मुंबई, 01 अगस्त (कृषि भूमि ब्यूरो):
महाराष्ट्र सरकार (Maharashtra government) ने एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए मवेशी पालन (Cattle Rearing), डेयरी, पोल्ट्री और बकरी पालन जैसी गतिविधियों को अब ‘कृषि‘ की श्रेणी में शामिल कर लिया है। इस फैसले के तहत इन गतिविधियों से जुड़े किसानों और पशुपालकों को अब कृषि संबंधी सब्सिडी, ऋण, बीमा और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने का रास्ता साफ हो गया है।
क्या है यह फैसला?
इस निर्णय उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को विविध रूप देना और केवल फसल आधारित आय पर निर्भरता को कम करना है। अब पशुपालन से जुड़े व्यवसायों को वैधानिक रूप से खेती के समान दर्जा मिलेगा, जिससे:
- किसान बैंकों से कृषि ऋण प्राप्त कर सकेंगे
- प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना जैसी योजनाओं का लाभ मवेशी पालन के क्षेत्र में भी लागू हो सकेगा
- पशुपालक सौर पंप, चारा भंडारण, पशु शेड आदि के लिए सब्सिडी पा सकेंगे
- कृषि भूमि पर डेयरी या पोल्ट्री फार्म के लिए नियामकीय बाधाएं घटेंगी
किसानों के लिए क्या बदलेगा?
राज्य के लाखों छोटे और सीमांत किसान जो अब तक केवल फसल पर निर्भर थे, वे अब मिश्रित कृषि (Integrated Farming) की ओर बढ़ सकेंगे। इससे:
- आय के स्थायी स्रोत बनेंगे
- सूखे और जलवायु अनिश्चितता के जोखिम कम होंगे
- महिला किसानों और स्व-सहायता समूहों (SHGs) को लाभ मिलेगा, जो पारंपरिक रूप से डेयरी और बकरी पालन से जुड़ी रही हैं
ग्रामीण विकास से जुड़े लोगों का कहना है कि यह निर्णय महाराष्ट्र के लिए एक मील का पत्थर है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के नए द्वार खुलेंगे, खासकर उन इलाकों में जहां खेती अस्थिर है। सरकार को अब इस घोषणा को ज़मीनी स्तर पर लागू करने के लिए योजना, प्रशिक्षण और बाजार उपलब्धता पर तत्काल ध्यान देना होगा।”
हालांकि इस फैसले को व्यापक रूप से सराहा जा रहा है, लेकिन कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि संस्थागत ढांचे (बैंकों, पंचायतों, कृषि कार्यालयों) को इस बदलाव के अनुरूप प्रशिक्षित करना होगा, वास्तविक लाभार्थियों की पहचान सुनिश्चित करनी होगी और पशुपालन के लिए चिकित्सा, चारा, प्रशिक्षण जैसी बुनियादी सुविधाएं विस्तार के साथ उपलब्ध करानी होंगी।
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