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बाड़मेर में सूखे की मार: 2,460 गांव प्रभावित, फसलों को अरबों का नुकसान; चारे के संकट से पशुपालक परेशान

जयपुर (कृषि भूमि ब्यूरो): राजस्थान के बाड़मेर जिले में इस साल मानसून की बेरुखी ने किसानों और पशुपालकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कम बारिश के कारण जिले के 2,738 गांवों में से 2,460 गांवों में गंभीर सूखे की स्थिति सामने आई है। फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है और किसानों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार, बाजरा, ग्वार, मूंग और मोठ की फसलों को मिलाकर करीब 50 अरब 26 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान है। वहीं, बारिश की कमी से पशुओं के लिए चारे और पानी की उपलब्धता भी चिंता का विषय बन गई है।

सामान्य से 180 मिलीमीटर कम हुई बारिश

बाड़मेर जिले में सामान्य तौर पर मानसून के दौरान लगभग 387 मिलीमीटर बारिश दर्ज की जाती है, लेकिन इस बार यह आंकड़ा करीब 207 मिलीमीटर ही रहा। यानी जिले में सामान्य से लगभग 180 मिलीमीटर कम बारिश हुई। स्थानीय रिपोर्ट के मुताबिक, शुरुआती बारिश के बाद किसानों ने खरीफ फसलों की बुवाई की थी, लेकिन बाद में बारिश नहीं होने से खेतों में अंकुरित पौधे सूखने लगे।

गुड़ामालानी स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप पगारिया के अनुसार, बारिश की कमी से फसलों की बढ़वार प्रभावित हुई और कई क्षेत्रों में पौधे एक महीने के भीतर ही नष्ट हो गए। इस स्थिति ने किसानों की मेहनत और खेती पर किए गए खर्च को भारी नुकसान पहुंचाया है।

बाड़मेर में सूखाबाजरा, ग्वार और मूंग की फसल को भारी नुकसान

कृषि विभाग के आंकड़ों का हवाला देते हुए प्रकाशित रिपोर्ट में खरीफ फसलों के नुकसान का आकलन किया गया है। बाजरा, ग्वार और मूंग जिले की प्रमुख फसलों में शामिल हैं। बारिश की कमी से इन फसलों का उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

रिपोर्ट के अनुसार, बाजरे की फसल में लगभग 100 प्रतिशत नुकसान का अनुमान है। ग्वार की फसल को भी बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा है, जबकि मूंग की फसल में करीब 80 प्रतिशत खराबा बताया गया है। मोठ की फसल भी सूखे की चपेट में आई है।

इन फसलों के नुकसान से किसानों की आय पर सीधा असर पड़ने की आशंका है। जिन किसानों ने बीज, खाद, जुताई और बुवाई के लिए कर्ज लिया था, उनके सामने कर्ज चुकाने की चुनौती भी खड़ी हो सकती है।

पशुओं के चारे और पानी की उपलब्धता पर संकट

सूखे का असर केवल खेतों तक सीमित नहीं है। बाड़मेर के ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन भी आजीविका का महत्वपूर्ण साधन है। बारिश कम होने से खेतों में चारे का उत्पादन घटा है, जिससे पशुपालकों की चिंता बढ़ गई है।

चारे की कमी के कारण पशुओं के रखरखाव का खर्च बढ़ सकता है। यदि समय पर पर्याप्त चारा और पेयजल उपलब्ध नहीं हुआ, तो पशुधन की सेहत और ग्रामीण परिवारों की आय पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है।

चारा डिपो खोलने की घोषणा, राहत कार्यों का इंतजार

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बाड़मेर सहित कम बारिश से प्रभावित क्षेत्रों में राहत के लिए चारा डिपो स्थापित करने और पेयजल की आपात व्यवस्था जारी रखने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री कार्यालय की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, टैंकरों से पानी पहुंचाने की व्यवस्था 31 दिसंबर तक जारी रखने तथा कम बारिश वाले क्षेत्रों में जरूरी आपात कार्यों को गति देने के लिए जिला कलेक्टर के माध्यम से एक करोड़ रुपये तक के कार्य स्वीकृत करने की भी घोषणा की गई है।

हालांकि, 19 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित स्थानीय रिपोर्ट में बताया गया कि प्रभावित गांवों में चारा डिपो और पशु शिविरों का संचालन अभी शुरू नहीं हुआ था। रिपोर्ट के अनुसार, बाड़मेर के अतिरिक्त जिलाधीश रवींद्र कुमार ने बताया कि गिरदावरी रिपोर्ट तैयार है और इसे दो-तीन दिनों में ऑनलाइन पोर्टल पर उपलब्ध कराने की प्रक्रिया चल रही है। प्रशासन ने जरूरत के अनुसार राहत कार्य शुरू करने की बात कही है।

किसानों को मुआवजे और राहत की उम्मीद

गिरदावरी रिपोर्ट सूखे और फसल खराबे की स्थिति का आकलन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसके आधार पर प्रभावित क्षेत्रों की पहचान और नियमानुसार राहत सहायता की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।

अब किसानों और पशुपालकों की नजर प्रशासनिक कार्रवाई पर है। समय पर फसल नुकसान का आकलन, पात्र किसानों तक सहायता, चारा डिपो का संचालन और पशुओं के लिए पानी की व्यवस्था इस संकट को कम करने में अहम साबित हो सकती है।

बाड़मेर में मौजूदा स्थिति यह बताती है कि कम बारिश का असर कृषि और पशुपालन दोनों पर पड़ा है। प्रभावित परिवारों को राहत पहुंचाने के लिए सरकारी घोषणाओं को जमीन पर लागू करना और नुकसान के आधिकारिक आकलन के बाद सहायता उपलब्ध कराना सबसे महत्वपूर्ण चुनौती है।

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