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बिहार के गुड़ उत्पादन में मिलेगी नई पहचान, पूसा को मिला सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का दर्जा

नई दिल्ली, 09 फरवरी (कृषि भूमि ब्यूरो): बिहार के गुड़ को मिलेगी नई पहचान – गुड़ उत्पादन को आधुनिक और व्यावसायिक रूप देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। गन्ना अनुसंधान केंद्र, पूसा को गुड़ उत्पादन के क्षेत्र में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जाएगा। इस पहल से बिहार में बनने वाला गुड़ केवल घरेलू खपत तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देशभर में एक प्रीमियम उत्पाद के रूप में अपनी पहचान बना सकेगा। बेहतर तकनीक, वैज्ञानिक प्रोसेसिंग और आधुनिक पैकेजिंग के जरिए गुड़ की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार की उम्मीद है।

केंद्र सरकार से 5.69 करोड़ रुपये की मंजूरी

इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए केंद्र सरकार ने कुल 5 करोड़ 69 लाख 65 हजार रुपये की राशि स्वीकृत की है। यह फंड पांच वर्षों की अवधि के लिए दिया जाएगा। योजना के पहले वर्ष के लिए ही 1 करोड़ 31 लाख 95 हजार रुपये जारी कर दिए गए हैं, जिससे शोध और आधारभूत संरचना से जुड़े कार्यों की शुरुआत तेज़ी से की जा सकेगी। इससे गन्ना और गुड़ से जुड़े अनुसंधान कार्यों को नई गति मिलेगी।

प्रीमियम क्वालिटी की ओर बढ़ेगा बिहार का गुड़

सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनने के बाद पूसा में गुड़ उत्पादन की अत्याधुनिक तकनीकों को विकसित और प्रसारित किया जाएगा। इसका सीधा लाभ यह होगा कि बिहार का गुड़ अधिक स्वच्छ, स्वाद में बेहतर और आकर्षक पैकेजिंग के साथ बाजार में उपलब्ध हो सकेगा। अभी तक गुणवत्ता में एकरूपता न होने के कारण किसानों को उचित मूल्य नहीं मिल पाता था, लेकिन नई व्यवस्था से यह समस्या काफी हद तक दूर हो सकती है।

गन्ना उद्योग मंत्री और प्रशासन की भूमिका

बिहार के गन्ना उद्योग मंत्री संजय कुमार ने कहा कि राज्य को गुड़ उत्पादन के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों की कतार में खड़ा करने के लिए यह कदम उठाया गया है। वहीं अपर मुख्य सचिव के. सेंथिल कुमार ने बताया कि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के माध्यम से वैज्ञानिक तरीकों को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे खराब गुणवत्ता वाले गुड़ की समस्या खत्म होगी और किसानों को सही तकनीकी जानकारी मिल सकेगी।

आधुनिक तकनीक, पैकेजिंग और स्टोरेज पर फोकस

इस योजना के तहत गुड़ निर्माण की आधुनिक मशीनें विकसित की जाएंगी, जिससे कम लागत और कम ऊर्जा में बेहतर गुणवत्ता का गुड़ तैयार किया जा सके। इसके साथ ही उन्नत पैकेजिंग और स्टोरेज तकनीक पर भी काम किया जाएगा, ताकि गुड़ को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सके और खराब होने की समस्या न आए। इससे बाजार में गुड़ की कीमत और मांग दोनों बढ़ने की संभावना है।

किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा लाभ

सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनने से गन्ना किसानों, गुड़ निर्माताओं और ग्रामीण उद्यमियों को सीधा फायदा मिलेगा। बेहतर कीमत मिलने से किसानों की आय बढ़ेगी, छोटे-छोटे गुड़ उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा और गांवों में नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। यह पहल बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के साथ-साथ राज्य को गुड़ उत्पादन के एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने में मददगार साबित हो सकती है।

गन्ना अनुसंधान केंद्र, पूसा को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का दर्जा मिलना बिहार के लिए एक दूरगामी और रणनीतिक कदम माना जा रहा है। इससे न केवल गुड़ की गुणवत्ता और बाजार मूल्य में सुधार होगा, बल्कि किसानों की आमदनी और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। आने वाले समय में “बिहार का गुड़” देशभर में एक भरोसेमंद और प्रीमियम उत्पाद के रूप में पहचान बना सकता है।

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