नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): फसल बीमा योजना: देश में कमजोर मानसून की संभावनाओं के बीच किसानों को राहत देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। पश्चिम बंगाल के किसानों को चालू खरीफ सीजन से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) का लाभ मिलना शुरू हो जाएगा। कृषि क्षेत्र से जुड़े सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 20 जून को पश्चिम बंगाल में इस महत्वाकांक्षी योजना की औपचारिक शुरुआत कर सकते हैं।
यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब मौसम की अनिश्चितता और प्राकृतिक आपदाओं के कारण किसानों की फसलें लगातार जोखिम में बनी हुई हैं। योजना के लागू होने से राज्य के लाखों किसानों को फसल नुकसान की स्थिति में आर्थिक सुरक्षा मिल सकेगी।
बिहार भी अगले रबी सीजन से होगा शामिल
पश्चिम बंगाल के अलावा बिहार भी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में शामिल होने की तैयारी कर रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, राज्य सरकार अगले रबी सीजन से इस योजना को लागू कर सकती है। इससे बिहार के किसानों को भी प्राकृतिक आपदाओं, अत्यधिक वर्षा, सूखा, ओलावृष्टि और अन्य मौसमीय जोखिमों से होने वाले नुकसान पर मुआवजा प्राप्त होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते जलवायु परिदृश्य और बढ़ती मौसमीय चुनौतियों के बीच फसल बीमा किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच बनकर उभरा है।
कई राज्यों ने फिर अपनाई फसल बीमा योजना
हाल के वर्षों में कुछ राज्यों ने इस योजना से दूरी बना ली थी, लेकिन अब कई राज्य दोबारा इससे जुड़ रहे हैं। आंध्र प्रदेश और झारखंड पहले ही प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में वापस लौट चुके हैं।
दूसरी ओर, गुजरात वर्तमान में अपनी राज्य स्तरीय ‘मुख्यमंत्री किसान सहाय योजना’ का संचालन कर रहा है। वहीं पंजाब सरकार ने भी सैद्धांतिक रूप से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को लागू करने पर सहमति व्यक्त की है।
इससे संकेत मिलता है कि देश के अधिकांश राज्य किसानों को जोखिम प्रबंधन की बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने के लिए बीमा आधारित मॉडल को प्राथमिकता दे रहे हैं।
किसानों को कितनी प्रीमियम राशि देनी होती है?
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों को फसल की बुवाई से लेकर कटाई के बाद तक व्यापक सुरक्षा प्रदान करती है। योजना के तहत किसानों को बेहद कम प्रीमियम दरों पर बीमा सुरक्षा उपलब्ध कराई जाती है।
| फसल श्रेणी | किसान का प्रीमियम योगदान |
|---|---|
| खरीफ फसलें | 2% |
| रबी फसलें | 1.5% |
| नकदी एवं वाणिज्यिक फसलें | 5% |
फसल बीमा योजना के बाकी प्रीमियम राशि का बड़ा हिस्सा केंद्र और राज्य सरकारें वहन करती हैं। यही वजह है कि कम लागत में किसानों को उच्च बीमा कवरेज प्राप्त हो जाता है।

मुआवजे में किसानों को मिला बड़ा लाभ
कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2016 में योजना शुरू होने के बाद से अब तक किसानों को मुआवजे के रूप में 1.98 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया जा चुका है।
दिलचस्प बात यह है कि किसानों द्वारा इस अवधि में कुल 40,097 करोड़ रुपये का प्रीमियम जमा किया गया, जबकि उन्हें मुआवजे के रूप में इससे लगभग पांच गुना अधिक राशि प्राप्त हुई। यह आंकड़ा योजना की उपयोगिता और प्रभावशीलता को दर्शाता है।
बजट में भी जारी है सरकार का फोकस
केंद्र सरकार लगातार इस योजना के लिए पर्याप्त बजटीय प्रावधान कर रही है। वित्त वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमान के अनुसार प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना पर 12,267 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।
वहीं चालू वित्त वर्ष के बजट अनुमान में फसल बीमा के लिए 12,200 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। वर्तमान में यह योजना देश के 24 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में संचालित हो रही है।
किसानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह योजना?
विशेषज्ञों के अनुसार जलवायु परिवर्तन, अनियमित मानसून और बढ़ती प्राकृतिक आपदाओं के दौर में फसल बीमा किसानों की आय सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण साधन बन गया है। पश्चिम बंगाल और आगामी समय में बिहार के इस योजना से जुड़ने के बाद करोड़ों किसानों को जोखिम से सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता मिलने की उम्मीद है।
कृषि क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि यदि योजना का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाता है, तो यह किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को अधिक टिकाऊ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
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