[polylang_langswitcher]

किसानों को रुला रहा प्याज: थोक मंडी में ₹1 प्रति किलो का भाव, किसानों के नुकसान की भरपाई कौन करेगा?

मुंबई, 20 नवम्बर, 2025 (कृषि भूमि ब्यूरो): देशभर की थोक मंडियों में प्याज की कीमतों में आई भारी गिरावट ने एक बार फिर किसानों की कमर तोड़ दी है। महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात और राजस्थान जैसे प्रमुख प्याज उत्पादक राज्यों में किसानों को अपनी मेहनत का फल ₹100 से ₹500 प्रति क्विंटल (₹1 से ₹5 प्रति किलोग्राम) के अत्यंत कम दाम पर बेचना पड़ रहा है। यह स्थिति किसानों के लिए एक गंभीर आर्थिक संकट बन चुकी है।

मंडियों का हाल

महाराष्ट्र की सोलापुर, लोनंद, और नंदगांव जैसी मंडियों में न्यूनतम कीमत ₹100 प्रति क्विंटल दर्ज की गई है। यही हाल मध्य प्रदेश की मंडियों का भी है, जहां किसानों को ₹1 से ₹2 प्रति किलो के दाम पर प्याज बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

महाराष्‍ट्र की मंडियों में प्‍याज का भाव

मंडी का नामआवक (क्विंटल में)न्‍यूनतम कीमत (रु./क्विंटल)अध‍िकतम कीमत (रु./क्विंटल)औसत कीमत (रु./क्विंटल)
सोलापुर144271002300800
लोनंद15451001200800
कुर्दवाड़ी-मोड़निंब311001751800
मंगलवेधा15910018001000
सिन्‍नर-नायगांव36010016611400
राहुरी-वंबोरी664710020001100
नंदगांव43791001655850
गंगापुर335910016351056

सोर्स- महाराष्‍ट्र राज्‍य कृषि मार्केटिंग बोर्ड (MSAMB) (आंकड़े 17 नवंबर 2025 के हैं)

लागत से भी कम दाम

एक अनुमान के अनुसार, प्याज उगाने में किसानों को प्रति किलोग्राम ₹22 से ₹25 तक का खर्च आता है। इसमें बीज, खाद, सिंचाई, मजदूरी और फसल को मंडी तक पहुंचाने का भाड़ा भी शामिल होता है। इसके मुकाबले जब थोक मंडी में प्याज ₹1 से ₹5 प्रति किलो बिकता है, तो किसानों को अपनी लागत भी नहीं मिल पाती है। कई मामलों में तो मंडी तक उपज लाने का भाड़ा भी प्याज बेचकर नहीं निकल पाता है।

खेती की लागत और घाटे का गणित

प्याज उगाना एक लंबी और खर्चीली प्रक्रिया है। किसान संगठन और कृषि विभाग के अनुमान बताते हैं कि उच्च गुणवत्ता वाले प्याज का उत्पादन करने में प्रति किलोग्राम औसतन ₹22 से ₹25 तक का खर्च आता है।

मद (Item)अनुमानित लागत (प्रति क्विंटल)
बीज और पौध रोपण₹300 – ₹500
खाद और उर्वरक₹400 – ₹600
सिंचाई और बिजली₹300 – ₹450
निराई और मजदूरी₹700 – ₹900
मंडी तक ढुलाई (भाड़ा)₹200 – ₹300
कुल न्यूनतम लागतलगभग ₹2200 – ₹2500

इसके विपरीत, जब किसान मंडी में ₹100 से ₹500 प्रति क्विंटल का भाव पाता है, तो उसे प्रति क्विंटल ₹1700 से ₹2400 तक का सीधा नुकसान होता है। इस नुकसान को किसान “प्याज के आँसू” कह रहे हैं, क्योंकि यह घाटा उनके पूरे साल की मेहनत को मिट्टी में मिला देता है।

मंडियों में ‘बिकवाली का दबाव’

वर्तमान संकट का सबसे बड़ा कारण मंडियों में प्याज की अत्यधिक आवक (Supply) है। इस वर्ष कई क्षेत्रों में मौसम अनुकूल रहा, जिससे प्याज का उत्पादन पिछले वर्षों की तुलना में काफी बढ़ गया। जैसे ही किसानों ने एक साथ मंडी में माल लाना शुरू किया, वहां स्टॉक इतना बढ़ गया कि खरीदार कम पड़ गए।

एक किसान का दर्द: “जब मैं मंडी में 5 क्विंटल प्याज लेकर गया, तो व्यापारी ने ₹200 का भाव लगाया। मुझे अपनी पूरी फसल बेचकर सिर्फ ₹1000 मिले। मेरी मंडी तक आने-जाने का डीजल का खर्च ही ₹600 था। इससे अच्छा होता कि मैं उसे खेत में ही छोड़ आता।”

ज्यादातर किसानों के पास प्याज को 3-4 महीने से अधिक सुरक्षित रखने के लिए वैज्ञानिक कोल्ड स्टोरेज की व्यवस्था नहीं है। नमी, गर्मी और कीटों से बचाने के लिए उन्हें मजबूरन फसल कटते ही बेचनी पड़ती है। इस मजबूरी का फायदा थोक व्यापारी उठाते हैं और कीमतों को नीचे खींच लाते हैं।

प्याज की कीमतों में अस्थिरता का एक बड़ा कारण सरकारी नीतियां भी हैं। जब भी घरेलू बाजार में प्याज की कीमतें थोड़ी बढ़ने लगती हैं (मान लीजिए ₹30/किलो से ऊपर), तो सरकार तुरंत निर्यात पर प्रतिबंध लगा देती है या न्यूनतम निर्यात मूल्य (MEP) बहुत बढ़ा देती है।

  • असर: अचानक निर्यात बंद होने से विदेशी खरीदार हट जाते हैं। जो प्याज विदेश जाने वाला था, वह घरेलू बाजार में ही रुक जाता है।

  • परिणाम: सप्लाई बहुत बढ़ जाती है, जिससे कीमतें तेजी से गिरकर ₹1-₹5 प्रति किलो पर आ जाती हैं।

किसानों की मांग है कि सरकार को निर्यात नीति लंबी अवधि के लिए स्थिर रखनी चाहिए, ताकि वे यह अनुमान लगा सकें कि उन्हें अपनी फसल का उचित मूल्य कहां मिलेगा।

===

हमारे लेटेस्ट अपडेट्स और खास जानकारियों के लिए अभी जुड़ें — बस इस लिंक पर क्लिक करें:
https://whatsapp.com/channel/0029Vb0T9JQ29759LPXk1C45

शेयर :

Facebook
Twitter
LinkedIn
WhatsApp

संबंधित श्रेणी न्यूज़

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हमारे न्यूज़लेटर की सदस्यता लें

ताज़ा न्यूज़

विज्ञापन

विशेष न्यूज़

Stay with us!

Subscribe to our newsletter and get notification to stay update.

राज्यों की सूची