मुंबई, 08 दिसंबर (कृषि भूमि ब्यूरो): USDA (यूएस डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर) की ताज़ा रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि भारत का 2025/26 मार्केटिंग ईयर में कुल वेजिटेबल ऑयल उत्पादन लगभग 9.7 मिलियन टन रहेगा। यह पिछले साल के स्तर के करीब है, यानी इस बार तेल उत्पादन में अधिकांश तौर पर उत्पादन वृद्धि नहीं होगी, बल्कि स्थिरता बनी रहने की संभावना है।
यूएसडीए की इस रिपोर्ट में यह बात भी उजागर हुई है कि सोयाबीन तेल बीज (oilseed) क्षेत्र 2025/26 में चुनौतियों का सामना कर रहा है — उत्पादन में गिरावट और सुस्त क्रशिंग गतिविधियां मुख्य कारण हैं।
सोयाबीन क्रशिंग में गिरावट – सप्लाई पर असर
इस रिपोर्ट के अनुसार, इस वर्ष सोयाबीन के रकबे और पैदावार दोनों में कमी देखी गई है, जिसके कारण तेल बीज उत्पादन घट कर अनुमानित 10.7 MMT रह गया है। इसके चलते सोयाबीन तेल (soybean oil) की क्रशिंग भी कम होगी। USDA ने सोयाबीन ऑइल मील का अनुमान घटाया है, जिससे पशु खाध्य (feed) उद्योग व अन्य उपयोगों के लिए मील की सप्लाई दबाव में आ सकती है। चूंकि सोयाबीन तेल और मील दोनों का उत्पादन कम हो रहा है, देश में वनीकरण तेल (edible oil) की कुल घरेलू उत्पादन छह मिलियन टन (या उससे कम) रहने का अनुमान है — जिससे मांग पूरी करना मुश्किल हो सकता है।
आयात बढ़ने की संभावना- सप्लाई संतुलन बनाए रखने का रास्ता
USDA की रिपोर्ट में कहा गया है कि घरेलू उत्पादन स्थिर रहने के बावजूद, भारत की तेल मांग तेजी से बढ़ रही है। इस मांग को पूरा करने के लिए आयात पर निर्भरता बढ़नी तय है। विशेष रूप से, पाम ऑइल और अन्य वैकल्पिक तेलों का आयात बढ़ सकता है, ताकि घरेलू कमी को पूरा किया जा सके।
दरअसल, इस सीज़न की शुरुआत में आयात में तेजी दिखाई दे रही है – सितंबर 2025 में खाद्य व अन्य वनस्पति तेलों का आयात पिछले साल की तुलना में 51% अधिक रहा।
उद्योग व उपभोक्ता पर असर
वेजिटेबल ऑयल उत्पादन और सप्लाई में कमी का असर कई पक्षों पर पड़ेगा:
- खाद्य तेल कंपनियों और रिफाइनरी उद्योग के लिए कच्चे माल की उपलब्धता सीमित होगी, जिससे कीमतों पर दबाव हो सकता है।
- पोल्ट्री, डेयरी और पशु चारा उद्योग, जो सोयाबीन मील पर निर्भर करते हैं, चारा लागत बढ़ने की चुनौतियों का सामना कर सकते हैं।
- उपभोक्ताओं तक तेल की आपूर्ति और कीमतों में अस्थिरता देखने को मिल सकती है, खासकर यदि आयात व आपूर्ति चैनल व्यवस्थित न रहे।
सरकारी नीति और नियामक बदलाव
इसी बीच, सरकार ने 2025 में नया VOPPA 2025 (Vegetable Oil Products Production and Availability Regulation Order) लागू किया है, जिसका उद्देश्य वनस्पति तेलों की उत्पादन, आपूर्ति और स्टॉक एवं डेटा-रिपोर्टिंग को अधिक पारदर्शी बनाना है।
इस कदम से तेल उद्योग में डेटा-आधारित मॉनिटरिंग, इम्पोर्ट–एक्सपोर्ट रफ्तार और स्थानीय उत्पादन-आपूर्ति संतुलन पर बेहतर नियंत्रण संभव होगा। इससे तेल की कमी या कीमतों में अचानक उछाल की संभावना को थोड़ा कम किया जा सकता है।
कुलमिलाकर, USDA की ताज़ा रिपोर्ट बताती है कि 2025/26 में भारत का वेजिटेबल ऑयल उत्पादन लगभग स्थिर रहेगा, लेकिन सोयाबीन क्रशिंग में कमी और तेल बीज उत्पादन में गिरावट सप्लाई पर दबाव बनाए रखेगी। इसलिए, तेल कंपनियों, रिफाइनरियों और उपभोक्ताओं को इन बदलावों के अनुरूप तैयारी करनी होगी। आयात निर्भरता बढ़ेगी, और स्थानीय उत्पादन-निर्यात संतुलन, नीति-नियमन तथा सप्लाई चेन मैनेजमेंट पर जोर देना होगा।
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