हिमाचल: किसान समूह और FPO बनाकर सार्वजनिक कृषि-मंडीकरण नेटवर्क से जुड़ें – कृषि सचिव

रिपोर्ट: बिचित्र शर्मा

धर्मशाला, 26 फरवरी (कृषि भूमि ब्यूरो): कृषि सचिव डॉ. सी. पॉलरसु ने किसान समूहों, कॉमन इंटरेस्ट ग्रुप (CIG) और किसान उत्पादक संगठनों (FPO) के गठन को समय की आवश्यकता बताते हुए कहा कि इन्हें सार्वजनिक क्षेत्र के कृषि-व्यवसाय और मंडीकरण नेटवर्क से जोड़ना बेहद जरूरी है। इससे किसानों की बाजार तक पहुंच मजबूत होगी और वे बेहतर कीमत हासिल कर सकेंगे।

वे धर्मशाला में आयोजित जेआईसीए सहायतित कृषि परियोजनाओं की प्रथम राष्ट्रीय कार्यशाला के दौरान “सतत मूल्य श्रृंखलाओं का निर्माण और समावेशी बाजार पहुंच” विषय पर आयोजित तकनीकी सत्र की अध्यक्षता कर रहे थे।

FPO से किसानों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी

तकनीकी सत्र में सह्याद्री फार्म्स के विलास शिंदे ने बताया कि FPO और सहकारी समितियों जैसे समेकन मॉडल किसानों को राष्ट्रीय और वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धी बनाते हैं। वहीं हार्वेस्टिंग फार्मर्स नेटवर्क के Harvesting Farmers Network के रुचित जी. गर्ग ने संरचित कृषि-मूल्य श्रृंखलाओं और क्लस्टर आधारित विपणन दृष्टिकोण के महत्व को रेखांकित किया।

उन्होंने बताया कि एचएफएन ने हिमाचल प्रदेश जेआईसीए कृषि परियोजना के तहत कांगड़ा जिले के चेतडू में एचपी फार्मर्स कंसोर्टियम के गठन में सहयोग दिया है, जिससे किसानों को संगठित विपणन का लाभ मिल रहा है।

सतत कृषि और नवाचार पर मंथन

कार्यशाला के अन्य तकनीकी सत्रों में संसाधन-कुशल कृषि पद्धतियां, जलवायु-अनुकूल खेती, प्रौद्योगिकी और नवाचार, सतत कृषि में पीपीपी मॉडल तथा कृषि-व्यवसाय स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने जैसे विषयों पर चर्चा हुई। इन सत्रों में एम2लाबो, ईकी फार्म्स, जाइडेक्स और मैनेज जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए।

सोमवार दोपहर से मंगलवार तक कुल पांच तकनीकी सत्र आयोजित किए जा चुके हैं, जिनमें देशभर से आए विशेषज्ञों ने भाग लिया।

300 से अधिक विशेषज्ञों की भागीदारी

परियोजना निदेशक डॉ. सुनील चौहान ने बताया कि “सतत कृषि और कृषि-व्यवसाय विकास” विषय पर यह प्रथम राष्ट्रीय कार्यशाला 24 से 26 फरवरी तक धर्मशाला में आयोजित की जा रही है। इसका आयोजन हिमाचल प्रदेश जेआईसीए कृषि परियोजना द्वारा किया गया है।

कार्यशाला का उद्घाटन कृषि मंत्री प्रो. चंद्र कुमार ने किया। इस अवसर पर जायका-इंडिया के मुख्य प्रतिनिधि ताकेउची ताकुरो और हिमाचल प्रदेश विधानसभा के उप मुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया भी उपस्थित रहे।

डॉ. चौहान के अनुसार, इस कार्यशाला में देशभर से 300 से अधिक विशेषज्ञ और प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं, जिनमें केंद्र व राज्य सरकार के अधिकारी, विभिन्न जेआईसीए परियोजनाओं के प्रतिनिधि, FPO, सफल कृषि उद्यमी, एग्री-टेक नवप्रवर्तक और प्रगतिशील किसान शामिल हैं।

कार्यशाला के माध्यम से यह संदेश स्पष्ट रूप से सामने आया है कि संगठित किसान समूह, मजबूत मूल्य श्रृंखलाएं और सार्वजनिक-निजी साझेदारी ही सतत कृषि और समावेशी विकास की दिशा में सबसे प्रभावी रास्ता हैं।

===
हमारे लेटेस्ट अपडेट्स और खास जानकारियों के लिए अभी जुड़ें — बस इस लिंक पर क्लिक करें:
https://whatsapp.com/channel/0029Vb0T9JQ29759LPXk1C45

शेयर :

Facebook
Twitter
LinkedIn
WhatsApp

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हमारे न्यूज़लेटर की सदस्यता लें

ताज़ा न्यूज़

विज्ञापन

विशेष न्यूज़

Stay with us!

Subscribe to our newsletter and get notification to stay update.

राज्यों की सूची

SL888