मुंबई (कृषि भूमि ब्यूरो): प्याज की कीमतें दोगुनी – देश में प्याज की कीमतों ने एक बार फिर उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। पिछले एक महीने में कृषि उपज मंडी समितियों (APMC) में प्याज के थोक भाव करीब दोगुने हो गए हैं। कई बाजारों में कीमतें ₹32 से ₹50 प्रति किलो के आसपास चल रही हैं, जबकि कुछ इलाकों में खुदरा भाव ₹82 प्रति किलो तक पहुंच गया है।
केंद्र सरकार के Price Monitoring System के अनुसार, 4 सितंबर 2026 को प्याज का अखिल भारतीय औसत खुदरा भाव ₹50.50 प्रति किलो था। एक सप्ताह पहले के मुकाबले कीमत में करीब ₹2 प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई है। सरकार आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर रोजाना निगरानी करती है और जरूरत पड़ने पर बफर स्टॉक के जरिए बाजार में हस्तक्षेप करती है।
प्याज की कीमतें: लासलगांव में तेजी ने बढ़ाई चिंता
महाराष्ट्र का नासिक स्थित लासलगांव प्याज के कारोबार का प्रमुख केंद्र है। यहां पिछले एक सप्ताह में प्याज के भाव में करीब ₹1,000 प्रति क्विंटल की तेजी बताई जा रही है। कारोबारियों के मुताबिक, देर से तैयार हुई रबी फसल अपेक्षाकृत कमजोर रही। इसके अलावा भंडारण में रखे प्याज का करीब 20-25 प्रतिशत हिस्सा खराब होने से बाजार में उपलब्ध स्टॉक पर दबाव बढ़ा है।
हॉर्टिकल्चर प्रोड्यूस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजित शाह के अनुसार, मौजूदा तेजी के पीछे मौसम की दोहरी मार भी महत्वपूर्ण है। देर से तैयार हुई रबी फसल पर बेमौसम बारिश का असर पड़ा, जबकि मई-जून की असामान्य गर्मी ने भंडारित प्याज की गुणवत्ता को प्रभावित किया।
किसान ऊंचे भाव की उम्मीद में रोक रहे प्याज
मौजूदा तेजी ने किसानों के व्यवहार को भी प्रभावित किया है। कुछ किसान बेहतर कीमत मिलने की उम्मीद में प्याज को तत्काल बेचने के बजाय रोककर रख रहे हैं और धीरे-धीरे बाजार में ला रहे हैं। इससे उपलब्धता पर तत्काल दबाव बना हुआ है।
हालांकि, कारोबारियों का कहना है कि पिछले साल की तुलना में इस बार भंडारण में नुकसान कम रहा है। पिछले वर्ष कुछ इलाकों में करीब 50 प्रतिशत तक प्याज खराब होने की स्थिति सामने आई थी।
कर्नाटक की नई फसल दे सकती है राहत
बाजार के लिए सबसे बड़ी उम्मीद अब कर्नाटक की नई फसल से है। कारोबारियों के मुताबिक, वहां की फसल की खुदाई तेजी से चल रही है और अगले करीब दो सप्ताह में नई आवक बढ़ सकती है। इससे बाजार में उपलब्धता बढ़ने और कीमतों पर दबाव कम होने की उम्मीद है।
कुछ व्यापारियों का अनुमान है कि कर्नाटक में सामान्य उत्पादन का करीब 60 प्रतिशत भी हासिल होता है तो मौजूदा आपूर्ति संकट को संभालने में मदद मिल सकती है। बेंगलुरु बाजार में नई आवक बढ़ने पर रोजाना करीब 70-80 टन अतिरिक्त प्याज पहुंचने की संभावना जताई गई है।
महाराष्ट्र की नई खरीफ फसल से बड़ी राहत हालांकि दिवाली के बाद मिलने की उम्मीद है। यानी अगले कुछ सप्ताह में कीमतों की दिशा मुख्य रूप से कर्नाटक की आवक और मौजूदा भंडार पर निर्भर करेगी।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय प्याज महंगा
भारतीय प्याज की ऊंची कीमतों का असर निर्यात प्रतिस्पर्धा पर भी पड़ रहा है। कारोबारियों के अनुसार, भारतीय प्याज की कीमत 600 डॉलर प्रति टन से अधिक है, जबकि पाकिस्तान से उपलब्ध प्याज की कीमत इससे कम बताई जा रही है। कमजोर पाकिस्तानी मुद्रा भी वहां के निर्यातकों को प्रतिस्पर्धात्मक लाभ दे रही है।
इसके बावजूद वैश्विक बाजार में प्याज की मांग बनी हुई है। पाकिस्तान में कमजोर फसल के कारण उसे अपनी जरूरत पूरी करने के लिए आयात का सहारा लेना पड़ रहा है।
किसानों के लिए भी कीमत जरूरी
प्याज की कीमतें – प्याज की ऊंची कीमतों से जहां उपभोक्ता परेशान हैं, वहीं किसानों के लिए भी मौजूदा भाव को लागत के संदर्भ में देखना जरूरी है। उत्पादन, कटाई, परिवहन और भंडारण की लागत लगातार बढ़ रही है। कारोबारियों का कहना है कि सीजन के अंत में किसानों को कम से कम ₹30 प्रति किलो का भाव मिलना चाहिए, ताकि बढ़ी हुई लागत की भरपाई हो सके।
केंद्र सरकार पहले से ही प्याज के बफर स्टॉक और नियंत्रित बिक्री जैसे उपायों का इस्तेमाल करती रही है। Price Stabilisation Fund के तहत प्याज का बफर बनाए रखने और जरूरत के समय बाजार में स्टॉक जारी करने की व्यवस्था है।
फिलहाल बाजार में तस्वीर मिश्रित है—उपभोक्ताओं के लिए कीमतें ऊंची हैं, किसानों के लिए बेहतर भाव राहत लेकर आए हैं, लेकिन आगे की दिशा नई फसल की आवक तय करेगी। यदि कर्नाटक से अनुमान के मुताबिक प्याज बाजार में पहुंचता है, तो अगले कुछ हफ्तों में कीमतों में नरमी की शुरुआत हो सकती है।

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