नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): मानसून एक्टिव: देश में मानसून एक बार फिर जोर पकड़ रहा है। भारतीय मौसम प्रणाली में बने आठ चक्रवाती परिसंचरणों और मानसूनी गर्त की सक्रियता ने उत्तर-पश्चिम, पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत में बारिश का नया दौर शुरू कर दिया है। पूरे सप्ताह इन क्षेत्रों में अच्छी से भारी बारिश की संभावना है। हालांकि, मानसून की यह सक्रियता पहाड़ी राज्यों के लिए चुनौती बन गई है।
बारिश से 16 लोगों की मौत
भारी बारिश का असर जनजीवन पर भी देखने को मिल रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, रविवार को जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और नागालैंड में बारिश से जुड़ी घटनाओं में 16 लोगों की जान चली गई। सबसे अधिक नुकसान जम्मू-कश्मीर के पुंछ और राजौरी जिलों में हुआ, जहां अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने संवेदनशील पहाड़ी इलाकों में और अधिक भारी बारिश की चेतावनी दी है।
प्रमुख राज्यों के लिए IMD का पूर्वानुमान
अगले कुछ दिनों के लिए मौसम का पूर्वानुमान नीचे दी गई तालिका में देखा जा सकता है:
| क्षेत्र | मौसम की स्थिति |
| उत्तर-पश्चिम भारत | हिमाचल, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड में भारी बारिश जारी रहेगी। |
| मध्य भारत | मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और विदर्भ में सप्ताहभर बारिश। |
| पूर्वी और पूर्वोत्तर | असम, मेघालय, बिहार, ओडिशा में भारी से बहुत भारी बारिश। |
| पश्चिम भारत | कोंकण, गोवा, पूर्वी गुजरात में अच्छी बारिश का दौर। |
| दक्षिण भारत | केरल, तेलंगाना और तटीय आंध्र प्रदेश में मध्यम से भारी बारिश। |

क्यों सक्रिय हुआ मानसून?
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी और तटीय आंध्र प्रदेश के ऊपर बना चक्रवाती परिसंचरण मानसूनी गर्त (Monsoon Trough) से जुड़ गया है। यह गर्त राजस्थान के गंगानगर से लेकर उत्तर-पूर्वी बंगाल की खाड़ी तक फैला हुआ है। यह स्थिति बंगाल की खाड़ी से उत्तर भारत और हिमालय तक नमी की लगातार आपूर्ति कर रही है, जिससे बारिश का दायरा बढ़ा है। साथ ही, बंगाल की खाड़ी में जल्द ही एक नया निम्न दबाव का क्षेत्र (Low Pressure Area) बनने की संभावना है, जिससे आने वाले दिनों में मानसून की गतिविधियां और तेज हो सकती हैं।
किसानों के लिए राहत, पहाड़ों के लिए चुनौती
यह बारिश खरीफ की फसलों के लिए वरदान साबित हो रही है, जिससे जलाशयों का जलस्तर बढ़ने और सिंचाई की स्थिति में सुधार होने की उम्मीद है। हालांकि, दूसरी ओर हिमालयी राज्यों में लगातार हो रही बारिश भूस्खलन और सड़कों के बंद होने का कारण बन रही है।
मौसम विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि हालांकि मानसून अभी सक्रिय है, लेकिन भविष्य में ‘अल नीनो’ के प्रभाव से बारिश के दूसरे चरण में कमी आ सकती है। आने वाले समय में देश के कई हिस्सों में बारिश का स्तर सामान्य या सामान्य से कम रहने का अनुमान है। फिलहाल, प्रशासन ने लोगों को पहाड़ों की यात्रा के दौरान सतर्क रहने और मौसम विभाग के अपडेट्स का पालन करने की सलाह दी है।
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