India–Russia Fertilizer Mega Deal: रूस में लगेगा 20 लाख टन क्षमता वाला यूरिया प्लांट

नई दिल्ली, 08 दिसंबर (कृषि भूमि ब्यूरो): उर्वरक क्षेत्र में भारत और रूस के बीच अब तक के सबसे बड़े समझौतों में से एक को अंतिम रूप दिया गया है। राष्ट्रीय केमिकल्स ऐंड फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (RCF), नैशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (NFL) और इंडियन पोटाश लिमिटेड (IPL) ने रूस के यूरालकेम समूह के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के तहत रूस में 18 से 20 लाख टन प्रतिवर्ष क्षमता वाला यूरिया संयंत्र स्थापित किया जाएगा।

यह समझौता रूसी राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन की भारत यात्रा के दौरान हुआ और इसे भारतीय उर्वरक कंपनियों के विदेशी साझेदारों के साथ अब तक के सबसे बड़े संयुक्त उपक्रमों में से एक माना जा रहा है। इससे पहले ओमान में ओमान इंडिया फर्टिलाइजर लिमिटेड (OMIFCO) इस श्रेणी में सबसे बड़ा उपक्रम था जिसकी क्षमता लगभग 16.5 लाख टन थी।

यूरालकेम समूह: वैश्विक उर्वरक उद्योग का दिग्गज खिलाड़ी

यूरालकेम जेएससी, यूरालकेम समूह का हिस्सा है—यह समूह दुनिया में नाइट्रोजन और कंपाउंड फर्टिलाइजर्स के सबसे बड़े उत्पादकों और निर्यातकों में शामिल है। इसके संयंत्र रूस के कालिनिनग्राद, किरोव, मॉस्को और पर्म क्षेत्रों में स्थित हैं।

यूरालकेम, यूरालकाली पीजेएससी और टोज जेएससी समूह की मुख्य परिसंपत्तियां हैं जिनकी कुल संयुक्त उत्पादन क्षमता लगभग 2.5 करोड़ टन है। समूह में करीब 38,000 कर्मचारी कार्यरत हैं।

संयंत्र को अमोनिया आपूर्ति और वित्तीय ढांचा

सरकारी वक्तव्य के अनुसार रूस में बनने वाले नए यूरिया संयंत्र को अमोनिया की आपूर्ति टोज जेएससी द्वारा की जाएगी। भारतीय कंपनियां संयंत्र के वाणिज्यिक उत्पादन शुरू होने तक परियोजना को वित्तीय सहायता प्रदान करेंगी।

तकनीकी मानक और वित्तीय व्यवहार्यता का परीक्षण जारी है, जबकि संयुक्त उपक्रम के कॉर्पोरेट ढांचे और संचालन संबंधी पहलुओं पर भी बातचीत हो रही है।

भारत के लिए रणनीतिक महत्व

यूरालकेम के CEO दिमित्री कोन्यायेव ने कहा कि भारत दुनिया की प्रमुख कृषि अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और खनिज उर्वरकों का बड़ा उपभोक्ता है। उनके अनुसार भारत यूरालकेम के लिए परंपरागत रूप से एक रणनीतिक बाजार रहा है, और कंपनी भारतीय साझेदारों के साथ सहयोग को और मजबूत करना चाहती है।

पुतिन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी संयुक्त वक्तव्य में उर्वरक आपूर्ति की दीर्घकालिक सुरक्षा पर जोर दिया और इस क्षेत्र में संयुक्त उपक्रमों को बढ़ावा देने का स्वागत किया।

रूस से भारत के उर्वरक आयात में तेज वृद्धि

संयुक्त उपक्रम के अलावा, आंकड़े दिखाते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में रूस भारत का एक प्रमुख उर्वरक आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा है।
2017-18 से 2023-24 के बीच भारत का रूसी यूरिया आयात 62.31% की वार्षिक औसत वृद्धि दर (CAGR) से बढ़ा है। इसी अवधि में DAP,

NPKS और अन्य उत्पादों का कुल आयात भी लगभग 22.01% CAGR की दर से बढ़ा। भारत के कुल उर्वरक आयात में रूस की हिस्सेदारी 2017-18 के 7.68% से बढ़कर 2023-24 में लगभग 27% तक पहुंच गई।

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