नई दिल्ली ( कृषि भूमि ब्यूरो): VB-G RAM G एक्ट: केंद्र सरकार ने विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) [VB-G RAM G] अधिनियम, 2025 के तहत संशोधित ग्रामीण मजदूरी दरों को अधिसूचित कर दिया है। नई मजदूरी दरें 1 जुलाई 2026 से पूरे देश में लागू हो गई हैं। इसके साथ ही पहली बार योजना के तहत 300 रुपये प्रतिदिन की न्यूनतम आधार मजदूरी निर्धारित की गई है, जिससे किसी भी पात्र श्रमिक को इससे कम मजदूरी नहीं मिलेगी।
सरकार का कहना है कि यह संशोधन ग्रामीण आय बढ़ाने, राज्यों के बीच मजदूरी असमानता कम करने और रोजगार सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। नए कानून के लागू होने के साथ ग्रामीण रोजगार गारंटी की अवधि भी 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है।
300 रुपये की न्यूनतम मजदूरी का प्रावधान
VB-G RAM G एक्ट: ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार, संशोधित अधिसूचना देश के सभी 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के विभिन्न मजदूरी क्षेत्रों पर लागू होगी। जिन राज्यों में पहले अधिसूचित मजदूरी 300 रुपये से कम थी, वहां अब न्यूनतम आधार मजदूरी 300 रुपये कर दी गई है।
मंत्रालय के अनुसार, 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मजदूरी दर पहले 300 रुपये से कम थी, जिन्हें अब नए न्यूनतम स्तर तक बढ़ाया गया है। इसका उद्देश्य कम मजदूरी वाले राज्यों के श्रमिकों को अधिक लाभ पहुंचाना है।
राष्ट्रीय औसत मजदूरी में 10 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी
सरकार के आंकड़ों के अनुसार, पूर्व व्यवस्था में राष्ट्रीय औसत अधिसूचित मजदूरी 298.8 रुपये प्रतिदिन थी, जो अब VB-G RAM G अधिनियम के तहत बढ़कर 327.4 रुपये प्रतिदिन हो गई है। यह औसतन 28.6 रुपये प्रतिदिन या 10 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्शाता है।
इस वृद्धि से ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ने, क्रय शक्ति मजबूत होने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलने की उम्मीद जताई गई है।
VB-G RAM G एक्ट: रोजगार गारंटी बढ़कर 125 दिन
VB-G RAM G अधिनियम का सबसे बड़ा बदलाव रोजगार गारंटी अवधि में किया गया है। अब पात्र ग्रामीण परिवारों को पहले की तुलना में 25 अतिरिक्त दिनों का रोजगार मिलेगा। सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और मौसमी बेरोजगारी का प्रभाव कम होगा।
किन राज्यों को मिलेगा सबसे अधिक लाभ
केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि संशोधित मजदूरी दरों का उद्देश्य ग्रामीण आजीविका को मजबूत करना और राज्यों के बीच लंबे समय से चली आ रही मजदूरी असमानताओं को कम करना है।
उनके अनुसार, जिन राज्यों में मजदूरी दर पहले अपेक्षाकृत कम थी, वहां सबसे अधिक बढ़ोतरी की गई है ताकि अधिक जरूरतमंद श्रमिकों को सीधा लाभ मिल सके।
सरकार के मुताबिक, अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड में मजदूरी दरों में लगभग 24.5 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, झारखंड, असम, त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और ओडिशा सहित कई राज्यों में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी लागू की गई है।
वहीं जिन राज्यों में पहले से मजदूरी 300 रुपये से अधिक थी, वहां भी निर्धारित संशोधन प्रक्रिया के तहत नई दरें लागू की गई हैं।
400 रुपये से अधिक दैनिक मजदूरी वाले राज्य
संशोधित अधिसूचना के बाद कुछ राज्यों में अधिसूचित मजदूरी 400 रुपये प्रतिदिन से अधिक हो गई है।
| राज्य/क्षेत्र | नई दैनिक मजदूरी |
|---|---|
| हरियाणा | 409 रुपये |
| गोवा | 406 रुपये |
| केरल | 401 रुपये |
| सिक्किम (उच्च ऊंचाई वाले ग्राम पंचायत क्षेत्र) | 450 रुपये |

राज्यों को 95,692.31 करोड़ रुपये का अंतरिम आवंटन
VB-G RAM G अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए केंद्र सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 95,692.31 करोड़ रुपये का अंतरिम आवंटन जारी किया है। सरकार का कहना है कि इस राशि से योजना के तहत समय पर मजदूरी भुगतान, परियोजनाओं का सुचारू संचालन और नई व्यवस्था में निर्बाध बदलाव सुनिश्चित किया जाएगा।
सरकार के अनुसार, संशोधित मजदूरी दरों और बढ़ी हुई रोजगार गारंटी से ग्रामीण आय में वृद्धि होगी, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, टिकाऊ परिसंपत्तियों का निर्माण होगा और समावेशी एवं सतत ग्रामीण विकास को बढ़ावा मिलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि राज्यों में समय पर कार्य आवंटन और मजदूरी भुगतान सुनिश्चित किया जाता है, तो यह नया ढांचा ग्रामीण रोजगार सुरक्षा और आजीविका सुदृढ़ीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकता है।
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