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हिमाचल प्रदेश: धर्मशाला में जायका सहायता प्राप्त कृषि परियोजनाओं की प्रथम राष्ट्रीय कार्यशाला शुरू, कृषि मंत्री ने किया शुभारंभ

रिपोर्ट: बिचित्र शर्मा

धर्मशाला, 25 फरवरी (कृषि भूमि ब्यूरो): जिला कांगड़ा मुख्यालय धर्मशाला में हिमाचल प्रदेश फसल विविधीकरण प्रोत्साहन परियोजना के तहत ‘सतत कृषि एवं कृषि-व्यवसाय विकास’ विषय पर जायका सहायता प्राप्त कृषि परियोजनाओं की प्रथम राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ मंगलवार को हुआ। तीन दिवसीय इस कार्यशाला का उद्घाटन कृषि मंत्री प्रो. चंद्र कुमार ने मुख्यातिथि के रूप में किया।

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री ने कहा कि योजना के पहले चरण में ग्रामीण क्षेत्रों में कई समूहों का गठन किया गया है। दूसरे चरण में इस योजना को और अधिक गांवों तक विस्तारित करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि खेतीबाड़ी न केवल हिमाचल प्रदेश बल्कि पूरे देश की आर्थिकी की रीढ़ है और इसमें नवाचार व सहयोग की बड़ी भूमिका है।

जायका सहयोग से संचालित परियोजना

हिमाचल प्रदेश फसल विविधीकरण प्रोत्साहन परियोजना का द्वितीय चरण 1,010 करोड़ रुपये की लागत से जापान अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (जायका) के सहयोग से जुलाई 2021 से 2029 तक संचालित किया जा रहा है। यह परियोजना अपनी आधी अवधि पूर्ण कर चुकी है। इसके अंतर्गत सिंचाई, फसल विविधीकरण और कृषि-व्यवसाय विकास पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

परियोजना के प्रमुख लक्ष्य

विवरणलक्ष्य / उपलब्धि
कुल उप-परियोजनाएं296
सिंचाई क्षेत्र8,000 हेक्टेयर से अधिक
लाभान्वित परिवारलगभग 30,000
फसल विविधीकरण क्षेत्रकरीब 7,000 हेक्टेयर
प्रथम चरण में व्यय321 करोड़ रुपये

पारंपरिक सिंचाई प्रणालियों पर जोर

कृषि मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि हिमाचल प्रदेश में सदियों से कूहल (पारंपरिक जलधाराएं) सिंचाई का मुख्य साधन रही हैं, लेकिन समय के साथ उनकी स्थिति बिगड़ गई है। उन्होंने लोगों की सहभागिता से इन पारंपरिक प्रणालियों को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

देशभर से 300 से अधिक विशेषज्ञ शामिल

इस राष्ट्रीय कार्यशाला में देशभर से 300 से अधिक विशेषज्ञ और प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। प्रतिभागियों में भारत सरकार और हिमाचल प्रदेश सरकार के अधिकारी, विभिन्न जायका सहायता प्राप्त परियोजनाओं के प्रतिनिधि, किसान उत्पादक संगठन, सफल कृषि उद्यमी, एग्री-टेक नवप्रवर्तक और प्रगतिशील किसान शामिल हैं। कार्यशाला के माध्यम से सतत कृषि और कृषि-व्यवसाय विकास के नए आयामों पर मंथन किया जाएगा।

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