नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): खरीफ 2026 सीजन की तैयारियों के बीच देश में उर्वरकों की उपलब्धता को लेकर उठ रही चिंताओं पर केंद्र सरकार ने स्थिति स्पष्ट की है। रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय ने कहा है कि भारत की उर्वरक सुरक्षा फिलहाल मजबूत, स्थिर और सुव्यवस्थित बनी हुई है तथा किसानों की जरूरतों को पूरा करने के लिए सभी प्रमुख उर्वरकों का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है।
मंत्रालय के अनुसार, आगामी खरीफ 2026 सीजन के लिए कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने कुल उर्वरक आवश्यकता 390.54 लाख मीट्रिक टन आंकी है। इसके मुकाबले वर्तमान में देश में करीब 200.12 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का स्टॉक उपलब्ध है, जो अनुमानित आवश्यकता का लगभग 51 प्रतिशत है।
हालांकि सरकार ने उपलब्धता को संतोषजनक बताया है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होर्मुज जलडमरूमध्य से शिपिंग गतिविधियों में आई सीमाओं के कारण भविष्य की आपूर्ति को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बुवाई के चरम समय और उसके बाद की मांग को पूरा करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, क्योंकि भारत उर्वरकों के आयात पर काफी हद तक निर्भर करता है।
घरेलू उत्पादन और आयात से बढ़ी उपलब्धता
उर्वरक विभाग ने कहा कि हालिया वैश्विक संकट के बावजूद घरेलू उत्पादन और आयात के माध्यम से लगभग 117.6 लाख टन अतिरिक्त उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। सरकार ने विभिन्न उर्वरकों के उत्पादन और आयात के आंकड़े भी साझा किए हैं।
सबसे अधिक उत्पादन यूरिया का रहा। देश में 57.66 लाख टन यूरिया का घरेलू उत्पादन हुआ, जबकि 13.60 लाख टन यूरिया आयात कर भारतीय बंदरगाहों तक पहुंचाया गया। डीएपी (डाय-अमोनियम फॉस्फेट) का घरेलू उत्पादन 7.93 लाख टन रहा और 0.88 लाख टन का आयात किया गया।
इसी तरह एनपीके उर्वरकों का घरेलू उत्पादन 18.71 लाख टन दर्ज किया गया, जबकि 4.44 लाख टन आयात हुआ। एसएसपी (सिंगल सुपर फॉस्फेट) का उत्पादन 10.70 लाख टन रहा और इसका कोई आयात नहीं किया गया। वहीं एमओपी (म्यूरिएट ऑफ पोटाश) का घरेलू उत्पादन नहीं हुआ, लेकिन 3.68 लाख टन आयात किया गया।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, कुल घरेलू उत्पादन 95 लाख टन रहा, जबकि 22.60 लाख टन उर्वरक विभिन्न बंदरगाहों पर आयात के जरिए पहुंचे।
वैकल्पिक देशों से भी की गई व्यवस्था
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में जारी अनिश्चितताओं को देखते हुए वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों पर विशेष ध्यान दिया गया है। मंत्रालय के अनुसार, पीक खरीफ सीजन के दौरान किसी भी प्रकार की कमी से बचने के लिए भारत ने इस क्षेत्र से बाहर के देशों से अतिरिक्त उर्वरकों की व्यवस्था की है।
इसके तहत लगभग 13.5 लाख मीट्रिक टन डीएपी और 9 लाख मीट्रिक टन एनपीके (एएस सहित) की आपूर्ति सुनिश्चित की गई है। इन खेपों के मई और जून के दौरान भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचने की संभावना है। इससे खरीफ बुवाई के दौरान उर्वरकों की मांग को संतुलित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
कंपनियों को समय पर सब्सिडी भुगतान

उर्वरक विभाग ने उद्योगों की परिचालन क्षमता बनाए रखने के लिए सब्सिडी भुगतान व्यवस्था को भी मजबूत बताया है। मंत्रालय के अनुसार, कंपनियों द्वारा प्रस्तुत सभी सब्सिडी बिलों का भुगतान साप्ताहिक आधार पर लगातार किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर सब्सिडी भुगतान से कंपनियों की नकदी स्थिति बेहतर रहती है, जिससे उत्पादन और आयात प्रभावित नहीं होता। इससे बाजार में उर्वरकों की नियमित आपूर्ति बनाए रखने में सहायता मिलती है।
खरीफ 2026: किसानों के लिए राहत का संकेत
खरीफ सीजन 2026 देश की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। धान, मक्का, सोयाबीन, कपास और दालों जैसी प्रमुख फसलों की बुवाई इसी दौरान होती है। ऐसे में उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता किसानों के लिए राहत की खबर मानी जा रही है।
हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में किसी भी प्रकार की बाधा आने पर स्थिति तेजी से बदल सकती है। इसलिए सरकार और उर्वरक कंपनियों को आयात, उत्पादन और वितरण व्यवस्था पर लगातार नजर बनाए रखनी होगी।
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