नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): भारतीय हरी इलायची (ग्रीन कार्डमम) के निर्यात पर इन दिनों ऊंची कीमतों का गहरा असर दिखाई दे रहा है। घरेलू बाजार में कीमतें बढ़ने के कारण विदेशी खरीदार बड़े ऑर्डर देने से बच रहे हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में इलायची की मांग कमजोर नहीं हुई है, बल्कि आयातक फिलहाल कीमतों में संभावित नरमी या स्थिरता का इंतजार कर रहे हैं।
महंगी इलायची से निर्यात की रफ्तार धीमी
तमिलनाडु के बोडीनायकनूर के प्रमुख इलायची निर्यातक एसकेएम धनवंतन के अनुसार, विदेशी खरीदार इस समय बड़े स्टॉक बनाने के बजाय कम मात्रा में और केवल जरूरत के हिसाब से खरीदारी कर रहे हैं। वे मानसून की स्थिति और नई फसल के उत्पादन का पूरा आकलन करने के बाद ही बड़े ऑर्डर देने का फैसला करेंगे। यदि आने वाले दिनों में अनुकूल मौसम से उत्पादन बढ़ता है और कीमतों में नरमी आती है, तो व्यापार में तेजी लौटने की उम्मीद है। हालांकि, लंबी अवधि में भारतीय प्रीमियम हरी इलायची की वैश्विक मांग अभी भी मजबूत बनी हुई है।
घरेलू बाजार पर असर और बढ़ते दाम
इलायची की बढ़ती कीमतों का सीधा असर घरेलू बाजार पर भी पड़ा है। थोक खरीदारी में खासी कमी आई है, और खुदरा उपभोक्ता भी अब बड़े पैक के बजाय छोटे पैकेट खरीदना पसंद कर रहे हैं। वर्तमान में इलायची का औसत बाजार भाव 3,000 से 3,300 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया है, जबकि पहले यह 2,700 से 2,900 रुपये प्रति किलोग्राम के दायरे में था।

कमजोर मानसून और कीटों का प्रकोप
इडुक्की के प्रमुख इलायची उत्पादक एस.बी. प्रभाकर ने बताया कि जून और जुलाई के दौरान कमजोर मानसून के कारण नई फसल को काफी नुकसान पहुंचा है। पर्याप्त बारिश न होने के कारण पौधों पर फल कम बने और कई फल समय से पहले झड़ गए। शुरुआती अनुमानों के मुताबिक, फसल को 20 से 25 प्रतिशत तक का नुकसान हो सकता है। यदि अगस्त के मध्य में मौसम शुष्क और गर्म रहता है, तो यह संकट और गहरा सकता है।
इसके अलावा, इलायची के बागानों में ‘रूट ग्रब’ (Root Grub) और ‘नेमाटोड’ (Nematodes) जैसे मिट्टी के कीटों का प्रकोप बढ़ने से भी पौधों की सेहत और फलत प्रक्रिया पर बुरा असर पड़ रहा है। इन तमाम प्रतिकूल परिस्थितियों को देखते हुए उद्योग से जुड़े जानकारों का अनुमान है कि इस सीजन में इलायची का कुल उत्पादन घटकर करीब 33,000 टन रह सकता है, जबकि पहले 40,000 टन का अनुमान लगाया गया था। पिछले सीजन (2025-26) में कुल उत्पादन 37,733 टन दर्ज किया गया था।
वैश्विक परिदृश्य और ग्वाटेमाला का उत्पादन
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, दुनिया के बड़े इलायची उत्पादक देशों में शामिल ग्वाटेमाला में अगले सीजन के दौरान उत्पादन बढ़कर 25,000 से 28,000 टन तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि पिछले सीजन में यह करीब 17,000 टन था। इसके बावजूद, वैश्विक बाजार में इलायची की कुल उपलब्धता मांग के मुकाबले कम रहने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि अल नीनो के प्रभाव और सूखे के जोखिम के बीच कम और मध्यम अवधि में इलायची की कीमतें मजबूत बनी रह सकती हैं।
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