PM Surya Ghar Yojana: रूफटॉप सोलर में यूपी देश में नंबर-1, गुजरात को पीछे छोड़ा
लखनऊ (कृषि भूमि ब्यूरो): प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत रूफटॉप सोलर लगाने के मामले में उत्तर प्रदेश देश में पहले स्थान पर पहुंच गया है। प्रदेश में 8.93 लाख से अधिक रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित किए जा चुके हैं। इस उपलब्धि के साथ उत्तर प्रदेश ने गुजरात को पीछे छोड़ दिया है, जबकि महाराष्ट्र तीसरे स्थान पर है। केंद्र सरकार की योजना के तहत तेजी से बढ़ते इंस्टॉलेशन को प्रदेश में घरेलू सौर ऊर्जा के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति माना जा रहा है।
11 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध राष्ट्रीय पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में कुल 8,93,933 रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाए जा चुके थे। इनकी कुल स्थापित क्षमता लगभग 3 गीगावाट तक पहुंच गई। गुजरात में 8,88,444 और महाराष्ट्र में 8,47,571 इंस्टॉलेशन दर्ज किए गए। ये आंकड़े योजना के तहत संचयी इंस्टॉलेशन की संख्या पर आधारित हैं।
ए.के. शर्मा ने दी बधाई, यूपीनेडा के प्रयासों का उल्लेख
उत्तर प्रदेश के नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने इस उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने उत्तर प्रदेश नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विकास अभिकरण (यूपीनेडा) के अधिकारियों, कर्मचारियों और प्रदेशवासियों को भी बधाई दी।
मंत्री के अनुसार, रूफटॉप सोलर का विस्तार केवल बिजली की जरूरतों को पूरा करने तक सीमित नहीं है। इससे स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने और पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिल सकती है।
यूपीनेडा की ओर से योजना के क्रियान्वयन, लंबित आवेदनों के समाधान और इंस्टॉलेशन की निगरानी पर जोर दिया जा रहा है। प्रदेश में 8,000 से अधिक वेंडर्स को योजना के लिए सूचीबद्ध किए जाने की जानकारी भी दी गई है।
सितंबर में यूपी में लगे 74,796 सोलर सिस्टम
सितंबर 2026 में उत्तर प्रदेश ने नए रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन के मामले में देश के अन्य राज्यों से आगे प्रदर्शन किया। राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार, महीने के दौरान प्रदेश में 74,796 सोलर सिस्टम लगाए गए। इस हिसाब से प्रतिदिन औसतन 2,493 सिस्टम स्थापित हुए।
2 अक्टूबर को प्रकाशित टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर में आंध्र प्रदेश 69,813 इंस्टॉलेशन के साथ दूसरे और महाराष्ट्र 60,907 इंस्टॉलेशन के साथ तीसरे स्थान पर रहा।
30 सितंबर तक उत्तर प्रदेश में संचयी इंस्टॉलेशन की संख्या 8,67,755 थी, जबकि गुजरात 8,70,152 इंस्टॉलेशन के साथ मामूली अंतर से आगे था। अक्टूबर के शुरुआती दिनों में तेज प्रगति के बाद यूपी ने गुजरात को पीछे छोड़ दिया।
यूपी, गुजरात और महाराष्ट्र में कितने इंस्टॉलेशन?
| राज्य | 11 अक्टूबर 2026 तक इंस्टॉलेशन |
|---|---|
| उत्तर प्रदेश | 8,93,933 |
| गुजरात | 8,88,444 |
| महाराष्ट्र | 8,47,571 |
स्रोत: राष्ट्रीय पोर्टल से संकलित राज्यवार आंकड़े। आंकड़े संचयी हैं और समय के साथ बदल सकते हैं।
लखनऊ पहले, वाराणसी भी टॉप जिलों में शामिल
उत्तर प्रदेश के भीतर भी कई जिलों में रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन तेजी से बढ़े हैं। उपलब्ध राज्यवार आंकड़ों के अनुसार, लखनऊ सबसे आगे है। 8 अक्टूबर तक जिले में 1,52,340 इंस्टॉलेशन दर्ज किए गए थे। वाराणसी में 59,344 और कानपुर नगर में 53,918 सिस्टम स्थापित हो चुके थे।
प्रदेश के 15 जिलों के देश के शीर्ष 100 जिलों में शामिल होने की जानकारी भी दी गई है। हालांकि, जिलेवार रैंकिंग और संख्या समय के साथ बदल सकती है।
कितनी मिलती है सब्सिडी?
प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का उद्देश्य एक करोड़ घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित करना और घरेलू बिजली खर्च को कम करने में मदद देना है। योजना के लिए केंद्र सरकार ने 75,021 करोड़ रुपये का कुल परिव्यय निर्धारित किया है।
सामान्य राज्यों में पात्र घरेलू उपभोक्ताओं के लिए केंद्रीय वित्तीय सहायता की दरें इस प्रकार हैं:
- 1 किलोवाट सिस्टम: 30,000 रुपये प्रति किलोवाट की दर से 30,000 रुपये तक।
- 2 किलोवाट सिस्टम: 60,000 रुपये तक।
- 3 किलोवाट या उससे अधिक: अधिकतम 78,000 रुपये की केंद्रीय सब्सिडी।
विशेष श्रेणी के राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए सहायता की दरें अलग हो सकती हैं।
स्वच्छ ऊर्जा और बिजली बिल में राहत की संभावना
उत्तर प्रदेश में रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन की बढ़ती संख्या से घरेलू स्तर पर सौर ऊर्जा उत्पादन का दायरा बढ़ रहा है। पात्र परिवारों को इससे बिजली बिल कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, वास्तविक बचत सिस्टम की क्षमता, स्थानीय धूप, बिजली की खपत, नेट मीटरिंग और उपभोक्ता की बिजली दरों पर निर्भर करती है।
योजना की सफलता के लिए केवल इंस्टॉलेशन की संख्या बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है। समय पर सब्सिडी, गुणवत्तापूर्ण उपकरण, उचित रखरखाव और उपभोक्ताओं की शिकायतों का समाधान भी महत्वपूर्ण होगा। उत्तर प्रदेश का गुजरात से आगे निकलना योजना के विस्तार का एक अहम संकेत है, लेकिन इसके दीर्घकालीन प्रभाव का आकलन बिजली उत्पादन, उपभोक्ता बचत और सिस्टम के नियमित संचालन के आधार पर किया जाना चाहिए।
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