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Retail Inflation: सितंबर में दो साल के उच्चतम स्तर पर पहुंची खुदरा महंगाई, 5.54% हुई दर; प्याज की कीमतों में 108% उछाल

नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): Retail Inflation: भारत में महंगाई का दबाव एक बार फिर बढ़ गया है। सितंबर 2026 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) पर आधारित खुदरा महंगाई दर बढ़कर 5.54% हो गई। अगस्त में यह दर 4.83% दर्ज की गई थी। खाद्य पदार्थों की कीमतों में तेज वृद्धि इस उछाल की प्रमुख वजह रही। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) की ओर से 12 अक्टूबर को जारी अनंतिम आंकड़ों के अनुसार, उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक (CFPI) पर आधारित खाद्य महंगाई भी अगस्त के 5.97% से बढ़कर सितंबर में 7.74% पर पहुंच गई। यह स्थिति आम परिवारों के मासिक बजट पर बढ़ते दबाव को दर्शाती है।

सितंबर में लगभग दो साल के उच्चतम स्तर पर पहुंची खुदरा महंगाई

सितंबर की खुदरा महंगाई (Retail Inflation) दर अक्टूबर 2024 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंची है, जब पुरानी CPI श्रृंखला में महंगाई 6.21% दर्ज की गई थी। हालांकि, मौजूदा CPI श्रृंखला का आधार वर्ष 2024 है, इसलिए ऐतिहासिक तुलना करते समय आंकड़ों की श्रृंखला को ध्यान में रखना जरूरी है।

महंगाई दर में एक महीने के भीतर 0.71 प्रतिशत अंक की वृद्धि हुई। इसका अर्थ है कि उपभोक्ताओं के लिए वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी का दबाव तेज हुआ है। खाद्य पदार्थों के अलावा परिवहन और कुछ सेवाओं की बढ़ती लागत भी महंगाई के रुझान को प्रभावित कर रही है।

Retail Inflation: खाद्य महंगाई 7.74%, ग्रामीण परिवारों पर दबाव

खाद्य महंगाई में वृद्धि सितंबर के आंकड़ों का सबसे महत्वपूर्ण पहलू रही। ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य महंगाई 8.06% दर्ज की गई, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 7.18% रही। अगस्त में ये दरें क्रमशः 6.17% और 5.64% थीं।

समग्र खुदरा महंगाई भी ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बढ़ी। ग्रामीण महंगाई अगस्त के 5.24% से बढ़कर सितंबर में 6.08% हो गई। वहीं, शहरी महंगाई 4.31% से बढ़कर 4.88% पर पहुंच गई।

ग्रामीण परिवारों के खर्च में खाद्य पदार्थों की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी होने के कारण कीमतों में तेज वृद्धि उनके बजट को अधिक प्रभावित कर सकती है। हालांकि, वास्तविक प्रभाव परिवारों की आय, उपभोग और स्थानीय बाजारों में कीमतों के अनुसार अलग-अलग होगा।

प्याज की महंगाई 108% के पार, अदरक और लहसुन भी महंगे

Retail Inflation: सब्जियों और रसोई में इस्तेमाल होने वाली कुछ प्रमुख वस्तुओं की कीमतों में तेज वृद्धि दर्ज की गई। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, प्याज की महंगाई अगस्त के 48.78% से बढ़कर सितंबर में 108.09% हो गई। अदरक की कीमतों में सालाना आधार पर 62.85% और लहसुन की कीमतों में 54.62% की वृद्धि दर्ज की गई।

नींबू की कीमतें भी अगस्त के 15.15% की तुलना में सितंबर में 36.41% बढ़ीं। इन वस्तुओं की कीमतों में उछाल का सीधा असर घरों के रसोई खर्च पर पड़ सकता है।

हालांकि, सभी सब्जियों की कीमतें नहीं बढ़ीं। सालाना आधार पर आलू के दाम 11.50% और टमाटर के दाम 8.62% घटे। भिंडी की कीमतों में भी 4.48% की गिरावट दर्ज की गई। इससे स्पष्ट है कि खाद्य महंगाई का दबाव अलग-अलग वस्तुओं में समान नहीं रहा।

परिवहन और सेवाओं की बढ़ती लागत भी चिंता का विषय

Retail Inflation: महंगाई का दबाव केवल खाद्य वस्तुओं तक सीमित नहीं रहा। सितंबर में खाद्य एवं पेय पदार्थों की श्रेणी में महंगाई दर 7.36% दर्ज की गई। खाद्य एवं पेय पदार्थ परोसने वाली सेवाओं की कीमतों में सालाना आधार पर 9.39% की वृद्धि हुई।

माल परिवहन सेवाओं की लागत 14.73% बढ़ी, जबकि परिवहन श्रेणी में महंगाई 5.01% रही। माल ढुलाई महंगी होने से वस्तुओं की आपूर्ति और वितरण लागत पर दबाव पड़ सकता है, हालांकि इसका अंतिम असर उत्पादों और क्षेत्रों के अनुसार अलग हो सकता है।

पर्सनल केयर और विविध वस्तुओं एवं सेवाओं की श्रेणी में महंगाई 13.75% रही। कपड़ों और जूतों की कीमतों में 3.93% वृद्धि दर्ज की गई। इसके विपरीत, स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित श्रेणी में महंगाई 1.40% और आवास, पानी, बिजली, गैस तथा अन्य ईंधनों की श्रेणी में 2.74% रही।

RBI और अर्थव्यवस्था के लिए क्यों अहम हैं ये आंकड़े?

Retail Inflation: सितंबर में महंगाई बढ़ने से भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के लिए कीमतों के रुझान पर नजर रखना महत्वपूर्ण हो गया है। RBI का मध्यम अवधि का खुदरा महंगाई लक्ष्य 4% है, जबकि इसकी सहनशीलता सीमा 2% से 6% निर्धारित है। सितंबर की 5.54% दर इस सीमा के ऊपरी स्तर के करीब पहुंच गई, हालांकि यह अभी भी 6% से नीचे है।

महंगाई का लगातार बढ़ना मौद्रिक नीति से जुड़े फैसलों को प्रभावित कर सकता है। ऊंची महंगाई के बीच ब्याज दरों, कर्ज की लागत और उपभोक्ता मांग के बीच संतुलन बनाए रखना केंद्रीय बैंक के लिए महत्वपूर्ण रहता है। हालांकि, भविष्य में ब्याज दरों को लेकर कोई भी निष्कर्ष आगामी महंगाई आंकड़ों और RBI के नीतिगत आकलन पर निर्भर करेगा।

फिलहाल, सितंबर के आंकड़े बताते हैं कि खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतें देश में महंगाई की प्रमुख चुनौती बनी हुई हैं। आने वाले महीनों में सब्जियों और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतों का रुझान यह तय करने में अहम भूमिका निभाएगा कि घरेलू बजट पर दबाव कितना बना रहता है।

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