नई दिल्ली, 17 जनवरी (कृषि भूमि ब्यूरो)इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (ISMA) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 15 जनवरी तक पूरे भारत में चीनी उत्पादन में सालाना आधार पर 22 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस अवधि में कुल चीनी उत्पादन बढ़कर 159.09 लाख टन हो गया, जबकि पिछले साल इसी समय यह 130.44 लाख टन था।

ISMA ने अपनी प्रेस रिलीज़ में कहा कि चालू सीज़न में पेराई की रफ्तार बेहतर रही है, जिससे उत्पादन में यह उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली है। ISMA के मुताबिक, इस सीज़न में पेराई कर रही मिलों की संख्या बढ़कर 518 हो गई है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में 500 मिलें चालू थीं। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक देश के शीर्ष चीनी उत्पादक राज्यों के रूप में सामने आए हैं।

उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक का प्रदर्शन

उत्तर प्रदेश में जनवरी के मध्य तक चीनी उत्पादन 46.05 लाख टन दर्ज किया गया, जो पिछले साल की तुलना में करीब 8 प्रतिशत अधिक है। महाराष्ट्र में पेराई की रफ्तार सबसे तेज़ रही है, जहां चीनी उत्पादन सालाना आधार पर 51 प्रतिशत बढ़कर 64.5 लाख टन तक पहुंच गया है। फिलहाल राज्य में 204 चीनी मिलें चालू हैं, जबकि पिछले साल इसी समय 196 मिलें कार्यरत थीं।

कर्नाटक में भी पेराई में सुधार देखने को मिला है और यहां चीनी उत्पादन लगभग 13 प्रतिशत बढ़ा है।

राज्यचीनी उत्पादन (लाख टन)सालाना वृद्धि
उत्तर प्रदेश46.058%
महाराष्ट्र64.5051%
कर्नाटक~13%

गन्ने की कीमतों में बढ़ोतरी का असर

ISMA ने बताया कि उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, उत्तराखंड, पंजाब और हरियाणा सरकारों द्वारा गन्ने की कीमतें बढ़ाए जाने के बाद अब बिहार सरकार ने भी गन्ने की राज्य सलाहकार कीमत (SAP) में ₹15 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की है। इसके बाद बिहार में गन्ने की कीमत बढ़कर ₹380 प्रति क्विंटल हो गई है।

बढ़ती लागत से मिलों पर दबाव

ISMA ने आगाह किया कि गन्ने की कीमतों में बढ़ोतरी किसानों के लिए राहत जरूर है, लेकिन इससे चीनी मिलों पर वित्तीय दबाव बढ़ रहा है। संगठन के अनुसार, गन्ने और चीनी की बढ़ती उत्पादन लागत और मिल से मिलने वाली कम एक्स-मिल कीमतों के बीच अंतर लगातार बढ़ता जा रहा है।

फिलहाल महाराष्ट्र और कर्नाटक में एक्स-मिल चीनी की कीमतें गिरकर लगभग ₹3,550 प्रति क्विंटल रह गई हैं, जो मौजूदा उत्पादन लागत से काफी नीचे हैं। ISMA ने कहा कि जैसे-जैसे सीज़न आगे बढ़ रहा है, चीनी का स्टॉक बढ़ रहा है और इसके साथ ही गन्ना भुगतान का बकाया भी बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। अगर बाजार की मौजूदा स्थिति बनी रहती है, तो आने वाले समय में यह दबाव और बढ़ सकता है।

MSP में बदलाव की जरूरत पर जोर

ISMA का कहना है कि गन्ने की कीमतों और चीनी से होने वाली कमाई के बीच लगातार अंतर से उद्योग को ऑपरेशनल और कैश फ्लो से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। संगठन ने मांग की है कि बढ़ती उत्पादन लागत को देखते हुए चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य (MSP) में जल्द संशोधन किया जाए।

ISMA के अनुसार, MSP में बदलाव से उद्योग की वित्तीय स्थिति सुधरेगी, किसानों को समय पर गन्ने का भुगतान सुनिश्चित होगा और बाजार में स्थिरता बनी रहेगी, वह भी सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डाले बिना।

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