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बिना गारंटी मिलेगा ₹2 लाख तक का लोन, सिर्फ 4% ब्याज पर; जानिए KCC बनवाने का पूरा प्रोसेस

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नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): KCC -देश के किसानों को सस्ती और आसान ऋण सुविधा उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार की किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) योजना लगातार लोकप्रिय होती जा रही है। हालिया सरकारी और रिजर्व बैंक की गाइडलाइंस के बाद इस योजना को और अधिक सरल और लाभकारी बनाया गया है। अब किसानों को ₹2 लाख तक का लोन बिना किसी गारंटी या जमीन गिरवी रखे मिल सकता है, जिससे खेती-किसानी से जुड़े लाखों लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

विशेषज्ञों का मानना है कि किसान क्रेडिट कार्ड किसानों को साहूकारों के ऊंचे ब्याज दर वाले कर्ज से बचाने का एक प्रभावी माध्यम बन चुका है। फसल उत्पादन, खाद-बीज खरीद, सिंचाई, पशुपालन और मत्स्य पालन जैसी जरूरतों के लिए किसान इस सुविधा का लाभ उठा सकते हैं।

KCC: सिर्फ 4% तक रह सकती है ब्याज दर

किसान क्रेडिट कार्ड पर सामान्य तौर पर 7 प्रतिशत की दर से ब्याज लिया जाता है। हालांकि, समय पर ऋण चुकाने वाले किसानों को सरकार ब्याज सब्सिडी और प्रोत्साहन देती है। इसके बाद प्रभावी ब्याज दर घटकर केवल 4 प्रतिशत तक रह जाती है।

यानी यदि किसान निर्धारित समय के भीतर ऋण का भुगतान कर देता है, तो उसे बेहद कम लागत पर कृषि ऋण उपलब्ध हो जाता है। यही कारण है कि KCC योजना को किसानों के लिए सबसे किफायती ऋण विकल्पों में माना जाता है।

₹2 लाख तक लोन के लिए नहीं होगी गारंटी

नए नियमों के अनुसार अब किसानों को ₹2 लाख तक के कृषि ऋण के लिए किसी प्रकार की गारंटी या संपत्ति बंधक रखने की आवश्यकता नहीं होगी। इससे पहले यह सीमा ₹1.60 लाख थी। सरकार के इस फैसले का उद्देश्य छोटे और सीमांत किसानों तक संस्थागत ऋण की पहुंच बढ़ाना है।

खेती के साथ पशुपालन और मत्स्य पालन को भी लाभ

KCC योजना का दायरा केवल पारंपरिक खेती तक सीमित नहीं है। डेयरी फार्मिंग, मुर्गी पालन, बकरी पालन, सुअर पालन और मछली पालन से जुड़े किसान भी इस योजना के तहत ऋण प्राप्त कर सकते हैं।

इसके अलावा लंबी अवधि वाली फसलों और बागवानी क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए KCC की वैधता अवधि को बढ़ाकर 6 वर्ष तक करने का प्रस्ताव भी चर्चा में है, जिससे किसानों को बार-बार नवीनीकरण की परेशानी नहीं होगी।

कौन कर सकता है आवेदन?

किसान क्रेडिट कार्ड के लिए निम्न श्रेणी के लोग आवेदन कर सकते हैं:

  • स्वयं की भूमि पर खेती करने वाले किसान।
  • संयुक्त रूप से खेती करने वाले किसान।
  • बटाईदार और पट्टे पर जमीन लेकर खेती करने वाले किसान।
  • स्वयं सहायता समूह (SHG) और संयुक्त देयता समूह (JLG)।
  • पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन से जुड़े व्यक्ति।
  • आवेदक की आयु 18 से 75 वर्ष के बीच होनी चाहिए।

आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज

KCC आवेदन के दौरान निम्न दस्तावेजों की आवश्यकता पड़ती है:

दस्तावेजविवरण
पहचान पत्रआधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी या ड्राइविंग लाइसेंस
भूमि दस्तावेजखसरा-खतौनी या किरायेदारी प्रमाण
बैंक खातापासबुक और बैंक स्टेटमेंट
फोटोपासपोर्ट साइज फोटो
फसल प्रमाणस्थानीय राजस्व अधिकारी द्वारा सत्यापित

ऑनलाइन आवेदन का तरीका

किसान घर बैठे भी किसान क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन कर सकते हैं।

स्टेप 1:

संबंधित बैंक की आधिकारिक वेबसाइट या मोबाइल ऐप पर जाएं।

स्टेप 2:

‘Agriculture Loan’ या ‘Kisan Credit Card’ विकल्प चुनें।

स्टेप 3:

आवेदन फॉर्म में व्यक्तिगत जानकारी, भूमि विवरण और फसल संबंधी जानकारी भरें।

स्टेप 4:

आधार कार्ड, भूमि दस्तावेज और अन्य जरूरी कागजात अपलोड करें।

स्टेप 5:

फॉर्म जमा करने के बाद प्राप्त आवेदन संख्या को सुरक्षित रखें। बैंक दस्तावेजों की जांच के बाद आगे की प्रक्रिया पूरी करेगा।

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ऑफलाइन आवेदन कैसे करें?

जो किसान ऑनलाइन आवेदन नहीं कर सकते, वे नजदीकी बैंक शाखा या कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर जाकर आवेदन कर सकते हैं।

बैंक से KCC फॉर्म प्राप्त कर उसे भरें, आवश्यक दस्तावेज संलग्न करें और शाखा में जमा कर दें। सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद सामान्यतः 7 से 14 कार्य दिवसों के भीतर किसान क्रेडिट कार्ड जारी कर दिया जाता है।

समय पर भुगतान से मिलेगा सबसे बड़ा फायदा

विशेषज्ञों के अनुसार किसान को फसल चक्र के अनुसार ही KCC ऋण राशि का उपयोग करना चाहिए और फसल बेचने के बाद निर्धारित अवधि के भीतर ऋण का भुगतान कर देना चाहिए। इससे वह ‘प्रॉम्प्ट रिपेयर’ श्रेणी में बना रहता है और उसे ब्याज सब्सिडी का पूरा लाभ मिलता है।

किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) योजना आज किसानों के लिए सस्ते और आसान ऋण का सबसे भरोसेमंद माध्यम बनकर उभरी है। ₹2 लाख तक बिना गारंटी ऋण, कम ब्याज दर और सरल आवेदन प्रक्रिया इसे छोटे एवं सीमांत किसानों के लिए बेहद उपयोगी बनाती है। समय पर भुगतान करने वाले किसान इस योजना के तहत केवल 4 प्रतिशत प्रभावी ब्याज दर पर वित्तीय सहायता प्राप्त कर सकते हैं, जिससे खेती की लागत कम करने और आय बढ़ाने में मदद मिलती है।

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