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Hormuz Crisis: होर्मुज संकट से कच्चे तेल और एलपीजी आपूर्ति पर गहरा असर, वैश्विक ऊर्जा बाजार में बढ़ी चिंता: आईईए

नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): Hormuz Crisis: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को गंभीर संकट में डाल दिया है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) की ताजा “ऑयल मार्केट रिपोर्ट” के अनुसार मध्य-पूर्व से कच्चे तेल और एलपीजी की आपूर्ति में भारी गिरावट आई है, जिससे वैश्विक ईंधन बाजार में अस्थिरता और चिंता बढ़ गई है।

आईईए के मुताबिक युद्ध शुरू होने के बाद से वैश्विक तेल आपूर्ति में 1.28 करोड़ बैरल प्रतिदिन (mb/d) की कमी दर्ज की गई है। केवल अप्रैल महीने में ही वैश्विक तेल आपूर्ति में 18 लाख बैरल प्रतिदिन की अतिरिक्त गिरावट आई, जिसके बाद कुल आपूर्ति घटकर 9.51 करोड़ बैरल प्रतिदिन रह गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद रहने से संकट और अधिक गहरा गया है।

Hormuz Crisis पर जारी रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी के बाद से खाड़ी क्षेत्र से कच्चे तेल और कंडेनसेट की लोडिंग लगभग एक करोड़ बैरल प्रतिदिन घट गई है। इसका सबसे अधिक असर एशिया-प्रशांत क्षेत्र के आयातक देशों पर पड़ा है, जिन्हें अब वैकल्पिक स्रोतों से आपूर्ति सुनिश्चित करनी पड़ रही है।

हालांकि अमेरिका, ब्राजील, वेनेजुएला और कुछ अफ्रीकी ओपेक+ देशों ने उत्पादन बढ़ाने की कोशिश की है, लेकिन आईईए का कहना है कि यह वृद्धि मध्य-पूर्व में आई भारी कमी की भरपाई के लिए पर्याप्त नहीं है।

एलपीजी बाजार में स्थिति और अधिक गंभीर बनी हुई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए मध्य-पूर्व से होने वाले एलपीजी निर्यात में तेज गिरावट के कारण वैश्विक प्रोपेन और ब्यूटेन बाजार पर भारी दबाव पैदा हो गया है।

Hormuz Crisis
Hormuz Crisis के चलते आपूर्ति घटी

Hormuz Crisis: पर आईईए ने क्या कहा?

आईईए के अनुसार वर्ष 2025 में खाड़ी देश प्रतिदिन लगभग 15 लाख बैरल एलपीजी एशियाई बाजारों को निर्यात कर रहे थे, लेकिन अप्रैल में यह आपूर्ति घटकर केवल 2.7 लाख बैरल प्रतिदिन रह गई। इसमें भी अधिकांश हिस्सा ईरान से आया। सऊदी अरब के यनबू बंदरगाह से अतिरिक्त आपूर्ति बढ़ाने की कोशिशों के बावजूद वैश्विक बाजार में करीब 10 लाख बैरल प्रतिदिन की कमी बनी हुई है।

इस संकट के बीच अमेरिका सबसे बड़ा वैकल्पिक एलपीजी आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा है। अमेरिकी एलपीजी निर्यात में 4.5 लाख बैरल प्रतिदिन की वृद्धि दर्ज की गई, जिससे उसका कुल निर्यात बढ़कर 27 लाख बैरल प्रतिदिन पहुंच गया। यह वैश्विक समुद्री एलपीजी आपूर्ति का लगभग 69 प्रतिशत हिस्सा है।

आईईए ने कहा कि अमेरिका में मजबूत घरेलू उत्पादन के कारण वहां के भंडार पर अधिक दबाव नहीं पड़ा है, लेकिन वैश्विक लॉजिस्टिक और बुनियादी ढांचे की सीमाओं के चलते मध्य-पूर्व की कमी की पूरी भरपाई अब भी संभव नहीं हो पा रही है।

रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि प्लास्टिक और फाइबर जैसे पेट्रोकेमिकल उत्पादों की कमी आने वाले समय में विनिर्माण, कृषि और निर्माण क्षेत्रों को प्रभावित कर सकती है। वैश्विक भंडार लगातार घट रहे हैं और रिफाइनरियों पर परिचालन दबाव बढ़ता जा रहा है।

भारत को उन देशों में शामिल किया गया है जो एलपीजी संकट से सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। आईईए के मुताबिक अप्रैल में भारत का एलपीजी आयात जनवरी-फरवरी की तुलना में 40 प्रतिशत से अधिक घट गया, जबकि अमेरिका से आयात में वृद्धि हुई।

भारत में एलपीजी का सबसे बड़ा उपयोग घरेलू और व्यावसायिक खाना पकाने में होता है। ऐसे में आपूर्ति में कमी का असर सीधे उपभोक्ताओं पर दिखाई देने लगा है। रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल में भारत की एलपीजी मांग में 16 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

आईईए ने चेतावनी दी है कि यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है तो एशिया और अफ्रीका के अन्य देशों में भी रसोई गैस संकट गहरा सकता है, क्योंकि एलपीजी दुनिया में सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाला खाना पकाने का ईंधन है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि फिलहाल एशियाई देशों द्वारा कच्चे तेल के आयात में कटौती और वैश्विक भंडार से रिकॉर्ड स्तर पर तेल निकासी ने कीमतों पर दबाव को कुछ हद तक नियंत्रित रखा है। लेकिन जैसे-जैसे भंडार घटेंगे, वैश्विक ऊर्जा संकट और गहरा सकता है।

आईईए का अनुमान है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जून की शुरुआत तक प्रभावी रूप से बंद रह सकता है। इसके बाद भी समुद्री मार्गों से बारूदी सुरंग हटाने और बुनियादी ढांचे की मरम्मत के कारण व्यापार और निर्यात व्यवस्था सामान्य होने में दो से तीन महीने का समय लग सकता है।

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