WPI Inflation: ईंधन बना महंगाई का मुख्य इंजन
नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): WPI Inflation: भारत में महंगाई का दबाव एक बार फिर बढ़ता दिख रहा है। मार्च 2026 में थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई दर बढ़कर 3.88% पर पहुंच गई, जो तीन साल से अधिक समय का उच्चतम स्तर है। यह उछाल मुख्य रूप से पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस और मैन्युफैक्चरिंग लागत में वृद्धि के कारण आया है।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, फरवरी में यह दर 2.13% और जनवरी में 1.68% थी। लगातार छह महीनों से थोक महंगाई में बढ़ोतरी का यह ट्रेंड अब स्पष्ट रूप से दिखने लगा है।
कीमतों का दबाव: कहां से आ रही है तेजी?
महंगाई में इस उछाल की सबसे बड़ी वजह ऊर्जा लागत है। ईंधन और बिजली से जुड़े इनपुट महंगे होने से उत्पादन लागत बढ़ी, जिसका असर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर पड़ा। मार्च में मैन्युफैक्चर्ड उत्पादों की महंगाई 3.39% दर्ज की गई।
वहीं प्राथमिक वस्तुओं की महंगाई तेज़ी से बढ़कर 6.36% तक पहुंच गई, जो फरवरी में 3.27% थी। यह संकेत देता है कि कच्चे माल और कृषि उत्पादों की लागत में भी दबाव बना हुआ है।
खाद्य महंगाई: राहत और दबाव साथ-साथ
खाद्य वस्तुओं की बात करें तो तस्वीर मिश्रित है। एक ओर अनाज, दाल और कुछ सब्जियों की कीमतों में गिरावट ने राहत दी, वहीं दूध, फल और प्रोटीन आधारित खाद्य पदार्थों में बढ़ोतरी ने महंगाई को ऊपर बनाए रखा।
- गेहूं की कीमतों में 4.6% गिरावट
- दालें 5.17% सस्ती
- प्याज 42.11% और आलू 27.94% तक सस्ते
- वहीं फल 2.11%, दूध 2.62% और अंडे-मांस 6.63% महंगे
सब्जियों की कुल कीमतों में भी हल्की 1.45% की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो संकेत देती है कि खाद्य महंगाई पूरी तरह नियंत्रित नहीं है।
WPI Inflation: छह महीने से लगातार बढ़ रही महंगाई
थोक महंगाई का ट्रेंड पिछले छह महीनों में लगातार ऊपर की ओर रहा है। अक्टूबर 2025 में थोक महंगाई दर -1.02% थी, जो नवंबर में बढ़कर -0.13% हो गई। इसके बाद दिसंबर 2025 में यह सकारात्मक क्षेत्र में आते हुए 0.96% पर पहुंची। नए साल की शुरुआत के साथ जनवरी 2026 में महंगाई और बढ़कर 1.68% हो गई, जबकि फरवरी में यह 2.13% तक पहुंची।
मार्च 2026 में इस बढ़ते रुझान ने और गति पकड़ी और थोक महंगाई दर 3.88% के स्तर पर पहुंच गई, जो पिछले तीन वर्षों का उच्चतम स्तर है। यह बताता है कि अर्थव्यवस्था में लागत दबाव धीरे-धीरे बढ़ता गया है, जो अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।
WPI Inflation: उपभोक्ता महंगाई और नीति संकेत

थोक महंगाई के मुकाबले खुदरा महंगाई (CPI) मार्च में 3.40% रही, जो अपेक्षाकृत नियंत्रित है। हालांकि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए औसत महंगाई 4.6% रहने का अनुमान जताया है।
यह संकेत देता है कि आने वाले महीनों में महंगाई का दबाव बना रह सकता है, खासकर अगर वैश्विक ऊर्जा कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं।
बड़ा संकेत: लागत से मांग तक असर
थोक महंगाई में बढ़ोतरी का असर धीरे-धीरे खुदरा कीमतों पर भी पड़ सकता है। यदि उत्पादन लागत लगातार बढ़ती रही, तो कंपनियां इसका बोझ उपभोक्ताओं पर डाल सकती हैं। इसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा और आर्थिक वृद्धि पर भी दबाव आ सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, महंगाई की दिशा अब काफी हद तक वैश्विक ऊर्जा बाजार और घरेलू सप्लाई स्थिति पर निर्भर करेगी। यदि कच्चे तेल और गैस की कीमतें स्थिर होती हैं, तो राहत मिल सकती है। अन्यथा, आने वाले महीनों में महंगाई और बढ़ने का जोखिम बना रहेगा।
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