नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने और खेती से जुड़ी जरूरी जानकारियां आसानी से उपलब्ध कराने की दिशा में केंद्र सरकार ने डिजिटल पहल को आगे बढ़ाया है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को संशोधित एग्री वेलफेयर पोर्टल का शुभारंभ किया। इस डिजिटल प्लेटफॉर्म का उद्देश्य किसानों को सरकारी योजनाओं, सब्सिडी, आर्थिक सहायता और कृषि सेवाओं की जानकारी एक ही जगह उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें छोटी-छोटी जानकारियों के लिए अलग-अलग सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।
कृषि मंत्रालय के अनुसार, इस पोर्टल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया और किसान कल्याण के विजन के अनुरूप तैयार किया गया है। इसके माध्यम से सरकारी सेवाओं को किसानों तक सीधे पहुंचाने और कृषि क्षेत्र में डिजिटल सुविधाओं का विस्तार करने पर जोर दिया गया है।
एक ही पोर्टल पर मिलेंगी प्रमुख कृषि योजनाओं की जानकारी
संशोधित एग्री वेलफेयर पोर्टल किसानों के लिए साझा डिजिटल मंच के रूप में काम करेगा। इस पर प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN), एग्रीस्टैक और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना जैसी प्रमुख पहलों से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने का प्रावधान है।
पोर्टल की मदद से किसान विभिन्न योजनाओं की पात्रता संबंधी जानकारी प्राप्त कर सकेंगे और उपलब्ध डिजिटल सेवाओं का उपयोग कर पाएंगे। ऑनलाइन आवेदन तथा प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) से जुड़ी सुविधाओं को एक मंच पर उपलब्ध कराने का उद्देश्य सरकारी सहायता की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुविधाजनक बनाना है।
इस व्यवस्था से किसानों को योजनाओं की जानकारी जुटाने में लगने वाला समय कम हो सकता है। साथ ही, आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाने और बिचौलियों पर निर्भरता घटाने में भी मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि, प्रत्येक योजना की पात्रता, आवेदन की शर्तें और लाभ वितरण की प्रक्रिया संबंधित योजना के नियमों के अनुसार ही लागू होगी।
FPO, PACS और कृषि विशेषज्ञों को भी जोड़ने की तैयारी
पोर्टल का दायरा केवल व्यक्तिगत किसानों तक सीमित रखने की योजना नहीं है। इसमें किसान उत्पादक संगठनों (FPOs), प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS), कृषि वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और कृषि क्षेत्र में काम करने वाले स्टार्टअप्स को भी जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विजन है कि सरकार आम नागरिकों और किसानों के लिए हर समय मोबाइल पर उपलब्ध रहे। उन्होंने तकनीक को किसानों के जीवन को आसान बनाने का माध्यम बताते हुए कहा कि इसका वास्तविक लाभ खेतों तक पहुंचना चाहिए।
कृषि क्षेत्र के विभिन्न हितधारकों को एक मंच पर जोड़ने से जानकारी साझा करने, नई तकनीकों को बढ़ावा देने और किसानों तक वैज्ञानिक सलाह पहुंचाने में सहायता मिल सकती है।
मौसम, बीज-खाद और मंडी भाव की जानकारी पर जोर
खेती में सही समय पर सही फैसला लेना किसानों की लागत और संभावित आमदनी दोनों को प्रभावित करता है। इसे ध्यान में रखते हुए पोर्टल पर मौसम संबंधी अपडेट, वैज्ञानिक खेती के तरीके, बीज एवं उर्वरकों की उपलब्धता और मंडियों के भाव से जुड़ी प्रामाणिक जानकारी उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।
