नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): भारत-यूके व्यापार समझौता: भारत और यूनाइटेड किंगडम (यूके) के बीच बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौता 15 जुलाई से लागू होने जा रहा है। केंद्र सरकार का मानना है कि यह समझौता भारत के किसानों, श्रमिकों, स्टार्टअप्स, उद्यमियों और नवाचार क्षेत्र के लिए नए अवसर पैदा करेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कहा है कि भारत-यूके व्यापार समझौता विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
विशेषज्ञों के अनुसार यह केवल शुल्क (टैरिफ) कम करने वाला समझौता नहीं है, बल्कि दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
भारतीय कृषि और खाद्य निर्यात को मिलेगा बड़ा प्रोत्साहन
भारत-यूके व्यापार समझौता के तहत भारत से ब्रिटेन भेजे जाने वाले 95 प्रतिशत से अधिक कृषि एवं प्रोसेस्ड खाद्य उत्पादों पर आयात शुल्क समाप्त कर दिया जाएगा। इससे भारतीय कृषि निर्यातकों को यूरोप के महत्वपूर्ण बाजारों में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी।
भारतीय मसाला उद्योग को इसका सबसे अधिक लाभ मिलने की संभावना है। काली मिर्च और इलायची जैसे प्रमुख मसालों पर पहले दिन से ही शुल्क शून्य हो जाएगा। इसके अलावा भारतीय कॉफी को भी ब्रिटेन में बिना किसी आयात शुल्क के प्रवेश मिलेगा।
समुद्री उत्पाद क्षेत्र को भी बड़ा फायदा होगा। भारतीय झींगा, टूना और कट्टलफिश जैसे समुद्री उत्पाद अब ब्रिटिश बाजार में ड्यूटी-फ्री पहुंच सकेंगे। इसके अलावा अंगूर, प्याज, शहद, ताजी सब्जियां, मेवे और बेकरी उत्पादों के निर्यात को भी बढ़ावा मिलेगा।
ब्रिटिश उत्पाद भारतीय बाजार में होंगे सस्ते
भारत-यूके व्यापार समझौता के तहत ब्रिटेन से भारत आने वाले कई उत्पादों पर भी आयात शुल्क में कमी की जाएगी। इससे भारतीय उपभोक्ताओं को अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता वाले उत्पाद अपेक्षाकृत कम कीमत पर उपलब्ध हो सकेंगे।
सैल्मन और अन्य समुद्री मछलियों पर लगने वाला 33 प्रतिशत आयात शुल्क तत्काल प्रभाव से समाप्त किया जाएगा। वहीं स्कॉच व्हिस्की पर वर्तमान 150 प्रतिशत शुल्क को घटाकर 75 प्रतिशत किया जाएगा। अगले 10 वर्षों में इसे और कम करते हुए 40 प्रतिशत तक लाया जाएगा।
इसी प्रकार ब्रिटेन से आयात होने वाली चॉकलेट, बिस्कुट और अन्य खाद्य उत्पादों पर वर्तमान 33 से 55 प्रतिशत तक के शुल्क को चरणबद्ध तरीके से अगले दशक में समाप्त किया जाएगा।
कस्टम प्रक्रिया होगी तेज और आसान
भारत-यूके व्यापार समझौता की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को सरल और तेज बनाना है। दोनों देशों ने यह सुनिश्चित करने पर सहमति जताई है कि आयातित और निर्यातित वस्तुओं को 48 घंटे के भीतर कस्टम मंजूरी मिल जाएगी।
यह सुविधा विशेष रूप से जल्दी खराब होने वाले उत्पादों जैसे ताजी मछली, फल, सब्जियां और डेयरी उत्पादों के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी। इससे उत्पादों की गुणवत्ता बनी रहेगी और व्यापारिक नुकसान कम होगा।
भारत-यूके व्यापार समझौता: प्रमुख लाभ एक नजर में
| क्षेत्र | प्रमुख लाभ |
|---|---|
| कृषि निर्यात | 95% से अधिक उत्पादों पर शुल्क समाप्त |
| मसाले | काली मिर्च और इलायची पर शून्य शुल्क |
| कॉफी | ब्रिटेन में ड्यूटी-फ्री प्रवेश |
| समुद्री उत्पाद | झींगा, टूना, कट्टलफिश पर शुल्क समाप्त |
| स्कॉच व्हिस्की | शुल्क 150% से घटकर 75% |
| कस्टम प्रक्रिया | 48 घंटे के भीतर मंजूरी |

व्यापार और निवेश को मिलेगा नया आयाम
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यह समझौता भारतीय निर्यातकों को वैश्विक बाजारों तक बेहतर पहुंच प्रदान करेगा। साथ ही ब्रिटिश कंपनियों के लिए भारत के तेजी से बढ़ते उपभोक्ता बाजार में निवेश के नए अवसर पैदा होंगे।
विशेषज्ञों के अनुसार भारत का उभरता मध्यम वर्ग और ब्रिटेन के उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद इस समझौते के माध्यम से एक-दूसरे के और करीब आएंगे। इससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को नई गति मिलने की संभावना है।
व्यापार जगत का मानना है कि भारत-यूके व्यापार समझौता आने वाले वर्षों में कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, समुद्री उत्पाद, विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों में उल्लेखनीय वृद्धि का आधार बन सकता है। इससे न केवल निर्यात बढ़ेगा, बल्कि रोजगार सृजन और आर्थिक विकास को भी नई मजबूती मिलेगी।
====
इन ख़बरों को भी पढ़ें…
कमजोर मानसून से दलहन की बुवाई पर ब्रेक, तुअर और मूंग की खेती में 50% से अधिक गिरावट
प्याज किसानों को राहत; केंद्र ने बढ़ाया न्यूनतम खरीद मूल्य, 16.50 रुपये किलो पर होगी खरीद
खरीफ 2026: जैविक खाद की मांग में रिकॉर्ड उछाल, किसानों ने खरीदी 11.17 लाख टन खाद
देश में बागवानी उत्पादन बनाएगा नया रिकॉर्ड, 2025-26 में 377.78 मिलियन टन उत्पादन का अनुमान