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कमजोर मानसून से खरीफ बुवाई को झटका, रकबा 21% घटा; तिलहन और कपास में बड़ी गिरावट

नई दिल्ली ( कृषि भूमि ब्यूरो): खरीफ फसलों की बुवाई 2026: दक्षिण-पश्चिम मानसून की कमजोर शुरुआत और बारिश के असमान भौगोलिक वितरण का असर देश में खरीफ फसलों की बुवाई पर साफ दिखाई दे रहा है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 5 जुलाई 2026 तक देश में खरीफ फसलों की कुल बुवाई 350.85 लाख हेक्टेयर में हुई है। पिछले साल की समान अवधि में यह आंकड़ा 442.80 लाख हेक्टेयर था। इस तरह बुवाई का कुल रकबा 91.95 लाख हेक्टेयर यानी करीब 21 फीसदी कम है।

खरीफ सीजन की शुरुआत में मानसून की धीमी प्रगति ने कई प्रमुख कृषि क्षेत्रों में बुवाई को प्रभावित किया। हालांकि जुलाई के शुरुआती दिनों में मध्य भारत सहित कुछ क्षेत्रों में मानसून सक्रिय हुआ है, लेकिन शुरुआती बारिश की कमी से पैदा हुआ अंतर अभी पूरी तरह नहीं भर पाया है।

धान और दलहन की बुवाई पिछड़ी

देश की प्रमुख खरीफ फसल धान की बुवाई 5 जुलाई तक 60.24 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में 69.30 लाख हेक्टेयर में धान लगाया जा चुका था। इस तरह धान का रकबा करीब 13 फीसदी कम है।

दलहन की बुवाई भी पिछले साल से काफी पीछे है। चालू सीजन में अब तक 37.15 लाख हेक्टेयर में दलहन बोई गई है, जबकि पिछले साल समान अवधि में यह आंकड़ा 47.49 लाख हेक्टेयर था। यानी दलहन का क्षेत्र करीब 22 फीसदी घटा है।

फसलवार स्थिति देखें तो अरहर की बुवाई 21 लाख हेक्टेयर से घटकर 12.35 लाख हेक्टेयर रह गई। उड़द का क्षेत्र 4.63 लाख हेक्टेयर से घटकर 3.01 लाख हेक्टेयर और मूंग का रकबा 17.20 लाख हेक्टेयर से घटकर 16.81 लाख हेक्टेयर रह गया। दूसरी ओर, मोठ की बुवाई 3 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 3.45 लाख हेक्टेयर हुई है।

बाजरा और मक्का का रकबा भी कम

श्री अन्न और मोटे अनाज की कुल बुवाई 60.12 लाख हेक्टेयर में हुई है, जो पिछले साल के 71.86 लाख हेक्टेयर से 11.75 लाख हेक्टेयर कम है।

इस श्रेणी में बाजरा सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। इसका रकबा 30 लाख हेक्टेयर से घटकर 20.82 लाख हेक्टेयर रह गया। मक्का की बुवाई पिछले साल के 35 लाख हेक्टेयर के मुकाबले 32.94 लाख हेक्टेयर में हुई है। ज्वार और रागी की बुवाई में भी मामूली कमी दर्ज की गई है।

तिलहन की बुवाई में 39 फीसदी की भारी गिरावट

खरीफ बुवाई के आंकड़ों में सबसे बड़ी चिंता तिलहन को लेकर है। तिलहन फसलों का कुल क्षेत्र पिछले साल के 109.27 लाख हेक्टेयर से घटकर 66.31 लाख हेक्टेयर रह गया है। यानी तिलहन की बुवाई में 42.96 लाख हेक्टेयर या करीब 39 फीसदी की गिरावट आई है।

सोयाबीन की बुवाई 79.20 लाख हेक्टेयर से घटकर 47.80 लाख हेक्टेयर रह गई। अकेले सोयाबीन के रकबे में 31.40 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई है। मूंगफली की बुवाई भी 28 लाख हेक्टेयर से घटकर 16.93 लाख हेक्टेयर रह गई। हालांकि सूरजमुखी का क्षेत्र 0.46 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 0.79 लाख हेक्टेयर हुआ है।

खरीफ
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कपास 23 फीसदी पीछे, गन्ने में मामूली बढ़त

कपास की बुवाई में भी तेज गिरावट आई है। पिछले साल 5 जुलाई तक 82 लाख हेक्टेयर में कपास बोई गई थी, जबकि इस साल यह रकबा 63.18 लाख हेक्टेयर है। इस तरह कपास का क्षेत्र करीब 23 फीसदी कम है।

इसके विपरीत, गन्ने और जूट एवं मेस्टा की बुवाई में मामूली बढ़ोतरी हुई है। गन्ने का रकबा 56.72 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 57.58 लाख हेक्टेयर और जूट एवं मेस्टा का क्षेत्र 6.16 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 6.28 लाख हेक्टेयर हो गया है।

जुलाई की बारिश तय करेगी आगे की तस्वीर

खरीफ फसलों की बुवाई का बड़ा हिस्सा जुलाई में होता है, इसलिए आने वाले सप्ताह बेहद महत्वपूर्ण होंगे। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार, जुलाई 2026 में देशभर की औसत बारिश दीर्घावधि औसत यानी LPA के 94 फीसदी से कम रहने की संभावना है। हालांकि जुलाई की शुरुआत में मध्य भारत में मानसून के सक्रिय चरण से बारिश की कमी कुछ घटी है, लेकिन वर्षा पर निर्भर कृषि क्षेत्रों के लिए बारिश का समय और उसका क्षेत्रीय वितरण खरीफ सीजन की अंतिम तस्वीर तय करेगा।

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