ऐसी जानकारियों से किसानों को बुवाई, सिंचाई, फसल प्रबंधन और कृषि उपज की बिक्री से जुड़े फैसले लेने में मदद मिल सकती है। समय पर मौसम संबंधी जानकारी मिलने से कृषि गतिविधियों की बेहतर योजना बनाने में भी सहायता मिल सकती है।
हालांकि, इन सुविधाओं की वास्तविक उपयोगिता इस बात पर निर्भर करेगी कि जानकारी कितनी नियमित रूप से अपडेट होती है और किसानों को उनके क्षेत्र के अनुसार कितनी सटीक जानकारी मिल पाती है।
कमजोर इंटरनेट पर भी इस्तेमाल करने की सुविधा
ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी और डिजिटल साक्षरता की चुनौतियों को देखते हुए संशोधित पोर्टल को हल्का, मोबाइल-अनुकूल और आसान नेविगेशन वाला बनाने पर जोर दिया गया है। इसका उद्देश्य सामान्य स्मार्टफोन और कमजोर इंटरनेट नेटवर्क वाले क्षेत्रों में भी किसानों के लिए इसका उपयोग सुविधाजनक बनाना है।
पोर्टल में स्क्रीन रीडर और सरल नेविगेशन जैसी सुलभता सुविधाओं को भी शामिल किया गया है, ताकि दृष्टिबाधित और अन्य दिव्यांग उपयोगकर्ता डिजिटल सेवाओं का लाभ उठा सकें।
छोटे और सीमांत किसानों के लिए चलेगा प्रशिक्षण अभियान
केंद्रीय मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी सही, पूर्ण और समय पर अपडेट की जाए। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि इसकी भाषा और प्रक्रियाएं सरल हों, जिससे कम पढ़े-लिखे छोटे और सीमांत किसान भी इसका उपयोग कर सकें।
किसानों को डिजिटल सुविधाओं के इस्तेमाल में प्रशिक्षित करने के लिए देशभर के कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs) के माध्यम से विशेष प्रशिक्षण अभियान चलाने की योजना है। इससे किसानों को पोर्टल पर जानकारी खोजने, उपलब्ध सेवाओं को समझने और डिजिटल माध्यम से सरकारी योजनाओं तक पहुंचने में मदद मिल सकती है।
कार्यक्रम में कृषि एवं किसान कल्याण सचिव अतीश चंद्रा, अतिरिक्त सचिव प्रमोद मेहरदा तथा कृषि मंत्रालय और राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
किसानों के लिए क्यों अहम है यह पहल?
संशोधित एग्री वेलफेयर पोर्टल का महत्व केवल योजनाओं की जानकारी एक जगह उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। इसकी सफलता इस बात से तय होगी कि किसान इसका कितनी आसानी से इस्तेमाल कर पाते हैं, जानकारी कितनी विश्वसनीय रहती है और सरकारी सेवाओं का लाभ उन तक समय पर पहुंचता है या नहीं। प्रभावी क्रियान्वयन और नियमित अपडेट के साथ यह पहल कृषि सेवाओं को अधिक सुलभ, पारदर्शी और किसान-केंद्रित बनाने में उपयोगी साबित हो सकती है।
= = = = = =
लेटेस्ट अपडेट्स के लिए ‘कृषि भूमि’ के व्हाट्सएप्प चैनल से जुड़ें
= = = = = =
इन ख़बरों को भी पढ़ें…
UPI पेमेंट पर फिलहाल नहीं लगेगा शुल्क, NPCI ने 15 अक्टूबर की डेडलाइन बढ़ाई
सितंबर में दो साल के उच्चतम स्तर पर पहुंची खुदरा महंगाई, 5.54% हुई दर; प्याज की कीमतों में 108% उछाल
गेहूं MSP में सिर्फ ₹25 की बढ़ोतरी, किसान संगठनों में नाराजगी; लागत और C2+50% फॉर्मूले पर उठे सवाल
यूपी की सभी 251 मंडियां अब Agmarknet 2.0 से जुड़ीं, किसान एक क्लिक में जान सकेंगे कहां क्या भाव
बारिश ने बिगाड़ा सब्जियों का गणित: मंडियों में आवक घटी, धनिया-अदरक के दाम 250 रुपये किलो तक
महाराष्ट्र में 15 अक्टूबर से शुरू होगा 2026-27 का गन्ना पेराई सत्र, सरकार ने लिया बड़ा फैसला