दिल्ली, 26 नवंबर (कृषि भूमि ब्यूरो): शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) ने ग्लोबल कार्बन काउंसिल (GCC) के साथ एक महत्वपूर्ण करार किया है। दोनों संस्थाओं के बीच हुए इस मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग (MoU) का उद्देश्य भारत की वैश्विक कार्बन मार्केट में भागीदारी को मजबूत बनाना है। इस पार्टनरशिप के बाद भारत की बायोफ्यूल और शुगर इंडस्ट्री को वैश्विक कार्बन क्रेडिट प्लेटफॉर्म पर पहचान और अवसर मिलेंगे।
भारत की कार्बन मार्केट में बढ़ेगी पकड़
ISMA और GCC मिलकर देश में कार्बन मार्केट की समझ बढ़ाने पर काम करेंगे। इसके लिए संयुक्त वेबिनार, वर्कशॉप और ट्रेनिंग सेशन आयोजित किए जाएंगे। इन सत्रों का फोकस GCC स्टैंडर्ड्स, कार्बन अकाउंटिंग सिस्टम और भारत की प्रोसेस कंडीशंस के हिसाब से बायोफ्यूल-विशिष्ट मेथडोलॉजी विकसित करने पर रहेगा।
इस साझेदारी से भारत की कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम (CCTS) को गति मिलेगी। GCC और ISMA मिलकर GCC कार्बन क्रेडिट को भारत में मान्यता दिलाने और संबंधित प्रोजेक्ट्स के लिए होस्ट कंट्री लेटर ऑफ़ ऑथराइज़ेशन (HCLOA) हासिल करने में मदद करेंगे।
ISMA के महानिदेशक दीपक बल्लानी के अनुसार भारतीय शुगर इंडस्ट्री अक्सर प्राइस प्रेशर में रहती है। GCC के साथ यह करार उद्योगों को कार्बन क्रेडिट अवसरों का फायदा देगा। उन्होंने बताया कि भारतीय एथेनॉल का कार्बन इंडेक्स दुनिया में सबसे कम है और सरकार जल्द ही SAF (सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल) का रोडमैप जारी करेगी।
चीनी उत्पादन और एथेनॉल डाइवर्जन का ताज़ा अनुमान
ISMA ने चीनी उत्पादन को लेकर नया अनुमान साझा किया है, जिसके अनुसार कुल उत्पादन 343.5 लाख टन रहने की संभावना है। एथेनॉल डाइवर्जन 34 लाख टन और घरेलू खपत 309.5 लाख टन आंकी गई है।
एथेनॉल डाइवर्जन के बाद मार्केटिंग सीजन 2024–25 के लिए कुल उत्पादन 261.08 लाख टन, जबकि 2025–26 के लिए यह बढ़कर 309.50 लाख टन होने का अनुमान है।
देश में गन्ने की बुआई भी मामूली बढ़ोतरी के साथ 2024–25 के 57.11 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 2025–26 में 57.35 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई है।
सरकार चीनी की MSP बढ़ाने पर दे सकती है हरी झंडी
इसी बीच, सूत्रों के हवाले से जानकारी मिली है कि केंद्र सरकार चीनी की MSP में लगभग 23% बढ़ोतरी को मंजूरी दे सकती है। इसके साथ ही गन्ने-आधारित फीडस्टॉक के लिए एथेनॉल प्रोक्योरमेंट प्राइस बढ़ाने पर भी विचार किया जा रहा है।
यह निर्णय सरकार द्वारा 2025–26 सीज़न के लिए 1.5 मिलियन टन चीनी के निर्यात को मंजूरी देने के बाद लिया जा सकता है।
गौरतलब है कि चीनी की MSP वर्ष 2019 से अपरिवर्तित है। 2018–19 में MSP 31 रुपये प्रति किलो निर्धारित की गई थी। शुगर मिलें लंबे समय से बढ़ती उत्पादन लागत का हवाला देते हुए MSP वृद्धि की मांग कर रही हैं। MSP में बढ़ोतरी से मिलों की लिक्विडिटी सुधरेगी और किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करना आसान हो जाएगा।
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