नई दिल्ली ( कृषि भूमि ब्यूरो): मौसम – देश के कई हिस्सों में 4 जुलाई को मानसून का जोरदार असर दिखाई देगा। IMD के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार पश्चिमी मध्य प्रदेश, ओडिशा, गुजरात और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में अत्यंत भारी बारिश हो सकती है, जबकि राजस्थान, उत्तराखंड, बंगाल और दक्षिण भारत के कई क्षेत्रों में भी मौसम खराब रहने की संभावना है।
देशभर में दक्षिण-पश्चिम मानसून की सक्रियता बढ़ गई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के 3 जुलाई 2026 को जारी ताजा बुलेटिन के मुताबिक, मानसून गुजरात के कुछ और हिस्सों, पूरे मध्य प्रदेश तथा राजस्थान और हरियाणा के कुछ अतिरिक्त इलाकों में आगे बढ़ चुका है। मानसून की उत्तरी सीमा जामनगर, उदयपुर, अजमेर, झुंझुनू, हिसार और बठिंडा से होकर गुजर रही है।
उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी पर कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है और इसके अगले दो दिनों में अधिक प्रभावी होने की संभावना है। इसके अलावा मौसमी ट्रफ, शियर जोन, महाराष्ट्र से कर्नाटक तट तक ऑफ-शोर ट्रफ और पश्चिमी विक्षोभ जैसी प्रणालियां भी सक्रिय हैं। इन मौसमी परिस्थितियों के कारण मध्य भारत में अगले 4 से 5 दिनों तक मानसून के सक्रिय बने रहने का अनुमान है।
4 जुलाई को कहां अत्यंत भारी बारिश का खतरा?
IMD के मुताबिक 4 जुलाई को पश्चिमी मध्य प्रदेश और ओडिशा में कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश के साथ कहीं-कहीं अत्यंत भारी वर्षा हो सकती है। कोंकण, मध्य महाराष्ट्र और दक्षिण गुजरात में भी 3 से 6 जुलाई के दौरान इसी तरह की अत्यधिक बारिश की आशंका जताई गई है। सौराष्ट्र और कच्छ में 3 और 4 जुलाई को भारी से बहुत भारी बारिश के बीच कहीं-कहीं अत्यंत भारी वर्षा संभव है।
पूर्वी राजस्थान में 4 जुलाई को कुछ स्थानों पर बहुत भारी बारिश हो सकती है। पश्चिमी राजस्थान में भारी बारिश की संभावना है और 4 से 9 जुलाई के दौरान अलग-अलग स्थानों पर गरज-चमक के साथ 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाली हवाएं, जिनके झोंके 60 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं, चलने का अनुमान है।
यूपी, उत्तराखंड और दिल्ली-NCR का मौसम
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 4 जुलाई को छिटपुट से बिखरी हुई बारिश के साथ कुछ स्थानों पर गरज-चमक और बिजली गिरने की संभावना है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी 3 से 6 जुलाई के बीच छिटपुट से बिखरी हुई वर्षा का अनुमान है।
उत्तराखंड में 3 से 9 जुलाई के दौरान व्यापक बारिश और अलग-अलग स्थानों पर भारी वर्षा की चेतावनी है। हिमाचल प्रदेश में 4 जुलाई को बारिश का फैलाव अपेक्षाकृत सीमित रह सकता है।
दिल्ली-NCR में 4 जुलाई को आमतौर पर बादल छाए रहने की संभावना है। दोपहर या शाम के समय एक-दो दौर की बहुत हल्की से हल्की बारिश के साथ गरज-चमक और 30 से 40 किमी प्रति घंटे की तेज हवाएं चल सकती हैं, जिनकी रफ्तार झोंकों में 50 किमी प्रति घंटे तक पहुंचने का अनुमान है।
MP, छत्तीसगढ़, बिहार और बंगाल में कैसा रहेगा मौसम?
मध्य प्रदेश में मानसून बेहद सक्रिय रहने वाला है। पश्चिमी मध्य प्रदेश में 4 जुलाई को अत्यंत भारी बारिश की आशंका है, जबकि पूर्वी मध्य प्रदेश में भी बहुत भारी वर्षा हो सकती है। मध्य प्रदेश और विदर्भ के कई इलाकों में गरज-चमक, बिजली और 30 से 40 किमी प्रति घंटे की तेज हवाओं का खतरा बना रहेगा।
छत्तीसगढ़ में 4 जुलाई को कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। बिहार में छिटपुट बारिश के साथ 4 जुलाई को 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाली हवाएं और बिजली गिरने की संभावना है। झारखंड में मध्यम से तीव्र बिजली गतिविधि की चेतावनी जारी की गई है।
गंगीय पश्चिम बंगाल में 4 जुलाई को कुछ स्थानों पर भारी बारिश का अनुमान है। उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भी गरज-चमक और तेज हवाओं की स्थिति बन सकती है।

पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत में भी मानसून सक्रिय
असम और मेघालय में 4 जुलाई को भारी बारिश के साथ 40 से 50 किमी प्रति घंटे की तेज हवाएं चल सकती हैं। नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भी अलग-अलग स्थानों पर भारी वर्षा की संभावना है।
दक्षिण भारत में तटीय कर्नाटक में बहुत भारी बारिश, जबकि तेलंगाना में भी 4 जुलाई को कुछ स्थानों पर बहुत भारी वर्षा का अनुमान है। केरल और माहे, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराइकल तथा तटीय आंध्र प्रदेश और यनम के कुछ हिस्सों में भारी बारिश हो सकती है। तमिलनाडु और तटीय आंध्र प्रदेश में गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चलने की भी आशंका है।
मछुआरों को समुद्र से दूर रहने की सलाह
IMD ने खराब समुद्री परिस्थितियों को देखते हुए गुजरात, कोंकण, गोवा और कर्नाटक तट तथा मध्य और उत्तरी अरब सागर के कई हिस्सों में मछुआरों को समुद्र में नहीं जाने की सलाह दी है। बंगाल की खाड़ी में गंगीय पश्चिम बंगाल, ओडिशा और आंध्र प्रदेश के तटों के साथ अंडमान सागर के लिए भी चेतावनी जारी की गई है।
मौसम विभाग ने भारी बारिश और बिजली के दौरान लोगों को सुरक्षित स्थान पर रहने, पेड़ों के नीचे शरण न लेने, जलभराव वाले रास्तों से बचने और स्थानीय प्रशासन की एडवाइजरी का पालन करने की सलाह दी है।
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