oil Price) 69–70 डॉलर प्रति बैरल की सीमा में बनी हुई हैं, जो हाल के संघर्ष के दौरान बने उच्च स्तर से काफी नीचे हैं। उनका कहना है कि कीमतों के नियंत्रित रहने से भारत के लिए आयात बिल और महंगाई पर तत्काल दबाव नहीं बढ़ा है।
हालांकि यदि मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ता है या होर्मुज स्ट्रेट से सप्लाई बाधित होती है, तो भारत जैसे बड़े आयातक देशों के लिए ऊर्जा लागत बढ़ सकती है।

सऊदी अरब और रूस से भी जुड़े घटनाक्रम
सप्ताहांत में सऊदी अरब के प्रमुख ऊर्जा केंद्र रास तनुरा के पास सऊदी अरामको का एक हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। फिलहाल इस घटना का कारण स्पष्ट नहीं किया गया है और न ही ऊर्जा अवसंरचना पर किसी बड़े असर की पुष्टि हुई है। इसके बावजूद निवेशकों ने इस घटनाक्रम पर भी नजर बनाए रखी है।
दूसरी ओर, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने देश में ईंधन आपूर्ति संबंधी चुनौतियों की बात स्वीकार की है। उन्होंने संकेत दिया कि घरेलू बाजार में डीजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार डीजल निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने जैसे विकल्पों पर विचार कर रही है। यदि ऐसा होता है तो वैश्विक डीजल बाजार पर भी असर पड़ सकता है।
आगे कैसी रह सकती है बाजार की चाल?
Crude Oil Price: विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों की दिशा काफी हद तक अमेरिका-ईरान संबंधों, होर्मुज स्ट्रेट में शिपिंग गतिविधियों और ओपेक+ देशों की आपूर्ति रणनीति पर निर्भर करेगी। यदि तनाव और बढ़ता है तो क्रूड ऑयल की कीमतों में नई तेजी देखने को मिल सकती है, जबकि सफल कूटनीतिक बातचीत से बाजार में राहत आने की संभावना रहेगी।
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