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मुंबई, 21 नवंबर (कृषि भूमि ब्यूरो): भारत में डिजिटल भुगतान तेजी से बढ़ रहा है, खासकर किसानों, मंडी ट्रेडर्स, आढ़तियों और एग्रो-डीलरों के बीच। इसी का फायदा उठाते हुए धोखेबाज अब फर्जी बैंकिंग ऐप्स बनाकर लोगों के पैसे और डेटा पर हमला कर रहे हैं। ये ऐप असली बैंक ऐप जैसे दिखते हैं—लोगो, रंग और नाम तक बिल्कुल मिलते-जुलते। कई बार तो ये ऐप गूगल प्ले स्टोर या ऐपल स्टोर पर भी दिख जाते हैं, जिससे सामान्य यूजर आसानी से धोखा खा जाता है।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि धोखेबाज सबसे ज्यादा उन लोगों को निशाना बनाते हैं जो मोबाइल बैंकिंग का इस्तेमाल करते हैं, अक्सर डिजिटल पेमेंट लेते-देते हैं, और ज्यादातर समय व्यस्त रहते हैं, जैसे कि किसान, व्यापारी और मंडी के ट्रेडर्स।

ट्रेडर्स और किसानों को क्यों निशाना बनाया जा रहा है?

  • कई किसान और व्यापारी रोजाना बड़ी रकम का लेन-देन करते हैं।
  • खेत, मंडी या बाजार में जल्दबाज़ी में ऐप इंस्टॉल करते समय चूक हो सकती है।
  • गांव-कस्बों के यूजर्स के मोबाइल में अक्सर सिक्योरिटी ऐप्स या एंटी-वायरस नहीं होते
  • डिजिटल बैंकिंग की नई-नई सुविधाओं के कारण भ्रम की स्थिति रहती है।

इसी वजह से ये वर्ग साइबर फ्रॉड का आसान शिकार बन रहा है।

कैसे पहचानें फर्जी बैंकिंग ऐप?

1. इंस्टॉल करने से पहले नाम पूरा पढ़ें
सही बैंक ऐप में पूरा बैंक नाम होता है: जैसे – HDFC Bank Ltd, State Bank of India, Punjab National Bank। फर्जी ऐप में छोटे-छोटे बदलाव होते हैं: HDFC Bank Pro, Online Bank Services, Secure Mobile Banking App. इसलिए सिर्फ आइकन देखकर इंस्टॉल न करें।

2. डाउनलोड की संख्या देखें
– असली बैंक ऐप: लाखों डाउनलोड
– फर्जी ऐप: सैकड़ों या कुछ हजार
– रिव्यू में गलत अंग्रेजी या एक जैसी कहानी—तो तुरंत सावधान!

3. लिंक से कभी भी ऐप डाउनलोड न करें
किसी भी किसान या व्यापारी को याद रखना चाहिए – बैंक WhatsApp, SMS या कॉल पर कभी भी कोई लिंक नहीं भेजता। अगर संदेश आए – “Fast version download करें”, “Blocked on Play Store”, “Special banking app for traders” –  तो यह 100% धोखाधड़ी है।

4. पब्लिशर का नाम जरूर चेक करें
असली बैंक ऐप का प्रकाशक (Publisher) हमेशा बैंक का असली नाम होता है। जैसे: State Bank of India, HDFC Bank Ltd। यदि नाम बदला हुआ दिखे – तो यह फर्जी है।

एग्रो-मार्केट पर असर: बैंकों और साइबर फ्रॉड रिपोर्ट्स के अनुसार किसान और मंडी ट्रेडर्स में डिजिटल फ्रॉड तेजी से बढ़ रहा है। लेन-देन अधिक होने से सारा पैसा कुछ सेकंड में साफ हो जाता है।

आरबीआई के अनुसार 2024 में डिजिटल फ्रॉड के मामलों में बड़ा उछाल दर्ज हुआ है, और ग्रामीण-सेमी अर्बन क्षेत्रों को विशेष सुरक्षा की जरूरत है।

अगर गलती से फर्जी ऐप इंस्टॉल हो जाए तो क्या करें?
1. तुरंत मोबाइल डेटा/वाइ-फाइ बंद करें।
2. बैंक को तुरंत फोन करें।
3. पासबुक/एप्प से तुरंत पासवर्ड बदलें।
4. साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें।
5. www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।

किसान और ट्रेडर्स अब डिजिटल बैंकिंग पर निर्भर हैं। पेमेंट लेना-देना आसान जरूर हुआ है, लेकिन खतरे भी बढ़ गए हैं। फर्जी ऐप की पहचान और थोड़ी-सी सावधानी हजारों-लाखों रुपये बचा सकती है।

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