नई दिल्ली, 24 जनवरी (कृषि भूमि ब्यूरो): बीते कुछ दिनों में अरहर (तूर दाल) की कीमतों में मामूली लेकिन लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जानकारों के मुताबिक इसके पीछे तीन बड़ी वजहें हैं—आयात की रफ्तार में कमी, मंडियों में नई फसल की आवक में देरी और रुपये के कमजोर होने से आयात का महंगा पड़ना। बाजार में नई फसल अभी सीमित मात्रा में पहुंच रही है, जिसका सीधा असर कीमतों पर दिख रहा है।
नई और पुरानी फसल के दामों में उछाल
दाल कारोबार से जुड़े शीर्ष संगठन India Pulses and Grains Association (IPGA) के बाजार अपडेट के अनुसार, शुक्रवार को महाराष्ट्र, कर्नाटक और तेलंगाना की मंडियों में नई अरहर की कीमतों में 125 से 250 रुपये प्रति क्विंटल तक की तेजी दर्ज की गई। पुरानी अरहर के दाम भी 100 से 200 रुपये प्रति क्विंटल तक बढ़े हैं, जबकि आयातित अरहर के भाव 50 से 100 रुपये प्रति क्विंटल चढ़े हैं।
औसत थोक कीमतों की स्थिति
अखिल भारतीय स्तर पर अरहर के औसत थोक भाव में भी सुधार देखा गया है:
| अवधि | औसत थोक मूल्य (₹/क्विंटल) |
|---|---|
| 31 दिसंबर | 7,003 |
| 21 जनवरी | 7,283 |
| पिछले साल (इसी अवधि) | 7,042 |
आंकड़े बताते हैं कि मौजूदा कीमतें पिछले साल की तुलना में थोड़ी ऊंची हैं, लेकिन बहुत ज्यादा नहीं।
MSP से नीचे हैं दाम, राहत की बात
कीमतों में आई तेजी को लेकर एक्सपर्ट्स का कहना है कि भाव जरूर बढ़े हैं, लेकिन चिंता की बात नहीं है क्योंकि अरहर के दाम अभी भी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से नीचे बने हुए हैं। जनवरी से नवंबर 2025 के दौरान अरहर का आयात 8 फीसदी घटकर 10.55 लाख टन रह गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 11.43 लाख टन था।
सर्दी का असर
लातूर स्थित कलंत्री फूड प्रोडक्ट्स के सीईओ नितिन कलंत्री के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों में कीमतों में उछाल इसलिए आया क्योंकि आयात धीमा हो गया है और डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी ने लागत बढ़ा दी है।
उन्होंने बताया कि इस साल सर्दी लंबी रहने से नई फसल की कटाई और आवक देर से हो रही है। साथ ही, अच्छी फसल की उम्मीद में व्यापारियों ने पहले ही अपना पुराना स्टॉक खत्म कर दिया था, जिससे बाजार की ‘पाइपलाइन’ खाली हो गई।
उत्पादन और आगे का आउटलुक
कृषि मंत्रालय के पहले अग्रिम अनुमान के मुताबिक, वर्ष 2025-26 में अरहर का उत्पादन 35.97 लाख टन रहने का अनुमान है, जो पिछले साल के 36.24 लाख टन से थोड़ा कम है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक नई फसल की आवक तेज नहीं होती और म्यांमार जैसे देशों से आयात फरवरी–मार्च में रफ्तार नहीं पकड़ता, तब तक अरहर की कीमतों में मजबूती बनी रह सकती है।
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