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कमजोर मानसून और महंगाई की दोहरी मार: NBFCs ने ग्रामीण भारत में लोन वितरण की रफ्तार धीमी की

NBFCs Slow Down Rural Lending in India
मुंबई (कृषि भूमि ब्यूरो): NBFCs Slow Down Rural Lending in India: ग्रामीण भारत में आर्थिक गतिविधियों और कृषि पर मंडराते संकट को देखते हुए देश की प्रमुख गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) ने लोन बांटने के मामले में बेहद सतर्क और सख्त रुख अपना लिया है। कम बारिश (कमजोर मानसून) और बढ़ती महंगाई के कारण किसानों और ग्रामीण उपभोक्ताओं की आय प्रभावित होने की आशंका है, जिससे समय पर लोन चुकाने की क्षमता पर असर पड़ सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए कंपनियों ने जोखिम वाले इलाकों में अपनी रणनीति बदल दी है।

कमजोर मानसून और महंगाई की दोहरी मार

साल 2016 के बाद मानसून इस बार सबसे कमजोर दर्ज किया गया है। इसके साथ ही खुदरा महंगाई दर में भी बढ़ोतरी देखी गई है, जिससे आम आदमी का बजट बिगड़ गया है। कृषि उत्पादन घटने की आशंका के चलते महाराष्ट्र, कर्नाटक और तेलंगाना जैसे राज्यों में वित्तीय संस्थाएं चौकस हो गई हैं।
वित्तीय कंपनी (NBFC) मुख्य कदम और बदलाव वित्तीय स्थिति पर प्रभाव / आंकड़े
श्रीराम फाइनेंस लोन विकास दर के लक्ष्य को घटाया लोन ग्रोथ 18% से घटाकर 15 से 17% की गई; स्टेज-2 परिसंपत्तियां बढ़कर 7.04% हुईं।
महिंद्रा फाइनेंस 282 जिलों को सूखा-प्रभावित घोषित किया ट्रैक्टर लोन वितरण में तिमाही आधार पर 20% की गिरावट; ग्रॉस स्टेज-3 घटकर 3.4%।
एलएंडटी फाइनेंस बारिश की कमी वाले क्षेत्रों में सख्ती लोन देने की रफ्तार धीमी की और तनावग्रस्त बाजारों की निगरानी बढ़ाई।

लोन वापसी में जोखिम और एसेट क्वालिटी की स्थिति

श्रीराम फाइनेंस के जुलाई-सितंबर तिमाही के आंकड़ों के अनुसार, कंपनी के फंसे हुए कर्ज (स्टेज 3 एसेट्स) की दर बढ़कर 4.65% हो गई है। वहीं, लोन वापसी में जोखिम बढ़ने का संकेत देने वाली ‘स्टेज 2’ परिसंपत्तियां बढ़कर 7.04% पर पहुंच गई हैं। महिंद्रा फाइनेंस ने भी अपने 282 जिलों को सूखा-प्रभावित श्रेणी में रखकर वहां वसूली की प्रक्रिया को तेज कर दिया है। हालांकि, कुछ कंपनियों की ओवरऑल एसेट क्वालिटी में अभी स्थिरता बनी हुई है, लेकिन आने वाली तिमाहियों को लेकर चिंताएं बरकरार हैं।

रेटिंग एजेंसियों की चेतावनी: आगे बढ़ सकती हैं चुनौतियां

रेटिंग एजेंसियों का मानना है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए आने वाली तिमाहियां चुनौतीपूर्ण हो सकती हैं:
  • इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च: इसके निदेशक जिनय गाला के अनुसार, कमजोर मानसून का असर दिसंबर के बाद एसेट क्वालिटी पर साफ दिखाई दे सकता है, जिससे माइक्रोफाइनेंस और ट्रैक्टर फाइनेंसिंग पर दबाव आ सकता है।
  • केयरएज रेटिंग्स: निदेशक संजय अग्रवाल का कहना है कि सूखे की स्थिति का प्रतिकूल असर तीसरी तिमाही की तुलना में चौथी तिमाही में अधिक देखने को मिल सकता है, विशेष रूप से छोटे आकार के असुरक्षित पर्सनल लोन और उपभोग लोन पर।

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