नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): Kharif Sowing 2026: चालू खरीफ सीजन में फसलों की बुवाई ने रफ्तार पकड़ ली है, हालांकि मजबूत होते अल नीनो और अगले दो सप्ताह में सामान्य से कम बारिश की आशंका ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है।12 जुलाई 2026 तक, देश भर में 531.3 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई पूरी हो चुकी है। अच्छी बात यह है कि बुवाई का कुल आंकड़ा पिछले वर्षों के औसत के काफी करीब पहुंच गया है।
Kharif Sowing 2026: प्रमुख फसलों का प्रदर्शन
Kharif Sowing 2026: इस सीजन में फसलों के प्रदर्शन में काफी असमानता देखी जा रही है:
| फसल | बुवाई क्षेत्र (लाख हेक्टेयर) | स्थिति |
|---|---|---|
| धान | 114.7 | सामान्य से 17 लाख हेक्टेयर अधिक |
| गन्ना | 57.6 | सामान्य से 2.4 लाख हेक्टेयर अधिक |
| दलहन | 56.6 | सामान्य से 5.6 लाख हेक्टेयर कम |
| मोटे अनाज | 98.7 | सामान्य से 2.7 लाख हेक्टेयर कम |
| तिलहन | 117.8 | सामान्य से 13 लाख हेक्टेयर कम |
| कपास | 79.5 | सामान्य से 16.3 लाख हेक्टेयर कम |

मौसम का मिजाज और चुनौतियां
Kharif Sowing 2026: डोलट कैपिटल की रिपोर्ट और मौसम विभाग (IMD) के पूर्वानुमान के अनुसार, खरीफ सीजन के लिए मुख्य चुनौतियां निम्नलिखित हैं:
-
अल नीनो का प्रभाव: मजबूत होते अल नीनो के कारण आगामी हफ्तों में बारिश की अनिश्चितता बढ़ सकती है, जिससे कपास और तिलहन की फसलों को सबसे अधिक नुकसान होने की आशंका है।
-
क्षेत्रवार वर्षा की स्थिति: अगले दो सप्ताह में राजस्थान, महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और उत्तर आंतरिक कर्नाटक में सामान्य से कम बारिश होने का अनुमान है।
-
बारिश का घाटा: यद्यपि 12 जुलाई तक देश में कुल वर्षा की कमी -17.8% तक सिमट गई है, लेकिन पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में अभी भी 37% की कमी चिंता का विषय बनी हुई है।
क्या राहत की उम्मीद है?
Kharif Sowing 2026: किसानों के लिए राहत की बात यह है कि देश का कोई भी हिस्सा फिलहाल “अत्यधिक वर्षा कमी” (Large Deficient) श्रेणी में नहीं है। इसके अलावा, मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में बनने वाला नया चक्रवाती परिसंचरण (Cyclonic Circulation) मानसूनी ट्रफ को सक्रिय कर सकता है। इससे मध्य और पूर्वी भारत में बारिश बढ़ने और मिट्टी में नमी की स्थिति में सुधार होने की संभावना है, जो फसलों की बढ़वार के लिए अनिवार्य है।
Kharif Sowing 2026: फिलहाल धान और गन्ने की बंपर बुवाई से स्थिति नियंत्रण में दिख रही है, लेकिन तिलहन और कपास की बुवाई में पिछड़ना खाद्य तेलों और औद्योगिक कच्चे माल की कीमतों पर दबाव डाल सकता है। आगामी 15 दिनों की बारिश का पैटर्न यह तय करेगा कि भारत का खरीफ उत्पादन का लक्ष्य कितना सुरक्षित है।
====
इन ख़बरों को भी पढ़ें…
कमजोर मानसून से खरीफ बुवाई को झटका, रकबा 21% घटा; तिलहन और कपास में बड़ी गिरावट
प्याज बफर स्टॉक खरीद को रफ्तार देने के लिए केंद्र ने बढ़ाई खरीद कीमत
किसानों से महंगा धान, इथेनॉल कंपनियों को सस्ता चावल! सरकार की OMSS नीति पर बड़े सवाल
प्याज किसानों को राहत; केंद्र ने बढ़ाया न्यूनतम खरीद मूल्य, 16.50 रुपये किलो पर होगी खरीद