मौसम संबंधी जोखिमों, एल नीनो की आशंका और ईरान युद्ध के कारण ऊर्जा व उर्वरक आपूर्ति प्रभावित होने से एशिया में चावल की कीमतों में मई के दौरान लगभग दो दशकों की सबसे बड़ी मासिक बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
केंद्र सरकार ने पांच महीने के लिए कॉटन आयात पर लगने वाले 11 प्रतिशत शुल्क को खत्म कर दिया है। उद्योग जगत ने फैसले का स्वागत किया है, जबकि किसानों को आशंका है कि इससे घरेलू बाजार में कपास की कीमतें प्रभावित हो सकती हैं।
महाराष्ट्र में 1 जून से कुछ क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना है, लेकिन मानसून अभी केरल तक नहीं पहुंचा है। राज्य के अधिकांश हिस्सों में 10 जून से पहले मानसून आने की संभावना कम बताई गई है। किसानों को बुवाई शुरू करने से पहले नियमित और पर्याप्त वर्षा का इंतजार करने की सलाह दी गई है।
US-ईरान के बीच संघर्ष विराम बढ़ाने की संभावनाओं ने वैश्विक तेल बाजार को राहत दी है। WTI और ब्रेंट क्रूड दोनों में गिरावट दर्ज की गई है और कीमतें छह सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंच गई हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि भू-राजनीतिक जोखिम अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं।