नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने भारत छोड़ो दिवस की 84वीं वर्षगांठ पर देशव्यापी ‘जेल भरो’ और अन्य विरोध प्रदर्शनों का आयोजन किया। इस राष्ट्रव्यापी आंदोलन के माध्यम से किसानों, कृषि श्रमिकों और ग्रामीण मजदूरों से जुड़े विभिन्न गंभीर मुद्दों पर केंद्र सरकार के तत्काल हस्तक्षेप की पुरजोर मांग की गई। राजस्थान सहित देश के विभिन्न राज्यों में SKM के बैनर तले किसानों ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को संबोधित ज्ञापन संबंधित जिला कलेक्टरों के माध्यम से सौंपे।
देशव्यापी भागीदारी और प्रमुख नाराजगी
SKM की राजस्थान इकाई और विभिन्न राज्यों के संगठनात्मक आंकड़ों के अनुसार, देश भर के गांवों, पंचायतों, ब्लॉकों, जिला मुख्यालयों और कस्बों में आयोजित इन विरोध कार्यक्रमों में किसानों, कृषि श्रमिकों, औद्योगिक मजदूरों, ग्रामीण श्रमिकों, आदिवासियों, सरकारी व गैर-सरकारी कर्मचारियों, युवाओं और महिलाओं ने भारी संख्या में भाग लिया।
किसान संगठनों में इस बात को लेकर गहरी नाराजगी है कि 9 दिसंबर 2021 को दिल्ली की सीमाओं पर हुए ऐतिहासिक किसान आंदोलन के समापन के दौरान केंद्र सरकार द्वारा जो लिखित आश्वासन दिए गए थे, उन्हें आज तक पूरी तरह लागू नहीं किया गया है।
SKM की प्रमुख और मुख्य मांगें
आंदोलन के दौरान किसानों और श्रमिकों के हितों को ध्यान में रखते हुए SKM द्वारा कई सूत्रीय मांगपत्र सौंपे गए, जिनमें प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:
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एमएसपी की कानूनी गारंटी: स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के आधार पर सभी फसलों के लिए $C_2+50\%$ के फार्मूले पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी और इसकी सुनिश्चित सरकारी खरीद का कानून बनाया जाए।
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व्यापक ऋण माफी: देश के किसानों और कृषि श्रमिकों का संपूर्ण कर्ज माफ किया जाए। इसके साथ ही, किसान आत्महत्या के प्रत्येक मामले में पीड़ित परिवार को 25 लाख रुपये का मुआवजा और पूर्ण पुनर्वास सुनिश्चित किया जाए।
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मुक्त व्यापार समझौतों का विरोध: भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते का विरोध करते हुए मौजूदा विदेशी व्यापार समझौतों की समीक्षा की जाए और कृषि उत्पादों के मुक्त आयात पर तत्काल रोक लगाई जाए।
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मनरेगा और श्रम कानून: ग्रामीण रोजगार योजना (मनरेगा) को मजबूत करते हुए हर साल कम से कम 200 दिनों के रोजगार और न्यूनतम 700 रुपये प्रतिदिन मजदूरी की गारंटी दी जाए। इसके अलावा, चारों श्रम संहिताओं (Labour Codes) को वापस लिया जाए और अकुशल व कुशल श्रमिकों के लिए 42,000 रुपये मासिक वैधानिक न्यूनतम वेतन तय किया जाए।

नीतिगत सुधार और सामाजिक सुरक्षा की मांग
किसानों और ग्रामीण अंचल के अधिकारों की रक्षा के लिए संगठन ने निम्नलिखित नीतिगत बदलावों की भी मांग की है:
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विद्युत निजीकरण विधेयक 2025, बीज विधेयक 2025 और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम में प्रस्तावित संशोधनों को तत्काल वापस लिया जाए।
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भूमि अधिग्रहण और कॉरपोरेट समर्थित भूमि पूलिंग (Land Pooling) का विरोध करते हुए LARR अधिनियम, वन अधिकार अधिनियम (FRA) और PESA के तहत स्थानीय अधिकारों की रक्षा की जाए।
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भारतीय खाद्य निगम (FCI) को मजबूत किया जाए, साइलो (Silos) के निजीकरण पर रोक लगाई जाए, और उर्वरकों की कालाबाजारी व कमी को समाप्त किया जाए।
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उर्वरक, ईंधन, पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जाए।
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सार्वजनिक क्षेत्र की फसल और पशुधन बीमा योजना लागू की जाए, हर खेत तक सिंचाई का पानी पहुंचाया जाए, 60 वर्ष से अधिक उम्र के किसानों के लिए 10,000 रुपये मासिक पेंशन और प्राकृतिक आपदाओं (बाढ़ व सूखा) के लिए व्यापक राहत पैकेज दिया जाए।
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कृषि अनुसंधान, विकास और शिक्षा पर सार्वजनिक निवेश बढ़ाया जाए तथा सहकारी समितियों व किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को कॉरपोरेट नियंत्रण से बचाया जाए।
संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने राष्ट्रपति से आग्रह किया है कि वे देश के अन्नदाताओं की इन गंभीर समस्याओं पर संज्ञान लें और केंद्र सरकार को इन मांगों पर तत्काल सकारात्मक कार्रवाई करने के लिए निर्देशित करें।
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