नई दिल्ली, 07 जनवरी (कृषि भूमि ब्यूरो): भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) ने केंद्र सरकार से आगामी बजट 2026-27 में कृषि क्षेत्र से जुड़े बड़े संरचनात्मक सुधारों की घोषणा करने की अपील की है। CII का कहना है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) आधारित खरीद पर अत्यधिक निर्भरता और पुराने भूमि सीमा कानून आज के समय में किसानों की आय बढ़ाने में बाधा बन रहे हैं। उद्योग निकाय ने सुझाव दिया है कि फसलों की खरीद बाजार-संचालित कीमतों पर की जाए और कृषि भूमि सीमा से जुड़े अप्रासंगिक कानूनों को समाप्त किया जाए।
बाजार आधारित मूल्य निर्धारण की जरूरत
CII के अनुसार, MSP प्रणाली ने कुछ हद तक किसानों को सुरक्षा दी है, लेकिन लंबे समय में इसने फसल विविधीकरण, नवाचार और टिकाऊ कृषि विकल्पों को हतोत्साहित किया है। संगठन ने कहा कि बाजार आधारित मूल्य निर्धारण से किसानों को मांग के अनुसार फसलें उगाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा और उनकी आय में स्थायी वृद्धि होगी।
भूमि सीमा कानून किसानों की आय में बाधक
CII ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भूमि सीमा कानून अब अपने उद्देश्य से भटक चुके हैं। अपने बयान में CII ने कहा, “ये कानून अतीत में भूमि पुनर्वितरण के लिए उपयोगी रहे होंगे, लेकिन आज ये सफल किसानों को अपनी जमीन बढ़ाने और आर्थिक रूप से आगे बढ़ने से रोकते हैं। भूमि स्वामित्व और पट्टे पर देने पर लगी रोक किसानों की आय वृद्धि में बड़ी बाधा है।”
उद्योग निकाय ने कहा कि कृषि क्षेत्र में स्टॉक सीमा, मूल्य नियंत्रण और निर्यात प्रतिबंध जैसी नीतियों के कारण बाजार में विकृतियां पैदा हो रही हैं, जिससे किसानों का कल्याण प्रभावित हो रहा है। CII ने सुझाव दिया कि स्टॉक सीमा और मूल्य नियंत्रण में संशोधन या चरणबद्ध समाप्ति की जाए, निर्यात नीतियों को स्थिर और पहले से सही अनुमान लगाने योग्य बनाया जाए और घरेलू महंगाई नियंत्रण को निर्यात प्रतिबंधों से अलग रखा जाए। CII के अनुसार, इससे वैश्विक बाजारों में भारत की विश्वसनीयता बढ़ेगी।
CII ने कहा कि जलवायु-लचीली फसलें, सटीक खेती, जैव प्रौद्योगिकी और पोस्ट-हार्वेस्ट समाधान जैसे क्षेत्रों में उत्पादकता बढ़ाने के लिए निजी निवेश बेहद जरूरी है। इसके लिए कृषि क्षेत्र में उच्च R&D निवेश, बौद्धिक संपदा अधिकारों (IPR) की मजबूत सुरक्षा और नियामक सुधारों को प्राथमिकता देने की जरूरत है।
नेशनल ग्रिड बनाने का सुझाव
CII ने सरकार को मार्केट इंटेलिजेंस और फसल योजना के लिए एक केंद्रीकृत राष्ट्रीय डेटाबेस स्थापित करने का सुझाव दिया है। इससे अधिक उत्पादन और कमी की समस्या से निपटा जा सकेगा। साथ ही किसानों को अनुमानित बाजार कीमतों के आधार पर सलाह दी जा सकेगी।
इसके अलावा, संगठन ने “वन इंडिया फूड ग्रिड” विकसित करने की सिफारिश की है, जो फार्म गेट्स को उपभोक्ता केंद्रों से जोड़ने वाला एक एकीकृत राष्ट्रीय खाद्य आपूर्ति नेटवर्क होगा।
CII ने एग्रीवोल्टेक्स (कृषि + सौर ऊर्जा) पर एक राष्ट्रीय मिशन शुरू करने की भी सिफारिश की है, ताकि इस इनोवेटिव प्रणाली को व्यापक स्तर पर अपनाया जा सके।
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