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नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): हरियाणा में खरीफ विपणन सीजन 2026-27 के दौरान न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर धान की खरीद तेजी से आगे बढ़ रही है। 15 अक्टूबर तक राज्य की मंडियों में 15.52 लाख टन धान की खरीद की जा चुकी है। इसके एवज में किसानों को 1,221 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। प्रदेश में धान की आवक, खरीद, उठान और भुगतान की स्थिति की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने अधिकारियों को खरीद प्रक्रिया सुचारु बनाए रखने के निर्देश दिए।

राज्य सरकार का जोर मंडियों में किसानों को सुविधाएं उपलब्ध कराने, खरीदे गए धान का समय पर उठान सुनिश्चित करने और भुगतान प्रक्रिया में तेजी लाने पर है। सरकार ने खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए तकनीकी व्यवस्थाओं और राइस मिलों की निगरानी पर भी विशेष ध्यान दिया है।

मंडियों में 21.27 लाख टन धान की आवक

अधिकारियों के अनुसार, 15 अक्टूबर तक हरियाणा की मंडियों में कुल 21.27 लाख टन धान पहुंच चुका था। इसमें से 15.52 लाख टन धान MSP पर खरीदा गया, जबकि खरीदे गए धान में से 7.69 लाख टन का उठान पूरा हो चुका था।

ये आंकड़े बताते हैं कि मंडियों में धान की आवक और सरकारी खरीद की गतिविधियां लगातार जारी हैं। हालांकि, खरीद के बाद धान का उठान भी उतना ही महत्वपूर्ण है, क्योंकि मंडियों में लंबे समय तक उपज जमा रहने से जगह की कमी और आगे आने वाली फसल के प्रबंधन में दिक्कतें पैदा हो सकती हैं।

मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि खरीद और उठान की प्रक्रिया के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखा जाए, ताकि किसानों को अपनी उपज बेचने में परेशानी न हो।

58 लाख टन धान खरीद का लक्ष्य

केंद्र सरकार ने खरीफ सीजन के दौरान हरियाणा के लिए 58 लाख टन धान खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया है। राज्य सरकार 15 अक्टूबर तक इस लक्ष्य का लगभग 27 प्रतिशत हिस्सा हासिल कर चुकी थी।

प्रदेश की 249 निर्धारित मंडियों में धान खरीद की प्रक्रिया 29 सितंबर से शुरू हुई है और 15 नवंबर तक जारी रहने की योजना है। ऐसे में आने वाले हफ्तों में खरीद की रफ्तार बनाए रखना प्रशासन के लिए अहम होगा।

सरकार के सामने निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप खरीद पूरी करने के साथ-साथ मंडियों में आवक, तुलाई, उठान और भुगतान की व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखने की चुनौती भी है।

खरीद केंद्रों पर सुविधाएं बढ़ाने के निर्देश

मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने समीक्षा बैठक में जिला प्रशासन, खरीद एजेंसियों, मंडी प्रशासन, ट्रांसपोर्टरों और राइस मिलरों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया।

उन्होंने निर्देश दिए कि किसानों को खरीद केंद्रों पर आवश्यक सुविधाएं मिलें और उनकी उपज की खरीद में अनावश्यक देरी न हो। इसके लिए धान की तुलाई, नमी की जांच, गेट-पास जारी करने और आवश्यक दस्तावेजों के निपटारे की प्रक्रिया को समयबद्ध बनाने पर ध्यान दिया जा रहा है।

सरकार के अनुसार, खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना भी प्राथमिकता है। समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए खरीद से जुड़े रिकॉर्ड और दस्तावेजों का सही तरीके से निपटारा किया जा रहा है, ताकि किसानों के बैंक खातों में राशि भेजने में देरी न हो।

1,433 राइस मिलों का पंजीकरण, 1,215 की जांच पूरी

धान खरीद और मिलिंग प्रक्रिया की निगरानी मजबूत करने के लिए सरकार ने ऑनलाइन व्यवस्था का इस्तेमाल बढ़ाया है। समीक्षा बैठक में बताया गया कि नए ऑनलाइन पोर्टल पर अब तक 1,433 राइस मिलों ने पंजीकरण कराया है।

इनमें से 1,215 मिलों का जियो-फेंसिंग के माध्यम से मौके पर जाकर सत्यापन पूरा किया जा चुका है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य मिलों की वास्तविक स्थिति की पुष्टि करना और खरीद के बाद धान की मिलिंग व्यवस्था पर निगरानी रखना है।

इसके अतिरिक्त, सरकार मिलों की बिजली खपत और बिजली बिलों की भी जांच कर रही है। इससे मिलिंग गतिविधियों की निगरानी करने और रिकॉर्ड में पारदर्शिता बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।

आधार आधारित सत्यापन से पारदर्शिता पर जोर

मंडियों में खरीद प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन भी शुरू किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, 15 अक्टूबर तक 1,52,136 किसानों का सत्यापन किया जा चुका था।

इस व्यवस्था का उद्देश्य खरीद प्रक्रिया में किसानों की पहचान की पुष्टि करना और रिकॉर्ड को अधिक व्यवस्थित बनाना है। ऑनलाइन पंजीकरण, जियो-फेंसिंग और बायोमेट्रिक सत्यापन जैसी व्यवस्थाओं के जरिए सरकार खरीद प्रणाली में निगरानी और जवाबदेही बढ़ाने की कोशिश कर रही है।

किसानों के लिए आगे क्या है?

हरियाणा में अब तक 15.52 लाख टन धान की MSP पर खरीद और 1,221 करोड़ रुपये के भुगतान से खरीद प्रक्रिया की प्रगति सामने आती है। हालांकि, 58 लाख टन के लक्ष्य को पूरा करने के लिए शेष सीजन में खरीद की गति बनाए रखना जरूरी होगा।

साथ ही, खरीदे गए धान का समय पर उठान, किसानों को भुगतान और राइस मिलों के साथ बेहतर समन्वय निर्णायक रहेंगे। आगामी दिनों में मंडियों में धान की आवक बढ़ने के साथ प्रशासन की कार्यक्षमता और व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी भी महत्वपूर्ण होगी।

सरकार के लिए अब प्रमुख चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि किसानों को अपनी उपज बेचने, भुगतान प्राप्त करने और मंडियों में सुविधाएं हासिल करने में अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।

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