लखनऊ (कृषि भूमि ब्यूरो): उत्तर प्रदेश के अवध क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों से हो रही लगातार बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। सुल्तानपुर, बहराइच, बाराबंकी समेत कई जिलों में धान, मक्का और सब्जियों की फसलों को नुकसान पहुंचने की खबर है। कई इलाकों में खेतों में पानी भर गया है, जबकि तेज हवा के साथ हुई बारिश से तैयार और पकने की अवस्था में पहुंच चुकी धान की फसल खेतों में गिर गई है।
सुल्तानपुर में नुकसान का असर खास तौर पर धान की फसल पर बताया जा रहा है। जिले के उप कृषि निदेशक सुरेंद्र प्रताप सिंह के अनुसार, 10 हजार हेक्टेयर से ज्यादा जमीन पर खड़ी धान की फसल चौपट हुई है। प्रशासन और कृषि विभाग की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान का आकलन कराया जा रहा है।

तैयार फसल खेतों में गिरी
बारिश का समय किसानों के लिए इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि धान की फसल कई क्षेत्रों में पकने की ओर बढ़ रही है। बहराइच में बारिश से तैयार धान की फसल खेतों में गिरने की रिपोर्ट है। वहीं बाराबंकी में बारिश के साथ तेज हवा के कारण धान की खड़ी फसल गिर गई, जिससे किसानों को कटाई और उत्पादन दोनों स्तरों पर नुकसान की चिंता है।
सुल्तानपुर में भी लगातार बारिश से खेतों में जलभराव की स्थिति बनी है। स्थानीय कृषि अधिकारियों ने मौसम खुलने पर पकी फसल की जल्द कटाई और खेतों से अतिरिक्त पानी निकालने की सलाह दी है।
धान के साथ मक्का और सब्जियां भी प्रभावित
नुकसान केवल धान तक सीमित नहीं है। अवध के प्रभावित जिलों में मक्का और सब्जियों को भी बारिश और जलभराव से नुकसान की सूचना है। सुल्तानपुर के कुछ क्षेत्रों में तोरई, लौकी, कद्दू, टमाटर, पालक, मूली, मेथी और गोभी जैसी सब्जियों पर भी बारिश का असर पड़ा है।
इस समय खेतों में अतिरिक्त पानी की निकासी किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। लगातार नमी से फसल की गुणवत्ता प्रभावित होने के साथ रोग और कीटों का खतरा भी बढ़ सकता है। सुल्तानपुर में बारिश के बाद पहले से ही धान में कीटों के प्रकोप की रिपोर्ट सामने आ चुकी है।
सरकार ने सर्वे और नुकसान की भरपाई के निर्देश दिए
लगातार बारिश से फसल नुकसान को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रभावित जिलों में सर्वे कराकर नुकसान की भरपाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। अब प्रशासन के सामने चुनौती प्रभावित खेतों का वास्तविक आकलन करने और पात्र किसानों तक राहत पहुंचाने की है।
यह प्रक्रिया इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि नुकसान का सही आकलन ही मुआवजे और बीमा दावों के लिए आधार बनेगा। राज्य में पहले भी अतिवृष्टि और बाढ़ से हुए फसल नुकसान के मुआवजे को लेकर बड़ी संख्या में आवेदन सामने आ चुके हैं।
फसल बीमा से मिल सकती है राहत
सुल्तानपुर में खरीफ सीजन 2026-27 के दौरान बड़ी संख्या में किसानों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमा कराया है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, जिले में 1.12 लाख से अधिक किसानों ने फसल बीमा कराया है। बारिश और जलभराव से हुए नुकसान का आकलन होने के बाद पात्र किसानों को योजना के प्रावधानों के अनुसार बीमा लाभ मिल सकता है।
केंद्र सरकार के अनुसार, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत स्थानीय स्तर पर ओलावृष्टि, जलभराव और बादल फटने जैसे जोखिमों से हुए नुकसान का आकलन व्यक्तिगत बीमित खेत के आधार पर किया जा सकता है। ऐसे मामलों में राज्य सरकार और बीमा कंपनी के प्रतिनिधियों की संयुक्त समिति नुकसान का आकलन करती है।
किसानों के सामने अब दोहरी चुनौती
धान की फसल कटाई के करीब पहुंचने के समय हुई बारिश ने किसानों के सामने दोहरी चुनौती खड़ी कर दी है। एक ओर खेतों में खड़ी फसल को बचाना मुश्किल हो रहा है, वहीं दूसरी ओर खेतों से पानी निकालने और मौसम खुलने के बाद जल्द कटाई करने की जरूरत है।
अभी वास्तविक नुकसान का अंतिम आंकड़ा सामने आना बाकी है। प्रभावित जिलों में सर्वे पूरा होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कितने क्षेत्र में कितनी फसल को नुकसान हुआ और कितने किसानों को राहत या बीमा भुगतान के दायरे में लाया जा सकता है।
इस बीच, मौसम विभाग ने 25 सितंबर को भी उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है। ऐसे में अगले कुछ दिन धान समेत खरीफ फसलों के लिए महत्वपूर्ण रहने वाले हैं।
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